Surah An-Naba Hindi Translation |
सूरह नबा का तरजुमा व तफ़सीर
Surah An-Naba Hindi Translation : 30 वें पारे की पहली सूरह जिसका नाम नबा है उसमें 40 आयतें हैं, ये सूरह मक्का में नाज़िल हुई थी। और क़ुरआन में ये 78 नंबर की सूरह है, तो चलिए, आज इस पोस्ट में Surah An-Naba का हिन्दी में तरजुमा और तफ़सीर बयान करेंगे। जैसा कि इस से पहले भी कई सूरतों की तफ़सीर और तरजुमा बयान किया जा चुका है जिन्हें आप पढ़ सकते हैं।
अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
(1) عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ
Hindi : अम्मा य-तसाअलून
Translation : ये लोग किस चीज़ के बारे में सवालात कर रहे हैं?
(2) عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ
Hindi : अनिन् न-बइल अज़ीम
Translation : उस बड़ी खबर( बड़े वाकिए) के बारे में
(3) الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
Hindi : अल्लज़ी हुम फ़ीहि मुख़ तलिफ़ून
Translation : जिस के बारे में वो ख़ुद झगड़ते रहते हैं
आयत न. 1 से 3 :
इन आयतों में उस “बड़ी खबर” का ज़िक्र किया जा रहा है, जिसे कुरान ने “नबअ-ए-अज़ीम” कहा है, जिसका मतलब होता है आख़िरत (क़यामत)। मक्का के काफ़िर इस बात यानि आख़िरत (क़यामत) को लेकर बहस करते रहते थे, कुछ तो मानते थे और कुछ इनकार करते थे, यानि इंसानों के बीच एक बड़ा इख़्तिलाफ हमेशा इसी बात पर रहा है कि मौत के बाद ज़िंदगी है या नहीं |
(4) كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
Hindi : कल्ला सयअ’ लमून
Translation : ख़बरदार, उन्हें बहुत जल्द पता चल जायेगा
(5) ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
Hindi :सुम्मा कल्ला सयअ’ लमून
Translation : दोबारा ख़बरदार , उन्हें बहुत जल्द पता चल जायेगा
आयत न. 4 से 5 :
यहाँ अल्लाह तआला बहुत सख़्त अंदाज़ में warning दे रहे हैं कि जिस चीज़ को तुम झुटला रहे हो वो बहुत जल्द हकीकत बनकर तुम्हारे सामने आने वाली है, और आपने देखा होगा यहाँ पर एक ही बात को (उन्हें बहुत जल्द पता चल जायेगा )दो बार दोहराने गया है, जिसका मतलब है पक्का यकीन दिलाना और warning को और strong बनाना |
(6) أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا
Hindi : अलम नजअलिल अरदा मिहादा
Translation : क्या हमने ज़मीन को बिछौना नहीं बनाया?
(7) وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا
Hindi : वल जिबाला औतादा
Translation : और पहाड़ों को खूंटे नहीं बनाया?
जिस तरह कील किसी चीज में गाड़ दी जाती है तो उस कील का अक्सर हिस्सा अंदर घुसकर उस चीज़ को मजबूत कर देता है, इसी तरह पहाड़ों को अल्लाह तआला ने जमीन में गाड़ दिया है, तो जितना हिस्सा ऊपर आप पहाड़ों का देखते हैं उतना ही या उससे ज्यादा जमीन के अंदर भी होता है ताकि जमीन जलजलों से महफूज रहे और जमीन के अंदर मौजूद जो प्लेटें है वो जमीन को हिलाती ना रहें |
(8) وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا
Hindi : व-ख़लक़ नाकुम अज़वाजा
Translation : और हमने तुम्हें (मर्द और औरत के) जोड़ों में पैदा किया
(9) وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا
Hindi : वजअलना नौ-मकुम सुबाता
Translation : और हमने तुम्हारी नींद को थकन दूर करने का ज़रिया बनाया
