Big Promises Of Allah In Quran :
अल्लाह के 5 बड़े वादे कुरान में
Big Promises Of Allah In Quran : अल्लाह के वादे हमेशा पूरे होते हैं… और आज इसको एक मिसाल के साथ हम समझेंगे। बात उस वक़्त की है जब मिस्र का बादशाह “फ़िरऔन” था| और उसने पूरे मुल्क में ज़ुल्म व फ़साद मचा रखा था, तभी उसने एक रात ख़्वाब देखा कि “बनी इसराईल” में से एक ऐसा लड़का पैदा होगा, जो उसकी इस सल्तनत को ख़त्म कर देगा। ये देख कर फ़िरऔन आग बबूला हो गया, अपनी हुकूमत जाने के डर से उस की नीन्द उड़ गयी,
लेकिन फिर उसके ज़हन में एक ख़याल आया कि अगर यह लड़का ही पैदा न हो, तो मेरी सल्तनत को कोई ख़तरा ही नहीं होगा। इसलिए उसने हुक्म दिया “हर नवजात और पैदा होने वाले लड़के को क़त्ल कर दिया जाए” जिसकी वजह से हज़ारों बच्चे पैदा होते ही मारे गए।
लेकिन इस खौफ़ और डर के साए में एक माँ थी, जिसने अपने नवजात बच्चे को क़त्ल होने से बचाने के लिए एक टोकरी में डालकर नदी में छोड़ दिया। उसकी आँखों में आँसू थे, दिल में डर भी था, लेकिन अल्लाह पर पूरा भरोसा था। और ये भरोसा इसलिए था क्यूंकि अल्लाह ने ख़ुद वादा किया था “हम इस बच्चे को तेरे पास वापस लौटा देंगे, और इसे अपना नबी बनाएंगे” और इसका ज़िक्र ख़ुद कुरान में किया गया है |
और जब अल्लाह वादा कर ले तो सोचिये! फ़िरऔन तो क्या, उसकी पूरी फ़ौज भी अल्लाह के इस वादे को पूरा होने से रोक नहीं सकती थी,। अब मैं आप को बता दूं कि वो बच्चा कोई और नहीं हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ही थे, वो न सिर्फ़ ज़िंदा बचे, बल्कि अल्लाह की हिफ़ाज़त में फ़िरऔन के ही घर में पले। और फिर अपनी माँ की गोद में वापस आए। और एक दिन उन्होंने ही फिरऔन की ज़ालिम सल्तनत उन ही के हाथों टूटी।
ये वाकिया चीख़ चीख़ कर कहता है कि अल्लाह का वादा हमेशा सच्चा है। अज़ीज़ों ! और क़ुरआन में अल्लाह तआला ने बार-बार यह सच्चाई बयान की है कि
إِنَّ اللَّهَ لَا يُخْلِفُ الْمِيعَادَ
अल्लाह अपने वादे की कभी खिलाफ़वर्ज़ी नहीं करता।”
सूरह आले इमरान (3:9)
इंसान वादा तोड़ सकता है, क्यूंकि या तो उसका वादा झूठ होता है या फिर उसके पास उसे पूरा करने की ताक़त नहीं होती। लेकिन अल्लाह न तो झूठ बोलता है और न ही अल्लाह की ताक़त में कोई कमी है।
अल्लाह का वादा हमेशा सच्चा है, तो हम वो वादा अपनी ज़िंदगी में क्यों नहीं देखते?
