5 Aasan Ibadatein Garmi Me |

गर्मी के मौसम की 5 आसान इबादतें

जब भी गर्मी का मौसम आता है तो हममें से ज़्यादातर लोग अपने आराम का इंतज़ाम करना शुरू कर देते हैं। आराम मतलब ठंडा पानी, शरबत, पंखा, कूलर या AC वगैरह, ताकि इस मौसम की तपिश से उसे कुछ राहत मिल जाए। और यक़ीनन आपने भी इन्तेजाम ज़रूर किया होगा, अल्लाह आप को भी इतनी वुसअत दे कि गर्मी से बचने का हर साधन आपके घर में हो |

लेकिन ज़रा एक पल के लिए उस शख़्स के बारे में भी सोचिए जिसके पास पीने के लिए ठंडा पानी नहीं है। उस परिंदे के बारे में सोचिए जो तेज़ धूप में पानी की तलाश कर रहा है। उस बेज़ुबान जानवर के बारे में सोचिए जिसकी ज़बान प्यास की वजह से बाहर निकली हुई है। क्यूंकि गर्मी का मौसम सिर्फ़ हमारे लिए नहीं बल्कि सबके लिए है तो अगर आप चाहें तो इसे सब के लिए ख़त्म नहीं कर सकते लेकिन कम ज़रूर कर सकते हैं |

और अगर देखें तो हमारे लिए ये गर्मी का मौसम सिर्फ़ परेशानी का मौसम नहीं रहता, बल्कि रहम, सदक़ा और नेक अमल का ख़ूबसूरत मौक़ा बन जाता है। मतलब ये कि किसी आदमी, परिन्दे या बेजुबान जानवर की प्यास बुझाने में अगर अगर हम थोड़ा सा भी हिस्सा ले पायें तो ये नेकी करने और सवाब कमाने का ख़ूबसूरत मौक़ा बन जाता है |

एक प्यासे कुत्ते को पानी पिलाने पर मग़फ़िरत

रसूलुल्लाह ﷺ ने सहाबा किराम को एक शख़्स का वाक़िआ सुनाया कि एक आदमी सफ़र में था उसे बहुत ज़्यादा प्यास लगी थी। उसने एक कुवां देखा, उस में उतरा और पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई और बाहर आ गया। बाहर आने के बाद उसकी नज़र एक कुत्ते पर पड़ी जो प्यास की शिद्दत से हाँफ रहा था और नमी वाली मिट्टी चाट रहा था।

उस आदमी ने अपने दिल में सोचा कि जिस तरह मुझे प्यास लगी थी, इसी तरह इस जानवर को भी प्यास लगी है। वह दोबारा कुएँ में उतरा। अब चूंकि उसके पास कुछ नहीं था तो उसने अपने चमड़े के मोज़े में पानी भरा और उसे मुँह में पकड़कर चढ़ा और ऊपर आया। फिर उस प्यासे कुत्ते को पानी पिलाया।

हदीस में आता है कि अल्लाह तआला ने उसके इस अमल की क़द्र फ़रमाई और उसकी मग़फ़िरत फ़रमा दी। तो सहाबा किराम ने पूछा कि क्या जानवरों के साथ अच्छा सुलूक करने में भी हमारे लिए अज्र है, तो नबी ﷺ ने बताया कि हर ज़िंदा और जानदार के साथ भलाई करने में अज्र है।

इस वाक़िए में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है।

कभी-कभी हमें लगता है कि बड़ी नेकी के लिए बहुत पैसा, बहुत वक़्त या कोई बड़ा काम चाहिए। लेकिन यह हदीस हमें बताती है कि किसी प्यासे की प्यास बुझाना ये भी ऐसा काम है जिसकी क़द्र अल्लाह के यहाँ इतनी है कि अल्लाह तआला गुनाहों को माफ़ भी कर सकते हैं और मगफिरत भी कर सकते हैं। और गर्मी का मौसम तो इस तरह की नेकियों के लिए ख़ास मौक़ा लेकर आता है।

तो आइए, इसी वाक़िए की रोशनी में हम भी गर्मी के मौसम में करने वाले कुछ ऐसे आसान अमल जानते हैं जिन्हें हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कर सकते हैं।