(10) وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ لِبَاسًا
Hindi : वजअल्नल लैला लिबासा
Translation : और हमने रात को परदे का ज़रिया बनाया
आयत न. 6 से 10 : अब यहाँ अल्लाह तआला अपनी कुदरत की निशानियाँ पेश कर रहे हैं
- ज़मीन को इंसान के लिए आराम की जगह बनाया
- पहाड़ों को ज़मीन की मजबूती के लिए गाड़ दिया
- इंसान को जोड़ों में पैदा किया (मर्द और औरत) ताकि मियां बीवी के ज़रिये तुम्हारी नस्ल बढ़ सके
- नींद को आराम का ज़रिया बनाया
नीन्द अल्लाह की बड़ी नेअमत है जिससे इन्सान के पूरे जिस्म को आराम मिलता है अगर किसी को 24 घन्टे नीन्द न आये तो उसका जिस्म बे
सुकून और बे आराम हो जाता है ख़ास कर इन्सान के दिमाग़ का आराम तो नीन्द से ही होता है इसी लिए अल्लाह त आला ने यहाँ ज़िक्र फ़रमाया
- रात को ढकने और सुकून का वक़्त बनाया
अगर रात न होती हमेशा सूरज रौशन रहता और लोगों से कहा जाता कि अपनी अपनी सहूलत के हिसाब से आराम कर लें ,तो वो सुकून उनको कभी न मिल पाता जो रात की तारीकी में मिलता है, क्यूंकि हो सकता है जब आपके सोने का वक़्त हो तब आपके पड़ोसी के जागने का वक़्त हो |
ये सारी चीज़ें ये बता रही हैं कि ये दुनिया कोई accident नहीं है, बल्कि एक perfect system है और जब ये सब अल्लाह ने बनाया है, तो इंसान को दोबारा पैदा करना उसके लिए बिलकुल आसान है
(11) وَجَعَلْنَا النَّهَارَ مَعَاشًا
Hindi : वजअल्नन नहारा मआशा
Translation : और हमने दिन को रोज़ी कमाने का वक़्त बना दिया
दिनभर के कारोबार और तरह तरह के कामों के लिए रौशनी की ज़रुरत पड़ती है और दिन में कुदरत की तरफ से ये रौशनी सूरज की शक्ल में अता कर दी है, आप ख़ुद सोचें कि अगर सूरज की रौशनी न हो तो जाने कितने बल्ब चिराग की ज़रूरत पड़ती लेकिन तब भी वो रौशनी हासिल न होती जो सूरज से हासिल होती है |
(12) وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا
Hindi : व-बनैना फौ क़कुम सबअन शिदादा
Translation : और तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत आसमान बनाए
(13) وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا
Hindi : वजअल्ना सिराजौ वह्हाजा
Translation : और हमने एक चमकता हुआ चिराग (सूरज) बनाया
(14) وَأَنزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا
Hindi : वअन्ज़ल्ना मिनल मुअ’सिराति माअन सज़्जाजा
Translation : और बादलों से मूसलाधार पानी उतारा
(15) لِّنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا
Hindi : लिनुख् रिजा जा बिही हब्बौ व नबाता
Translation : ताकि हम उससे अनाज और पौधे उगाएं
(16) وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا
Hindi : व जन्नातिन अल्फाफा
Translation : और घने बाग़ पैदा करें
आयत न. 12 से 16 : यहाँ अल्लाह तआला अपनी कुदरत की और निशानियाँ बयान कर रहे हैं
- दिन को मेहनत और रोज़ी कमाने के लिए बनाया
- आसमान को मजबूत और सुरक्षित बनाया
- सूरज को रोशनी और गर्मी का ज़रिया बनाया
- बारिश को जीवन का स्रोत बनाया
- और उससे फसलें, पौधे और बाग़ पैदा किए
ये पूरा system एक complete planning के साथ बना है
अगर पानी न हो → जिंदगी खत्म
अगर सूरज न हो → रोशनी खत्म
अगर दिन-रात का system न हो → balance खत्म, तो सोचो…जिसने इतना perfect system बनाया है क्या उसके लिए इंसान को दोबारा ज़िंदा करना मुश्किल है?