तो अब एक सवाल हमारे ज़हनों में उठता है कि जब अल्लाह का वादा हमेशा सच्चा है, तो हम वो वादा अपनी ज़िंदगी में क्यों नहीं देखते? तो इसका जवाब सिर्फ़ एक लफ़्ज़ में है वो है “शर्त”। यानि अल्लाह ने क़ुरआन में जितने भी वादे किये हैं, हर वादे के साथ एक शर्त है, और वो शर्त पूरा करने की ज़िम्मेदारी हम पर है। अगर हम उन शर्तों को पूरा कर लेंगे तो यक़ीनन अल्लाह का वादा ज़रूर पूरा होगा।
तो चलिए, आज हम बात करेंगे अल्लाह के 5 ऐसे बड़े वादों की, जो क़ुरआन और हदीस में मौजूद हैं। और उन शर्तों की भी जिनको पूरी करने पर वादा निभाने की ज़िम्मेदारी अल्लाह ने ले रखी है |
अल्लाह के 5 बड़े वादे कुरान में

पहला वादा: नेअमतें बढ़ाना
अल्लाह ने क़ुरआन में फ़रमाया
لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ
तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा नेमतें दूँगा
सूरह इब्राहीम (14:7)
यह अल्लाह का वादा है, लेकिन ये वादा तब पूरा होगा, जब हम एक शर्त पूरी करेंगे वो है शुक्र करना, लेकिन शुक्र होता क्या है ये ज़रा अच्छे से जान लें |
शुक्र के 3 दर्जे हैं
शुक्र का पहला दरजा है : ज़बान से अलहम्दुलिल्लाह कहना, जब खाना मिले, जब नींद आए, या कोई नेअमत हासिल हो |
शुक्र का दूसरा दरजा है : दिल से यक़ीन रखना कि हर नेअमत सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ से है, यानि वो रिश्ते जो आपको मिले हैं अल्लाह ने दिये है, वो सेहत जो आपके पास है अल्लाह ने दी है, वो रोटी जो आज आपके घर में थी अल्लाह ने भेजी है ।
शुक्र का तीसरा और सबसे गहरा दरजा : अपने हाथ-पाँव, अपनी आँखें, अपनी अक़्ल इन सबको अल्लाह की राह में इस्तेमाल करना।
तो अज़ीज़ों! जब हम शुक्र अदा करते हैं तो अल्लाह ने वादा फ़रमाया है कि नेअमतें बढ़ाऊँगा। लेकिन जब हम शुक्र बंद कर देते हैं तो नेमत भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
दूसरा वादा : अल्लाह का अपने बन्दे को याद करना
आप सोच रहे होंगे कि बंदा अल्लाह को याद करे समझ में आता है, लेकिन यहाँ अल्लाह बन्दे को याद कर रहा है| जी हाँ, अल्लाह ने फ़रमाया है
فَاذْكُرُونِي أَذْكُرْكُمْ
तुम मुझे याद करो, मैं तुम्हें याद करूँगा
सूरह अल-बक़रह (2:152)
एक पल के लिए इस बात को सोचो, वो अल्लाह जिसने यह ज़मीन बनाई, आसमान बनाया, जिसके हुक्म से सूरज रोशन होता है और फिर उसी के हुक्म से सूरज की रौशनी ख़त्म हो जाती है और रात छा जाती है, वो अल्लाह क्या कह रहा है “अगर तुम मुझे याद करो तो मैं तुम्हें याद करूँगा”।
और हदीस भी यही कहती है कि “जब बंदा अल्लाह को अकेले में याद करता है तो अल्लाह उसे अकेले में याद फ़रमाता है, और जब बंदा लोगों की महफ़िल में अल्लाह को याद करता है तो अल्लाह उसे उससे भी बेहतर महफ़िल में याद फ़रमाता है”। मतलब फ़रिश्तों की महफ़िल में।
एक बात याद रखें! ज़िक्र सिर्फ़ तस्बीह का नाम नहीं है बल्कि अल्लाह के हर हुक्म को मान कर उस पर अमल करना, और हर गुनाह से बचना भी अल्लाह का ज़िक्र ही है, और हर वो काम जो अल्लाह को पसंद है वो करना भी अल्लाह का ज़िक्र ही है। तो आज से हर काम में, हर पल में अल्लाह को याद रखिए, और देखिए इंशाअल्लाह अल्लाह आपको याद रखेगा।
तीसरा वादा: ईमान और नेक अमल का वादा
अल्लाह ने क़ुरआन में फ़रमाया :
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً ۖ
“जो कोई ईमान की हालत में नेक अमल करेगा, चाहे वह मर्द हो या औरत, हम उसे ज़रूर पाक
और बेहतरीन ज़िंदगी अता करेंगे,
सूरह अन-नहल (16:97)
