Wiladat Me Asani Ka Wazifa |
बच्चे की पैदाईश में आसानी का वज़ीफ़ा
Wiladat Me Asani Ka Wazifa: कुछ दिन पहले एक क़रीबी दोस्त का फ़ोन आया, उसकी आवाज़ में घबराहट थी, कहने लगा “मौलाना, बीवी की प्रेगनेंसी का 9वाँ महीना चल रहा है और बच्चे की पैदाइश का वक़्त क़रीब है, तो कोई ऐसी दुआ बता दीजिए जिससे विलादत में आसानी हो।” वह लम्हा मुझे आज भी याद है, क्यूंकि एक शौहर की आवाज़ में जो तड़प थी, वह दिल को हिला देने वाली थी।
अज़ीज़ दोस्तों! एक माँ जो नई ज़िंदगी को दुनिया में लाने की तैयारी कर रही है, उसकी तकलीफ़ का अंदाज़ा सिर्फ़ वही जानती हैं, वह नौ महीने का सफ़र, वह रातों की बेख़्वाबी, वह जिस्म का दर्द और अलग अलग तरह की तकलीफें, मानो जैसे किसी बीमारी ने घेर लिया हो, और यह सब सिर्फ़ वही माँ जानती है जो इस राह से गुज़र चुकी हो। ऐसे ही नहीं इस्लाम ने कह दिया कि माँ के पैरों तले जन्नत है |
लेकिन जहाँ माँ बनना दुनिया का सबसे बड़ा दर्द है वहीँ एक बहुत बड़ी नेमत भी है, उस दर्द को झेलने वाली हर माँ को दिल से सल्यूट है और मेरे दिल में उनके लिए बड़ी इज़्ज़त है, और उनके लिए हमारी दुआ है कि अल्लाह तआला उन पर अपना ख़ास करम फ़रमाए, उनके मामले को आसान फरमाए और माँ और बच्चे दोनों को सलामत रखे। आमीन।
आज इस पोस्ट में एक क़ुरआनी दुआ शेयर करने जा रहा हूँ, जो इंशाअल्लाह पैदाइश के तकलीफ़ दह लम्हों में आसानी पैदा करेगी, तो अगर आपके घर में कोई बहन, कोई बीवी, कोई बेटी कोई माँ बनने वाली है, तो यह पोस्ट उन तक पहुँचाइए, शायद यही उनकी ज़रूरत हो आज।

आजकल ऑपरेशन के मामले बढ़ गए हैं?
आप ख़ुद देख रहे होंगे, कि आजकल नॉर्मल डिलीवरी कम हो गई है और सिज़ेरियन (ऑपरेशन) का चलन बढ़ता जा रहा है। हर दूसरे घर से ख़बर आती है कि “ऑपरेशन हो गया।” माँ को दर्द भी हुआ, तकलीफ़ भी उठाई, और फिर भी ऑपरेशन, ऐसे में हमें यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह तआला हर मुश्किल का हल जानता है। वह अस्बाब (कारण) भी बनाता है और अस्बाब के बगैर भी काम कर सकता है। बस हमें दिल से, यक़ीन के साथ उसकी तरफ़ रुजू करना है ।
तो आइए, अब उन आमाल की बात करते हैं जो विलादत में आसानी के लिए मशहूर और मुजर्रब हैं।
पहला अमल: सूरह इन्शिक़ाक़ की आख़िरी पाँच आयतें
क़ुरआन करीम 30वें पारे में एक सूरह है सूरह इन्शिक़ाक़, इस सूरह की शुरू की पाँच आयतें विलादत में आसानी के लिए पढ़ी जाती हैं। यह आयतें हैं:
وَإِذَا السَّمَاءُ انشَقَّتْ وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ وَإِذَا الْأَرْضُ مُدَّتْ وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
इज़स समा उन शक्क़त व अज़िनत लि रब्बिहा व हुक्क़त व इज़ल अरदु मुद्दत व अल्क़त मा फ़ीहा व तख़ल लत व अज़िनत लि रब्बिहा व हुक्क़त
इन पाँच आयतों को पढ़कर किसी भी मीठी चीज़ पर जैसे गुड़, चीनी, या कोई भी खाने की चीज़ पर दम (फूँकना) करें और फिर वह चीज़ प्रेग्नेंट माँ को खिला दें।
और अगर माँ ख़ुद पढ़ सकती है तो वह भी पानी पर या किसी खाने की चीज़ पर ये आयतें पढ़कर ख़ुद खा पी सकती है। बुज़ुर्गों का यह मुजर्रब (आज़माया हुआ) नुस्ख़ा है, इन्शाअल्लाह इससे विलादत में आसानी होती है। और जब delivery का वक़्त हो तो उस वक़्त शौहर इन आयात को बार बार पढ़े अल्लाह आसानी फ़रमायेगा |
दूसरा अमल: कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ना
दूसरा और बहुत अहम अमल यह है कि जो माँ बनने जा रही हैं, वह जब भी फ़ुर्सत में हों, लेटी हों या बैठी हों कसरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ें।
اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
(दुरूद इब्राहीमी — जो नमाज़ में पढ़ा जाता है )
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद, व अला आलि मुहम्मद कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद, अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मद, व अला आलि मुहम्मद कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा, इन्नका हमीदुम मजीद
तो भाई और बहनो! जो घर में माँ बनने वाली हों, उन्हें यह बात ज़रूर बताएँ कि फ़ुर्सत के हर लम्हे में दुरूद पढ़ती रहें। विलादत की तकलीफ़ में दुरूद शरीफ़ सबसे बड़ा सहारा है। यह दुआ भी है, यह ज़िक्र भी है, और यह रहमत का ज़रिया भी है।
अल्लाह पर तवक्कुल — असली सुकून का राज़
कभी-कभी हम दुआएँ तो माँगते हैं, लेकिन दिल में यक़ीन कम होता है, दिल में आता है “पता नहीं होगा या नहीं।” तो याद रखिये !
अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है कि
जो मेरे बंदे मुझसे माँगें, मैं क़रीब हूँ और उनकी दुआ क़ुबूल करता हूँ।
तो जो माँ विलादत के क़रीब हो, उसे चाहिए कि दिल में यह यक़ीन रखे “अल्लाह मेरे साथ है वह मेरी मदद करेगा।” ऑपरेशन हो या नॉर्मल, जो अल्लाह का फ़ैसला है सही मानों में वही हमारे लिए बेहतर है, और उसी में ख़ैर है। हमारा काम है दुआ करना, कोशिश करना, और नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना, यही असली तवक्कुल है और यही इस्लाम का तरीक़ा है।
आखिर में : इन तीन बातों को याद रख लें
1. सूरह इन्शिक़ाक़ की आख़िरी पाँच आयतें — किसी मीठी चीज़ पर पढ़ कर दम करें और माँ को खिलाएँ।
2. दुरूद इब्राहीमी — कसरत से पढ़ें, ख़ास तौर पर लेटे या बैठे और काम करते वक़्त ।
3. तवक्कुल — अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें। नतीजा उसके हाथ में है, और वह सबसे बेहतर फ़ैसला करता है।
इस पोस्ट को शेयर करें। हो सकता है किसी घर में आज यही ज़रूरत हो, और आपका एक शेयर उनके काम आ जाए।