(17) إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا
Hindi : इन्न यौमल फ़स्लि काना मीक़ाता
Translation : यक़ीन जानो फ़ैसले के दिन (क़यामत) का एक वक़्त तय है
(18) يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
Hindi : यौमा युनफ़खु फिस्सूरि फतअ’तूना अफ्वाजा
Translation : जिस दिन सूर फूंका जाएगा और तुम सब फ़ौज दर फ़ौज चले आओगे
यानि उस दिन ईमान लाने वालों का ग्रुप बनेगा, और ईमान न लाने वालों का का भी ग्रुप बनेगा और मुनाफ़िकों का अलग ग्रुप बनेगा और यहाँ तक कि मुसलमानों में भी उनके आमाल के हिसाब से अलग अलग ग्रुप और गिरोह बनाये जायेंगे और ये सब अपने गिरोह और ग्रुप में हिसाब किताब की जगह हाज़िर होंगें |
(19) وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا
Hindi : वफुति हतिस समाउ फ़कानत अब्वाबा
Translation : और आसमान खोल दिया जाएगा तो उसके दरवाज़े ही दरवाज़े बन जायेंगे
यानी वह आसमान जो बिल्कुल बंद था अब उसमें दरवाजे ही दरवाजे हो जाएंगे और हर तरफ से खुला हुआ नजर आएगा
(20) وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
Hindi : वसुय यि-रतिल जिबालु फ़कानत सराबा
Translation : और पहाड़ चला दिए जाएंगे तो वो रेत रेत होकर जाएंगे
आयत न. 17 से 20 :
अब यहाँ से क़यामत का सीन शुरू होता है जिसके बारे में अल्लाह तआला ने फ़रमाया…
क़यामत का एक दिन तय है जिसे टाला नहीं जा सकता, उस दिन जब सूर फूंका जाएगा तो सारी इंसानियत उठ खड़ी होगी फिर लोग झुंड के झुंड मैदान-ए-हश्र में आकर जमा हो जायेंगे, आसमान का मन्ज़र तो बदल ही जायेगा, वो उस दिन बंद नहीं बल्कि खुला हुआ दिखेगा और उसमें दरवाज़े खुल जायेंगे और वो पहाड़ जो आज मजबूत दिखते हैं, कल रेत की तरह उड़ जाएंगे
यानी जिस दुनिया को तुम stable समझते हो वो उस दिन पूरी तरह बदल जाएगी ,एक और बात…आज इंसान पहाड़ों को देखकर कहता है “ये तो कभी नहीं हिल सकते” लेकिन उसी दिन वही पहाड़ धुएँ की तरह उड़ जाएंगे तो इंसान की औकात क्या है?
(21) إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا
Hindi : इन्न जहन्नमा कानत मिरसादा
Translation : यक़ीनन जहन्नम घात लगाये बैठी हुई है
(22) لِّلطَّاغِينَ مَآبًا
Hindi : लित्तागीना मआबा
Translation : वो सरकश लोगों का ठिकाना है
(23) لَّابِثِينَ فِيهَا أَحْقَابًا
Hindi : लाबिसीना फ़ीहा अह्बाक़ा
Translation : जिसमें वो लंबे अरसे तक पड़े रहेंगे
(24) لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا
Hindi : ला यज़ूकूना फीहा बरदौ वला शराबा
Translation : उस में न वो किसी ठंडक का मज़ा चखेंगे और किसी पीने के लायक़ चीज़ का
(25) إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا
Hindi : इल्ला हमीमौ व ग़स्साक़ा
Translation : सिर्फ़ गर्म पानी और पीप का
(26) جَزَاءً وِفَاقًا
Hindi : जज़ाऔ विफाक़ा
Translation : ये उनका (कर्मों का) पूरा बदला होगा
आयत न. 21 से 26 :
यहाँ जहन्नम का डरावना मंजर बयान किया गया है जैसे शिकारी शिकार के घात में बैठा रहता है उसी तरह दोज़ख दोज़खियों के इंतेज़ार में बैठी हुई है , वहाँ न सुकून होगा न ठंडक न आराम, सिर्फ़ खौलता हुआ पानी और दर्दनाक सज़ा
और सबसे अहम बात , ये कोई ज़ुल्म नहीं होगा बल्कि उनके अपने कर्मों का नतीजा होगा
आयत न. 26 :
इस दुनिया में किसी भी इन्सान को पूरा बदला नहीं मिल सकता ,जैसे अगर एक शख्स ने किसी को कत्ल कर दिया तो ज्यादा से ज्यादा बदले बदले में उसको भी क़त्ल किया जा सकता है बस, लेकिन आप ख़ुद सोचें इसने जिस को क़त्ल किया था उसकी पूरी नस्ल तालीम और तरबियत से महरूम हो गयी ,और घर में उसकी कमी उसके बच्चों बीवियों को महसूस होती है उसकी बीवी उसकी वजह से बेवा हो जाती है तो क्या कातिल को इसकी भी कोई सजा दी जा सकती है |
(27) إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا
