Nazar Utarne Ka Tarika | Nazar Utarne Ki Dua |
नज़र उतारने के 4 आसान तरीके
क़ुरान और हदीस की रौशनी में — एक मुकम्मल और आसान गाइड
Nazar Utarne Ka Tarika: रात के वक़्त किसी मासूम बच्चे का बेवजह रोना, और अचानक किसी की तबियत का उखड़ जाना, या किसी काम में बरकत का अचानक कहीं गुम हो जाना — ये वो चीज़ें हैं जो कभी न कभी हर घर में आती ही आती हैं । और जब आती हैं तो दिल में एक सवाल पैदा होता है कि “कहीं नज़र तो नहीं लग गई?” फिर शुरू होती है इधर-उधर पूछने की दौड़, कोई कुछ बताता है तो कोई कुछ, और परेशानी बढ़ती ही चली जाती है।
तो आज मैं आपको नज़र उतारने के 4 आसान तरीके बताऊंगा जो सीधे क़ुरान और हदीस से ही ली गयी हैं। अगर आप इन्हें अच्छी तरह समझ गए तो फिर नज़र चाहे आप पर हो, आपके बच्चे पर हो या किसी और पर इंशाअल्लाह आप ख़ुद अपने हाथों से दम कर पाएंगे, यानि नज़र उतारने का अमल कर पाएंगे वो भी बिना किसी के मोहताज हुए।
नज़र लगना हक़ है, घबराने की बात नहीं
सबसे पहले यह बात दिल से निकाल दीजिए कि नज़र लगना कोई वहम है, क्यूंकि इसके बारे में ख़ुद नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया है कि “नज़र लगना हक़ है” (सहीह मुस्लिम)। तो जब घर में किसी को नज़र लग जाए तो घबराने की बजाय इत्मीनान से इन तरीकों पर अमल कीजिए इंशाअल्लाह अल्लाह ताला शिफ़ा अता फ़रमाएगा।
पहला तरीका
सबसे पहले एक मर्तबा सूरह फ़ातिहा पढ़िए, फिर एक मर्तबा आयतुल कुर्सी, और उसके बाद दोनों “कुल” यानी सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास एक-एक बार पढ़िए। इसके बाद यह दुआ पढ़िए जो हदीस से भी साबित है:

फिर इन सबको पढ़कर जिसे नज़र लगी हो उसके ऊपर दम कर दीजिए और अगर नज़र आपको ख़ुद लगी हो तो अपने ऊपर दम कर लीजिए। अगर कोई ख़ुद यह दुआएं ना पढ़ सके, तो जो पढ़ना जानता हो, वह पढ़कर उस पर दम कर दे यह भी किया जा सकता है।
दूसरा तरीका
यह तरीका भी हदीस से साबित है, जब भी किसी को नज़रे-बद लगती, रसूलुल्लाह ﷺ इस दुआ से दम फ़रमाया करते थे:

यह दुआ पढ़कर दम कीजिए, फिर कहिए “क़ुम बि-इज़्निल्लाह” यानी “अल्लाह के हुक्म से उठ जा।” यह कहते ही, इंशाअल्लाह, नज़र का असर ख़त्म हो जाएगा।
तीसरा तरीका
हज़रत हसन बसरी (रहमतुल्लाहि अलैह) से यह तरीका मन्क़ूल है: सूरह अल-क़लम की आख़िरी आयत जो सीधे नज़र से हिफ़ाज़त के लिए मशहूर है उसको तीन बार पढ़कर दम कीजिए:

आप चाहें तो इसके साथ दोनों कुल यानी सूरह फ़लक़ और सूरह नास भी पढ़ सकते हैं। यानि सूरह क़लम की आख़िरी आयत और दोनों कुल पढ़कर तीन बार दम कर दीजिए, इंशाअल्लाह नज़रे-बद से मुकम्मल हिफ़ाज़त होगी।
नज़र दूर करने का मिर्च वाला अमल
इसी सिलसिले में बुज़ुर्गों से मिर्च वाला अमल भी मशहूर है वो कुछ इस तरह होता है कि
- सात सूखी मिर्च ली जाती हैं,
- और हर मिर्च पर एक-एकबार सूरह क़लम की आख़िरी आयत और सूरह फ़लक़-नास पढ़कर दम किया जाता है।
- फिर उन मिर्चों को जिस पर नज़र लगी हो उसके ऊपर से सात बार उतारा जाता है फिर उन मिर्चों को जला दिया जाता है।
चूंकि इसमें पढ़ी जाने वाली दुआएं क़ुरान और हदीस से साबित हैं, इसलिए यह अमल भी जायज़ है।
चौथा तरीका
यह मुबारक तरीका बुख़ारी शरीफ़ की हदीस में मौजूद है। इसी दुआ से ख़ुद रसूलुल्लाह ﷺ हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा पर दम फ़रमाया करते थे, और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भी अपने बेटों पर यही तरीका अपनाया करते थे। पूरा अमल इस तरह है:
- 1 बार सूरह फ़ातिहा
- 1 बार आयतुल कुर्सी
- 1 बार सूरह फ़लक़
- 1 बार सूरह नास
- और फिर एक बार यह दुआ:

इस मुबारक सिलसिले पर अमल करके भी आप अपने और अपने बच्चों की नज़र उतार सकते हैं। कुल मिलाकर यह चार तरीके हो गए, इनमें से जो भी आपको आसान लगे, इत्मीनान से उस पर अमल कीजिए।
अमल में लाते वक़्त ध्यान रखने वाली बातें
जिसे भी नज़र लगे, फ़ौरन दम कर दीजिए, देर करने की ज़रूरत नहीं। अगर आप नहीं पढ़ सकते तो जो पढ़ना जानता हो वह पढ़कर दम कर दे यह भी काफ़ी है। चारों तरीकों में से जो भी आसान लगे उसी पर अमल कीजिए, हड़बड़ाने की ज़रूरत नहीं। यह अमल यक़ीन और भरोसे के साथ कीजिए शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आती है।
अल्लाह हम सबको, हमारे बच्चों को और हमारे घर वालों को हर नज़रे-बद, हर शैतान के शर और हर तकलीफ़ से महफ़ूज़ रखे। आमीन।

