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Gareeb Rehne Ki Aadatein | 8 किस्म के मर्द जो गरीब ही मरेंगे

Gareeb Rehne Ki Aadatein

Gareeb Rehne Ki Aadatein |

8 किस्म के मर्द जो गरीब ही मरेंगे

Gareeb Rehne Ki Aadatein : कभी आपने गौर किया, कि दो मर्द एक जैसी मेहनत करते हैं, एक जैसी उम्र के होते हैं, लेकिन उन में से एक की ज़िंदगी में बरकत, तरक़्क़ी और सुकून दिखता है, जबकि दूसरा सारी उम्र मेहनत और संघर्ष ही करता रह जाता है? और अगर आप अपने आस पास के लोगों को ही देखें, तो बहुत से ऐसे मर्द मिलेंगे जो सुबह से रात तक मेहनत करते हैं, पसीना बहाते हैं, थककर चूर हो जाते हैं, लेकिन फिर भी उनकी ज़िंदगी में न माल टिकता है, न सुकून , और न ही हालात बदलते हैं।

तो अब सवाल उठता है, कि क्या सिर्फ कम कमाना ही इस ग़रीबी की वजह है? या इसके पीछे कोई और ही वजहें हैं, जी हाँ, बहुत सारी चीज़ें ऐसी हैं जिनपर हम गौर ही नहीं करते जैसे हमारी अपनी कुछ ग़लत आदतें, कुछ ग़लत फ़ैसले और कुछ ऐसे किरदार (Character) होते हैं जो हमारी मेहनत की कमाई को भी बेअसर कर देते हैं।

हम समझते हैं कि हमारी बदकिस्मती की वजह कहीं बाहर है, नहीं, कभी कभार वजह हमारे अपने अन्दर ही छुपी होती है। हमारी अपनी सोच में, अपनी आदतों में, और अपने किरदार में। तो आज का यह खुला ख़त शायद थोड़ा कड़वा लगे, और शायद कुछ बातें दिल को चुभें भी। लेकिन कभी-कभी ज़िंदगी बदलने के लिए मीठी तसल्ली की नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई की ज़रूरत होती है।

तो आइए, उन 8 किस्म के मर्दों को पहचानते हैं जो अक्सर अपनी ही आदतों की वजह से ग़ुरबत, परेशानियों और बेबरकती का शिकार बने रहते हैं। पढ़िए… और ईमानदारी से ख़ुद से पूछिए “कहीं मैं भी उनमें से एक तो नहीं?” तो यह खत उन 8 किस्म के मर्दों के नाम है। पढ़िए और खुद तय करिए कि आप इनमें से तो नहीं?

Gareeb Rehne Ki Aadatein | 8 किस्म के मर्द जो गरीब ही मरेंगे

1. फुज़ूलखर्च बीवी वाला मर्द

एक मर्द अपनी सेहत, नींद और जिस्म की कुर्बानी देकर कमाता है लेकिन बदकिस्मती से उसकी ज़िन्दगी में एक ऐसी औरत है जो शौहर की कमाई की कद्र नहीं करती, ज़रूरत और चाहत में फर्क नहीं समझती और पैसे को पानी की तरह बहाती है। तो बहुत मुश्किल है कि वो मर्द ख़ुश रहे और सुकून से ज़िन्दगी गुज़ारे |

प्यारी बीवियों! शौहर का घर और उसकी कमाई की हिफाज़त करना भी इबादत है, उसकी मेहनत की कद्र करो। अगर घर में बरकत चाहती हो, तो पहले माल को ख़र्च करने की जगह पहचानो  और मोहतात बनो। वरना उसका और तुम्हारा अंजाम दोनों ग़रीबी और पछतावे में होगा।

2. नशे में डूबा मर्द

सिगरेट, शराब, लालच और हवस का नशा यह सब वो चीज़ें है जो इंसान को अंदर से खा जाते हैं। और अगर कोई मर्द इन से नहीं बचता और हर रोज़ अपनी मेहनत की कमाई को इसी तरह आग में झोंकता रहता है । तो जब बुढ़ापा आता है, तो जेब खाली हो जाती है और जिस्म बीमारियों से भर जाता है और पछतावे के सिवा कुछ भी नहीं बचता।