Hindi : इन्नहुम कानू ला यरजूना हिसाबा
Translation : वो लोग उम्मीद ही नहीं रखते थे कि हिसाब किताब होगा
(28) وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا
Hindi : वकज्ज़बू बि आयातिना किज्ज़ाबा
Translation : और (इसीलिए) हमारी आयतों को पूरी तरह झुठला दिया था
(29) وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا
Hindi : वकुल्ल शैइन अह्सैनाहु किताबा
Translation : और हमने हर चीज़ को लिखकर महफूज़ कर रखा है
(30) فَذُوقُوا فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
Hindi : फज़ूकू फलन नज़ीदकुम इल्ला अज़ाबा
Translation : अब मज़ा चखो, इसलिए कि हम तुम्हारा अज़ाब बढ़ाते चले जायेंगे
आयत न. 27 से 30 :
यहाँ उन लोगों की हालत बताई गई है जो आख़िरत को नहीं मानते थे, वो समझते थे कि कोई हिसाब नहीं होगा, इसलिए गुनाह करते रहे और अल्लाह की आयतों को झुठलाते रह लेकिन हकीकत ये है, कि हर छोटा-बड़ा अमल रिकॉर्ड हो रहा है कुछ भी छुपा नहीं है और जब सज़ा मिलेगी तो कहा जाएगा अब वही चखो जो तुमने किया यानि अब अपने कर्मों की सज़ा भुगतो |
(31) إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
Hindi : इन्न लिल मुत्तक़ीना मफ़ाज़ा
Translation : जिन लोगों ने तक़वा इख्तियार किया था उन के लिए बड़ी कामयाबी है
(32) حَدَائِقَ وَأَعْنَابًا
Hindi : हदाइक़ व अअ’नाबा
Translation : (यानि) बाग़ और अंगूर
(33) وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا
Hindi : वकवाअिब अतराबा
Translation : और नौजवान हमउम्र लड़कियां
(34) وَكَأْسًا دِهَاقًا
Hindi : वकअ’सन दिहाक़ा
Translation : और छलकते हुए प्याले (जाम)
(35) لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا
Hindi : ला यस्मऊना फ़ीहा लग्वौ वला किज्ज़ाबा
Translation : वहाँ पर वो लोग न कोई बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ
आयत न. 31 से 35 :
अब यहाँ जन्नत का खूबसूरत मंजर बयान किया गया है, जो लोग अल्लाह से डरते थे और अपने आपको गुनाहों से बचाते थे, उनके लिए खूबसूरत बाग़, फलों की भरमार, सुकून देने वाले साथी, खुशियों से भरे प्याले और सबसे खास वहाँ कोई tension नहीं कोई झूठ नहीं कोई बेकार बात नहीं यानी perfect peace
(36) جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا
Hindi : जज़ाअम मिन रब्बिका अताअन हिसाबा
Translation : ये (सब) तुम्हारे रब की तरफ से बदला (इनाम) होगा जो (आमाल) के हिसाब से दिया जायेगा
(37) رَّبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
Hindi : रब्बिस् समावाति वल अरदि वमा बैनहुमर रहमानि ला यम लिकूना मिन्हु खिताबा
Translation : उस परवरदिगार की तरफ़ से जो आसमानों और ज़मीन और उसके दरमियान हर चीज़ मालिक है, किसी की मजाल नहीं कि उसके सामने बोल भी सके
(38) يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا
Hindi : यौमा यक़ूमुर रूहु वल मलाइकतु सफ्फा, ला य-तकल लमूना इल्ला मन अज़िना लहुर रहमानु वक़ाला सवाबा
Translation : जिस दिन सारी रूहें और फ़रिश्ते कतार बनाकर खड़े होंगे, और उस दिन अल्लाह सिवा कोई नहीं बोल सकेगा सिवाय उसको जिसे खुदाए रहमान इजाज़त दी हो और वो ठीक बात करे
आयत न. 36 से 38 :
परहेज़गारों को जन्नत का इनाम अल्लाह की तरफ से है और फिर यहाँ पर क़यामत के बारे में ये बात कही गयी है कि उस दिन लोगों पर इतनी हैबत तारी होगी कि फ़रिश्ते भी खामोश खड़े होंगे कोई बिना इजाज़त कुछ नहीं बोल सकेगा यानि उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की बादशाहत होगी |
और उस दिन अल्लाह के सिवा कोई नहीं बोल सकेगा यहाँ तक कि नबी को भी बोलने की इजाज़त नहीं होगी, हां बस वही बोलेगा और सिफारिश करेगा जिसको अल्लाह की तरफ से इजाजत हो, और उस दिन हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये इजाज़त हासिल होगी कि वो अपनी उम्मत के लिए सिफ़ारिश करें |