5 Aasan Ibadatein Garmi Me

5 Aasan Ibadatein Garmi Me | गर्मी के मौसम की 5 आसान इबादतें 

1. इंसानों के लिए पानी का इंतज़ाम कीजिए

गर्मी में पानी की ज़रूरत हर इंसान को होती है, इसलिए अगर आपके पास गुंजाइश है तो किसी ऐसी जगह पानी का इन्तेजाम कर दीजिये जहाँ लोगों का आना-जाना ज़्यादा हो। इसके अलावा किसी मस्जिद, मदरसे, दुकान, रास्ते या किसी आम जगह पर पीने के पानी का इंतज़ाम कर दें ।

अगर इतनी बड़ी रकम खर्च नहीं कर सकते तो याद रखें कि नेक काम के लिए हमेशा बड़ी रकम की ज़रूरत नहीं होती। पानी की कुछ बोतलों का इन्तेजाम आपकी नज़र में सकता है छोटा हो, लेकिन किसी प्यासे इंसान के लिए उस वक़्त यही बहुत बड़ी नेमत बन सकती है।

2. जानवरों और परिंदों के लिए पानी रखिए

क्या आपने कभी गर्मी के दिनों में छत पर बैठे किसी प्यासे परिंदे को गौर से देखा? वह बेजुबान बोल नहीं सकता, अपनी ज़रूरत बता नहीं सकता। लेकिन प्यास से परेशान तो वो भी होता है इसलिए पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ता रहता है। इसलिए आपको करना सिर्फ़ ये है कि

  •  अपनी छत, बालकनी या आँगन में मिट्टी का एक छोटा सा प्याला रख दें और उसमें रोज़ साफ़ पानी भर दिया करें।
  • अगर आपके आसपास आवारा जानवर हैं तो ऐसी महफूज़ जगह पर पानी रखिए जहाँ वो आसानी से पहुँच सकें और किसी को परेशानी भी न हो।

यह अमल हमें उस हदीस की याद दिलाता है जिसमें एक प्यासे कुत्ते को पानी पिलाने वाले शख़्स की मग़फ़िरत का ज़िक्र है। सोचिए, एक जानवर की प्यास बुझाने का अमल भी अगर अल्लाह की रहमत का सबब बन जाये तो क्यूँ न हम अपने आसपास मौजूद जानदार मख़लूक़ के लिए थोड़ी सी आसानी पैदा करें और नेकियाँ कमाएँ?

3. गर्मी में वुज़ू की आदत और बावुज़ू रहने की कोशिश

हमारे नबी ﷺ ने वुज़ू की फ़ज़ीलत बयान फ़रमाई है और “क़यामत के दिन उम्मत के लोगों को वुज़ू के आसार से पहचाना जायेगा” इस का ज़िक्र भी हदीसों में आया है। इसलिए जितना हो सके, वुज़ू की हालत में ही रहना चाहिए लेकिन सर्दियों में ये इतना आसान नहीं होता लेकिन जब गर्मियों का मौसम हो तो इसकी कोशिश ज़रूर करनी चाहिए |

जब हम बावुजू रहेंगे तो हमारे रिज्क में बरकत होगी और इसका वादा ख़ुद हदीस में किया गया है और सवाब जो मिलेगा वो अलग, इसलिए जब भी वजू टूटे तो आप खड़े हों और वजू कर लें | लेकिन यहाँ एक बात याद रखना ज़रूरी है, वुज़ू को सिर्फ़ गर्मी की वजह से बार-बार करना मक़सद नहीं, बल्कि जब वुज़ू टूट जाए तब वुज़ू करें, और अगर पहले से वुज़ू है तो उसी हालत को क़ायम रखें।

4. ज़रूरतमंद पड़ोसियों के साथ ठंडक बाँटिए

गर्मी में हमारे घर का फ्रिज और फ्रीज़र हमारे लिए बड़ी नेअमत हैं। और उसका हम फ़ायदा गर्मी में ख़ूब उठाते हैं लेकिन ये भी सोचिये कि हो सकता है कि आपके आसपास कोई ऐसा परिवार भी हो जिसके यहाँ गर्मी से राहत के लिए ऐसे साधन न हों?