अज़ीज़ों ! नशा एक लम्हे की राहत तो देता है, लेकिन ज़िंदगी भर का दर्द छोड़ जाता है। इसलिए जो मर्द इससे नहीं निकलता, उसका घर कभी आबाद नहीं होता। इसलिए देर तो अभी भी नहीं हुई है , जितनी जल्दी हो सके निकल आओ |

3. बाहर भटकने वाला मर्द

जो मर्द अपनी वफ़ादार बीवी को घर में छोड़कर बाहर दूसरी औरत की के साथ अपना वक़्त बरबाद करता है और शहवत की तलाश में भटकता रहता है, तो वो असल में अपनी इज़्ज़त, अपनी कमाई और अपना घर सब एक साथ बरबाद कर रहा होता है। उसे पता भी नहीं चलता कि कब उसने अपने घर की बरकत को खो दी, और अपनी बीवी की नज़रों में इज्ज़त खो दी, और वो ख़ुशी और राहत व सुकून भी खो दिया जो एक इन्सान की ज़िन्दगी में शादी के बाद मिलती है |

तो ऐसा शख्स समझ नहीं पता कि क्यूँ मेरी मेहनत रंग नहीं ला रही है और ज़िन्दगी में रुकावटें और परेशानियाँ पैदा हो रही है |

Gareeb Rehne Ki Aadatein

4. बीवी पर ज़ुल्म करने वाला मर्द

घर सिर्फ एक घर ही नहीं होता, बल्कि एक ऐसी जन्नत की तरह होता है जहाँ मोहब्बत बसती है। जहाँ एक दूसरे का ख्याल करना, दुःख सुख में सहारा बनना अल्लाह की ख़ुशी और बरकत का सबब बनता है, लेकिन अगर मर्द ज़ालिम बन जाए, और औरत पर ज़ुल्म करे तो वही घर जहन्नुम बन जाता है। और उस जहन्नुम की आग सबसे पहले उसी को जलाती है जिसने उसे जलाया है।

सभी मर्द कान खोल कर सुन लें: शौहर की सताई हुई बीवी की आँखों से निकला हुआ एक आँसू भी आसमान तक जाता है और उस मर्द की बरबादी की वजह बनता है और फिर ऐसे मर्द का न तो दुनिया में अंजाम अच्छा होता है, न आख़िरत में हिसाब आसान होता है। और ध्यान रहे, कमज़ोर और मातहत लोगों पर ज़ुल्म मर्दानगी नहीं, कायरता है।

5. सूदखोर मर्द

कुछ लोग सूद और ब्याज़ ही से अपनी income करते हैं और अपना घर चलाते हैं, और हैरत की बात तो ये है कि इसी को वो कारोबार और इन्वेस्टमेंट का नाम देते हैं, तो अच्छी तरह जान और समझ लीजिये कि नाम कारोबार का हो, या इन्वेस्टमेंट का, अगर पैसा सूद (ब्याज) से आ रहा हो, तो वो इन्तिहाई जहरीला है। क्यूंकि सूद से कमाई में न तो बरकत होती है, और न ही राहत। और इसके बारे में अल्लाह तआला ने फरमाया दिया है कि “सूद लेने वाले ने गोया अल्लाह और उसके रसूल से जंग करने की ठान ली है ”

6. दिखावे का शिकार मर्द

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं  जिनकी आमदनी (income) मामूली होती है, लेकिन इसके बावुजूद महंगे कपड़े, नई गाड़ी, ब्रांडेड चीज़ें यानि हाल कुछ भी हो लेकिन ज़िंदगी अमीरों जैसी दिखानी है।  तो ऐसा मर्द असल में लोगों से नहीं बल्कि अपने आप से झूठ बोल रहा होता है। वो सोचता है इससे लोगों में उसकी शान बढ़ेगी लेकिन हक़ीक़त में उसका नतीजा? कर्ज़ का बोझ, बीवी-बच्चों की तकलीफ और रात को नींद नहीं।