(39) ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا
Hindi : ज़ालिकल यौमुल हक्क़, फ़मन शाअत त-खज़ा इला रब्बिही मआबा
Translation : ये है वो सच्चा दिन, तो अब जो भी चाहे अपने रब की तरफ ठिकाना बना ले
(40) إِنَّا أَنذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا ۚ يَوْمَ يَنظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنتُ تُرَابًا
Hindi : इन्ना अन्ज़रनाकुम अज़ाबन क़रीबा, यौमा यन्ज़ुरुल मरउ मा क़द्दमत यदाहु व यक़ूलुल काफ़िरु या लै-तनी कुन्तु तुराबा
Translation : हक़ीक़त ये है कि हमने तुम्हें एक करीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया है… जिस दिन हर शख्स वो आमाल आँखों से देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेज रखे हैं, और काफ़िर कहेगा: काश! मैं मिट्टी होता
आयत न. 39 से 40 :
अल्लाह साफ़ कह रहे हैं ये दिन कोई कहानी नहीं, बल्कि सच्चा और हकीकी है,अब इंसान के पास choice है, चाहे तो अभी से अपनी आख़िरत बना ले, जो नहीं मानेगा वो उस दिन पछताएगा और काफिर लोग जिन्हें दोजख का अंजाम नजर आ रहा होगा वो तो बस यही तमन्ना करेंगे कि काश ! हम मिट्टी हो जाते और हमको इस अज़ाब का सामना न करना पड़ता |
इस सूरह से हमने क्या सीखा…
1. आख़िरत सबसे बड़ी हकीकत है
सूरह की शुरुआत में आख़िरत और क़यामत का ज़िक्र है, जिस पर लोग इख़्तिलाफ कर रहे थे, कुछ मानते थे और कुछ नहीं मानते थे।
सबक : लेकिन हमें समझ जाना चाहिए कि आख़िरत कोई कहानी नहीं बल्कि एक यकीनी हकीकत है, जिसके लिए हमें अभी से तैयारी करनी है।
2. अल्लाह की कुदरत हर जगह दिखाई देती है
इस सूरह में ज़मीन, पहाड़, रात, दिन, नींद, सूरज, बारिश और फसलों का ज़िक्र करके अल्लाह अपनी कुदरत की निशानियाँ बता रहे हैं।
सबक : इन निशानियों को देख कर ये जान लेना चाहिए कि जो अल्लाह इतनी बड़ी कायनात को चला रहा है, उसके लिए किसी इंसान को दोबारा ज़िंदा करना क्या मुश्किल है बल्कि बिल्कुल आसान है, इसलिए हमें उसकी कुदरत पर पूरा यकीन रखना चाहिए।
3. क़यामत का दिन तय है और अचानक आएगा
इस सूरह में क़यामत के बारे में एक चीज़ और बताई गयी है कि जिस दिन सूर फूंका जाएगा, लोग झुंड के झुंड उठ खड़े होंगे और पूरी दुनिया का सिस्टम बदल जाएगा।
सबक : इसलिए हमें हर वक्त तैयार रहना चाहिए, क्योंकि क़यामत का समय किसी को नहीं मालूम और वो अचानक आ सकती है।
4. जहन्नम सरकश लोगों के लिए तैयार है
जो लोग दुनिया को ही अपना सब कुछ मान लेते हैं और आख़िरत को पीछे छोड़ देते हैं, गुनाह करते रहते हैं और अल्लाह की बात नहीं मानते उनके लिए जहन्नम तैयार है।
सबक : इसलिए हमें अपनी नफ़्स और ख्वाहिशों पर कंट्रोल करना चाहिए और गुनाहों से बचना चाहिए, वरना उसका अंजाम बहुत खतरनाक होगा।
5. जन्नत परहेज़गारों के लिए है
जो लोग अल्लाह से डरते हैं और अपने आपको गुनाहों से बचाते हैं, और सिर्फ दुनिया ही नहीं बल्कि आख़िरत की ज़िन्दगी की भी तैयारी में रहते हैं उनके लिए ऐसी जन्नत है जिसमे में सुकून, खुशियाँ और हमेशा की राहत है।
सबक : इसलिए हमें असली कामयाबी दुनिया को नहीं बल्कि आख़िरत की ही समझना चाहिए, इसलिए हमें अपनी ज़िन्दगी में जन्नत के लिए तैयार करना चाहिए।
6. हर अमल का पूरा हिसाब होगा
इस सूरह में बताया गया है कि हर छोटा-बड़ा अमल लिखा जा रहा है और क़यामत के दिन उसका पूरा हिसाब लिया जाएगा।
सबक : तो हमें अपनी ज़िन्दगी के हर काम को सोच-समझकर करना चाहिए क्योंकि कोई भी चीज़ अल्लाह से छुपी नहीं है।
7. आज मौका है, कल सिर्फ़ पछतावा होगा
आख़िरी आयतों में बताया गया है कि काफ़िर उस दिन पछताएगा और कहेगा “काश मैं मिट्टी हो जाता”
सबक : इंसान के पास अभी मौका है तौबा करने और सही रास्ता अपनाने का, लेकिन क़यामत के दिन सिर्फ़ पछतावा ही बचेगा।
मजीद मालूमात के लिए क़ुरान की तफ्सीरें पढ़ें