तो अगर आपके पास गुंजाइश है तो अपने पड़ोसी, रिश्तेदार या किसी ज़रूरतमंद परिवार के लिए ठंडा पानी या बर्फ़ का इंतज़ाम कर दिया करें। क्यूंकि कभी किसी के लिए कुछ बोतल ठंडा पानी पहुँचाना, किसी बुज़ुर्ग को पानी देना या किसी मज़दूर को गर्मी में ठंडा पानी पिलाना भी इंसानियत, इबादत और रहम का अमल है।

बस एक बात का ध्यान रखें: मदद करते हुए सामने वाले की इज़्ज़त-ए-नफ़्स का ख़याल रखें। नेकी ऐसी हो जिसमें एहसान जताने के बजाय मोहब्बत और ख़ुलूस हो।

5. गर्मी के फल ग़रीबों और यतीमों तक पहुँचाइए

गर्मी अपने साथ कई स्वादिष्ट फल लेकर आती है, जैसे आम, तरबूज़, खरबूज़ा और दूसरे मौसमी फल। और इन फलों को हम अक्सर अपने घर के लिए ज़रुर खरीदते हैं। तो क्यूँ न कुछ बढ़ा कर ख़रीद लें और उसका एक हिस्सा किसी ज़रूरतमंद तक पहुँचा दें |

आप अपने आसपास किसी ग़रीब परिवार, यतीम बच्चे, विधवा या ऐसे इंसान को फल दे सकते हैं जिनके लिए इन्हें खरीदना आसान नहीं। ये काम अगर सही नियत से कर लिया जाये तो किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है।

गर्मी को सिर्फ़ परेशानी नहीं, नेकियों का मौसम बनाइए

गर्मी आएगी और चली जाएगी, लेकिन इसी गर्मी के बीच हमारे पास ऐसे बहुत से मौक़े भी होंगे जिन्हें हम चाहें तो नेकियों में बदल सकते हैं।

• घर के बाहर पानी रखना।
• किसी प्यासे इंसान को पानी पिलाना।
• परिंदों के लिए प्याला भरना।
• किसी जानवर की प्यास बुझाना।
• ज़रूरतमंद पड़ोसी के लिए ठंडा पानी या फल पहुँचाना।

ये सब काम देखने में छोटे हैं, लेकिन किसी भी नेकी को छोटा समझना सही नहीं है। क्यूंकि हमें नहीं मालूम कि हमारी कौन सी नेकी अल्लाह की रहमत का सबब बन जाए।
जिस शख़्स ने एक प्यासे जानवर को पानी पिलाया, उसके अमल की अल्लाह ने क़द्र फ़रमाई। तो फिर हमें भी अपने आसपास मौजूद मख़लूक़ की ज़रूरतों को महसूस करने की कोशिश करनी चाहिए।

आज से एक छोटा अमल शुरू कीजिए

अगर आप इन पाँचों कामों को एक साथ शुरू नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं। सिर्फ़ एक काम चुन लीजिए।

  • अपने घर के बाहर पानी रख दीजिए।
  • या छत पर परिंदों के लिए एक प्याला रख दीजिए।
  • या रास्ते में किसी मज़दूर को ठंडा पानी पिला दीजिए।
  • या घर के फल में से कुछ हिस्सा किसी ज़रूरतमंद तक पहुँचा दीजिए।
  • नेकियों के लिए हमेशा बड़े मौक़े का इंतज़ार मत कीजिए। कभी-कभी अल्लाह हमारे सामने एक छोटा सा मौक़ा रखता है और देखता है कि हम उसे पहचानते हैं या नहीं।

आख़िरी बात

अल्लाह ने हमें बहुत सी नेअमतें दी हैं, जैसे पानी, खाना, फल, ठंडक और घर की तमाम सुविधाएँ ये सब अल्लाह की नेअमतें हैं। अब अगर हम इन नेमतों में से थोड़ा सा हिस्सा किसी ज़रूरतमंद इंसान या किसी बेज़ुबान जानवर तक पहुँचा दें तो शायद यही छोटी सी कोशिश हमारे लिए आख़िरत में बड़ी नेकी बन जाए।

अल्लाह तआला हमें अपनी नेमतों की क़द्र करने, अपनी मख़लूक़ पर रहम करने और छोटे-बड़े हर नेक अमल को ख़ुलूस के साथ करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन।