Surah Alam Nashrah Hindi Translation

सूरह अलम नशरह हिन्दी तर्जुमा

1. अलम नशरह लका सदरह

2. व वदअ’ना अंका विज़रक

3. अल्लज़ी अन्क़दा ज़हरक

4. व रफ़अ’ना लका ज़िकरक

5. फ़ इन्ना मअल उसरि युसरा

6. इन्ना मअल उसरि युसरा

7. फ़ इज़ा फरगता फंसब

8. व इला रब्बिका फरगब

Surah Alam Nashrah Translation

1. क्या हम ने आपका सीना नहीं खोल दिया

2. और आपके उस बोझ को आप से उतार दिया

3. जिस ने आपकी कमर तोड़ रखी थी

4. और आपके लिए आपके तजकरे को बलंदी अता की

5. चुनांचे हकीकत ये है कि मुश्किलात के साथ आसानी भी होती है

6. यक़ीनन मुश्किलात के साथ आसानी भी होती है

7. तो जब आप (कामों से) फ़ारिग हो जाएँ तो (इबादत में) मेहनत किया कीजिये

8. और अपने परवरदिगार ही से दिल लगाइए

Surah Alam Nashrah Hindi Translation

Surah Alam Nashrah Ki Tafseer

पहली तीन आयतों में बताया गया है कि जब हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नुबुव्वत की एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई तो शुरू में आपने उनका जबरदस्त बोझ महसूस किया, इस बोझ की वजह से आप शुरू में आप बेचैन रहते थे, लेकिन फिर अल्लाह तआला ने आपको वह हौसला अता फ़रमाया, जिसके नतीजे में आपने मुश्किल से मुश्किल काम बहुत इत्मीनान और सुकून के साथ अंजाम दिये, इस सूरत में अल्लाह तआला के इसी इनाम का ज़िक्र है

चौथी आयत में : अल्लाह तआला ने हुजूर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के मुबारक नाम को वह बुलंद मक़ाम अता फ़रमाया है कि दुनिया के हर इलाक़े में पांच वक्त आपका मुबारक नाम अल्लाह तआला के साथ मस्जिदों से बुलंद होता है, आपके मुबारक तज्करे दुनिया भर में इन बहुत अकीदत के साथ होते हैं और उन्हें एक बहुत बड़ी इबादत करार दिया जाता है

 

पांचवी और छठी : नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तसल्ली दी जा रही है कि शुरू में आपको इस काम में जो मुश्किल पेश आ रही हैं वह बहुत जल्द ही आसानी में तब्दील हो जाएगी इसके साथ एक आम कायदे के तौर पर आम इंसानों को भी यह सबक दिया गया है की दुनिया में मुश्किल पेश आए तो यह समझ ले कि उनके बाद आसानी का वक्त भी आएगा

 

सातवीं और आठवीं आयत : जाहिर है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सारे काम दीन के लिए थे तबलीग़ हो या तालीम, जिहाद हो या हुकूमत और ये ख़ुद का दर्जा रखते थे लेकिन फरमाया जा रहा है कि जब इन कामों से फारिग हो तो सिर्फ़ इबादत नफली नमाज और जुबानी ज़िक्र वगैरह में इतने लगिए कि जिस्म थकने लगे, इससे मालूम होता है कि जो लोग दीन की खिदमत में लगे हुए हैं उनको भी कुछ वक़्त सिर्फ़ बातों के लिए ख़ास करना चाहिए इससे अल्लाह तआला के साथ ताल्लुक मजबूत होता है और उसी से दूसरे कामों में बरकत पैदा होती है

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