यह वादा बहुत बड़ा है, क्योंकि आज की दुनिया में हर इंसान सुकून ढूंढ रहा है, वो पहले दौलत की तरफ़ जाता है, तो सुकून वहां नहीं मिलता। शोहरत की तरफ़ भागता है सुकून वहां नहीं मिलता, सैरो तफ़रीह में खो जाता है लेकिन सुकून वहां भी नहीं मिलता
शायद उसको नहीं पता कि अल्लाह ने सुकून का रास्ता बताया है। ईमान और नेक अमल। और ईमान का मतलब है अल्लाह पर दिल से भरोसा और नेक अमल का मतलब है वो काम जो अल्लाह को पसंद हैं, वो करते रहो।
जब यह दोनों चीज़ें जमा हो जाती हैं तो ज़िंदगी में वो सुकून आता है जिसे पैसों से ख़रीदा नहीं जा सकता, दिल का चैन, रात की अच्छी और सुकून भरी नींद, यह सब अल्लाह देता है , लेकिन उन्हें जो ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं।
चौथा वादा: बेहतर चीज़ अता करना
सहीह हदीस में रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया
مَنْ تَرَكَ شَيْئًا لِلَّهِ عَوَّضَهُ اللَّهُ خَيْرًا مِنْهُ
“जो शख़्स अल्लाह की ख़ातिर किसी चीज़ को छोड़ देता है, अल्लाह उसे उससे बेहतर चीज़ अता फ़रमा देता है।”
यह बात हम में से हर एक पर लागू होती है मतलब कोई अगर ग़लत कमाई छोड़ता है और सोच रखता है, कि अब मुझे नुक़सान होगा और कोई ग़लत रिश्ता छोड़ता है, और ये सोचता है, कि अब मैं अकेला रह जाऊँगा। और कोई ग़लत काम छोड़ता है और सोचता है, कि अब मेरी ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी।
तो वो अल्लाह का वादा देख ले! “जो चीज़ तुम मेरे लिए छोड़ोगे मैं उससे बेहतर दूँगा”। यानि जिसने ग़लत कमाई छोड़ी अल्लाह ने उसे हलाल और बरकत वाली रोज़ी दी, जिसने ग़लत संगत छोड़ी, अल्लाह ने उसे अच्छे साथी दिए। जिसने गुनाह छोड़ा, अल्लाह ने उसके दिल में इत्मीनान डाल दिया।
तो अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसी चीज़ है जिसके बारे में आप जानते हो कि यह ग़लत है, तो आज ही उसे छोड़ दीजिए सिर्फ़ अल्लाह के लिए। और फिर देखिए अल्लाह का वादा कैसे पूरा होता है।
पाँचवाँ वादा — दुआ क़बूल होने का वादा
अल्लाह ने क़ुरआन में फ़रमाया
وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ ۚ
और तुम्हारे रब ने फ़रमाया: मुझसे दुआ करो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल करूँगा
यह वादा पढ़कर आँखें भर आती हैं कि अल्लाह ख़ुद कह रहा है कि “मुझसे माँगो मैं सुनूंगा और मैं अता करूंगा”, लेकिन हम अक्सर जब दुआ करते हैं और फ़ौरन जवाब न आए तो उदास हो जाते हैं, इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि
अल्लाह दुआ का जवाब तीन तरीक़ों से देता है
पहला: वो चीज़ दे देता है जो हमने माँगी है ।
दूसरा: उसके बदले उससे बेहतर चीज़ अता करता है, क्योंकि वो जानता है कि जो तुमने माँगा वो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं था।
तीसरा: इस दुनिया में नहीं देता लेकिन क़यामत के दिन उसका बदला इतना बड़ा देगा कि इंसान तमन्ना करेगा “काश मेरी कोई दुआ इस दुनिया में क़बूल ही न हुई होती।
तो इस बात को समझिये कि दुआ कभी बेकार नहीं जाती। बस सच्चे दिल से और यक़ीन के साथ अल्लाह के सामने अपना दिल रखो तो, अल्लाह हर दिल की बात सुनता है |
तो अज़ीज़ों! हमने आज 5 वादे सुने जिनसे पता चल गया होगा कि अगर ज़िंदगी में बरकत चाहिए तो शुक्र अदा करो, इज़्ज़त चाहिए तो अल्लाह का ज़िक्र करो, सुकून चाहिए तो ईमान और नेक अमल अपनाओ, हलाल रोज़ी चाहिए तो हराम छोड़ दो। और अगर मुश्किलों से छुटकारा चाहिए तो अल्लाह से दुआ करो।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वो हमें अपने वादों पर यक़ीन रखने वाला बनाए। और हमें उन शर्तों को पूरा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन। या रब्बल आलमीन।