याद रखिये! जो लोग ऐसे शख्स की झूठी शान देखकर वाहवाही करते हैं वो उसका कर्ज़ नहीं भरते, क़र्ज़ की अदायगी के लिए झेलना इसी को पड़ता है इसलिए सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए जीने वाला शख्स कभी सुकून से नहीं जी पाता, क्योंकि दूसरों की नज़र कभी भरती ही नहीं।

हालाँकि अगर आमदनी (income) मामूली हो, तो ये कोई बड़ा मसअला नहीं है क्यूंकि अगर आमदनी कम है तो इन्सान उसी के हिसाब अपने खर्चे manage करता है लेकिन मस अला तो तब पैदा होता है जब income मामूली होने के बावुजूद दिखावा करे|

7. आवारा और लुत्फ़परस्त मर्द

कभी कभार अगर तबियत बोझल हो तो ताज़गी के लिए थोडा बहुत टहल लेना, दोस्त की खैरियत के लिए चले जाना और रिश्तेदारों से मिलना इन सब कामों में कोई हर्ज नहीं है बल्कि इस से समाज और रिश्तेदारों में एक अच्छा status maintain होता है, लेकिन मसअला तब बिगड़ता है जब रोज़ाना कैफे, दोस्तों की महफ़िलें, सैर-सपाटा, तफ़रीह,और ये समझना कि ज़िंदगी बस मज़े के लिए है।

और न ज़िन्दगी में कोई मकसद, न कोई फोकस, न मेहनत की परवाह। ऐसा लापरवाह मर्द “वक्त” और “कमाई” दोनों एक साथ गंवाता है। जवानी तो मज़े से गुज़र जाती है, लेकिन बुढ़ापे में जवानी ख़राब करने का पछतावा बहुत होता है। और उस वक़्त विरासत में सिर्फ “खाली जेब” और “अफ़सोस” ही हाथ आता है। और इसकी सज़ा उन बीवी-बच्चों को भी भुगतना होता है जो उसके साये में जीने पर मजबूर हैं।

8. माँ-बाप का नाफरमान मर्द

यह आख़िरी नंबर है, लेकिन सबसे भारी है यानि जो मर्द अपने माँ-बाप की खिदमत नहीं करता, उन्हें नज़रअंदाज़ करता है, और तो और उनसे बद्तमीज़ी करता है, तो वो कमा चाहे जितना भी ले, लेकिन उसके माल में बरकत नहीं होगी। क्यूंकि माँ बाप औलाद की ही ज़िम्मेदारी हैं, ठीक वैसे ही जैसे बचपन में औलाद, माँ बाप की ज़िम्मेदारी थी, तो अब अगर औलाद अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटे और उनसे अच्छाई से पेश न आये तो ये बड़ी महरूमी की बात है

हदीस में तो आता है कि अल्लाह की रज़ा (ख़ुशी) माँ-बाप की रज़ा में है, यह बात सिर्फ मज़हबी ही नहीं है, बल्कि ज़िंदगी का तजुर्बा भी यही कहता है कि जिस घर में बड़ों की इज्ज़त नहीं होती है, उस घर की खुशियाँ धीरे-धीरे चली जाती हैं।

आख़िरी बात

यह खत किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं बल्कि आईना दिखाने के लिए लिखा गया है। जिससे पता चलता है कि कमाई सिर्फ हाथ की ताक़त से नहीं होती, सोच से होती है, किरदार से होती है, और अल्लाह की जानिब से भेजी जाने वाली बरकत से होती है। और वो बरकत उन्हीं को मिलती है जो अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझते हैं, अपने घर वालों की कद्र करते हैं, और हराम से बचते हैं।

अगर आप ऊपर दी गई 8 गलतियों में से किसी में भी खुद को देख रहे हैं, तो घबराइए नहीं। बदलाव कल से नहीं, आज से होता है। एक गलती छोड़ने का इरादा कर लीजिए, अल्लाह बाकी रास्ता आसान कर फ़रमायेगा|

ग़ुरबत एक इम्तिहान है,  लेकिन अगर वो तुम्हारी अपनी हरकतों की वजह से है, तो यह सिर्फ सज़ा है।

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