6 Benefits Of Surah Fatiha |

सूरह फ़ातिहा से बीमारी का इलाज

6 Benefits Of Surah Fatiha: क्या आपके घर में कोई ऐसा शख़्स है जो काफी दिनों से बीमार है? या कभी ऐसा हुआ कि दवा लेते-लेते भी दर्द कम न हो और दिल में मायूसी आने लगे? ऐसे वक़्त में हम अक्सर सोचते हैं कि अब क्या किया जाए? लेकिन क्या आपको मालूम है कि क़ुरआन की एक ऐसी सूरह है जिसको नबी ﷺ के ज़माने से ही रुक़्या और शिफ़ा के लिए पढ़ा जाता रहा है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं सूरह फ़ातिहा की।

आज हम आपको सूरह फ़ातिहा से दम करने के कुछ आसान अमल बताएंगे, जिन्हें आप अपने लिए या अपने घर के किसी बीमार शख़्स के लिए कर सकते हैं। लेकिन एक बात शुरू में ही याद रखिए कि शिफ़ा देने वाला सिर्फ़ अल्लाह तआला है, सूरह फ़ातिहा और हमारा दम सिर्फ़ शिफ़ा का ज़रिया है। तो आइए जानते हैं कि सूरह फ़ातिहा से दम करने के कौन-कौन से आसान तरीके हैं और इन्हें किस तरह किया जा सकता है।

6 Benefits Of Surah Fatiha | सूरह फ़ातिहा से बीमारी का इलाज

1. घर में कोई बीमार हो तो…

सबसे पहला और सबसे आसान अमल:

सूरह फ़ातिहा 11 मर्तबा पढ़िए और अपने ऊपर दम कर लीजिए। और अगर घर में कोई बच्चा, वालिदैन या भाई-बहन बीमार हो तो उन पर भी यह दम किया जा सकता है। मक़सद सिर्फ़ यह है कि दिल में यह यक़ीन बना रहे कि शिफ़ा अल्लाह ही के हाथ में है।

2. सरदर्द या माइग्रेन हो तो…

जिसके सर में दर्द हो या माइग्रेन की तकलीफ़ हो, वह अपने सर पर हाथ रखकर सूरह फ़ातिहा को 7 मर्तबा पढ़े। हर बार पूरी सूरह पढ़कर अल्लाह से शिफ़ा की दुआ करे और दिल में यह एहसास रखे कि तकलीफ़ चाहे कितनी भी हो, अल्लाह के लिए उसे दूर करना मुश्किल नहीं।

3. दवा, पानी या खाने पर दम करें

अगर हाथ में दवा, पानी, दूध या खाना है, तो उस पर सूरह फ़ातिहा पढ़कर दम कीजिए और फिर इस्तेमाल कीजिए। दम करते वक़्त दिल की नियत यह होनी चाहिए:

नियत

“ऐ अल्लाह! तूने सूरह फ़ातिहा में शिफ़ा रखी है। इसकी बरकत से मेरी दवा, मेरे खाने और पीने की चीज़ को मेरे लिए शिफ़ा का ज़रिया बना दे, और मेरी बीमारी को दूर फ़रमा।”

सहाबा-ए-किराम के दौर का एक मशहूर वाक़िआ भी है कि एक क़बीले के सरदार को सांप ने डस लिया था, तो एक सहाबी ने सूरह फ़ातिहा पढ़कर उन पर दम किया और वह ठीक हो गए। जब यह बात नबी ﷺ को बताई गई तो आपने इस अमल को पसंद फ़रमाया। इसी से सूरह फ़ातिहा से रुक़्या की अहमियत समझ आती है।

6 Benefits Of Surah Fatiha

4. पानी की बोतल पर 41 मर्तबा पढ़ें

अब अगर आप चाहें तो इसी अमल को पानी के साथ भी कर सकते हैं। एक साफ़ पानी की बोतल सामने रखिए और उस पर सूरह फ़ातिहा 41 मर्तबा पढ़कर दम कर दीजिए। फिर यह पानी मरीज़ को पिलाया जा सकता है। पानी ख़त्म हो जाए तो दोबारा इसी तरह पढ़कर दम किया जा सकता है। यहाँ भी दिल में यही यक़ीन रखिए कि पानी अपने आप शिफ़ा नहीं देता, बल्कि अल्लाह तआला ही शिफ़ा देने वाला है। हम तो सूरह फ़ातिहा की तिलावत के ज़रिए अपने रब से शिफ़ा मांग रहे हैं।

5. जब भी दिल घबराए

यह अमल किसी गिनती का मोहताज नहीं। जब भी बीमारी याद आए, या मायूसी होने लगे, या लगे कि दवा असर नहीं कर रही तो उसी वक़्त सूरह फ़ातिहा पढ़ लीजिए। एक घंटे बाद, दो घंटे बाद, जब भी दिल चाहे। पढ़ते हुए यूं दुआ कीजिए:

दुआ

“ऐ अल्लाह! सूरह फ़ातिहा में तूने शिफ़ा रखी है। मेरी इस तिलावत को मेरे लिए शिफ़ा का ज़रिया बना दे। मुझे आफ़ियत अता फ़रमा और मेरी बीमारी को दूर फ़रमा।”

बीमारी में सबसे बड़ा नुक़सान मायूसी है। सूरह फ़ातिहा की तिलावत दिल को बार-बार अल्लाह की तरफ़ मोड़ती रहती है।

6. बीमारी, परेशानी और तंगदस्ती

जब बीमारी, परेशानी और तंगदस्ती हो तो ये अमल तीनों में काम आता है। और अमल ऐसा है कि इसमें सूरह फ़ातिहा के एक ख़ास हिस्से (“इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन”) को बार-बार पढ़ा जाता है। अमल कुछ इस तरह है…

1. सूरह फ़ातिहा 11 मर्तबा पढ़िए।

2. पहले 10 बार तो पूरी सूरह पढ़ें।

3. लेकिन फिर जब 11वीं बार पढ़ रहे हों और “इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन” पर पहुंचें, तो “इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन” को 100 मर्तबा दोहराइए। फिर जब वो 100 बार हो जाये तब उसके बाद “इह्दिनस्सिरातल मुस्तक़ीम…” से सूरह को मुकम्मल कर लीजिए।

एक ही जुमले को बार-बार क्यूँ पढ़ें?

अब आप सोच रहे होंगे कि एक ही जुमले को बार-बार क्यूँ पढ़ रहे हैं वो इसलिए कि जब हम इस आयत को पढ़ते हैं तो हक़ीक़त में हम अपने रब के सामने इक़रार कर रहे हैं कि “ऐ अल्लाह! हम सिर्फ़ तेरी इबादत करते हैं और सिर्फ़ तुझी से मदद मांगते हैं।” बीमारी हो, परेशानी हो या कोई और मुश्किल जब इंसान इस यक़ीन के साथ अपने रब की तरफ़ रुजू करता है तो उसका दिल भी मज़बूत होता है।

दम करते वक़्त सबसे ज़रूरी बात

इन तमाम अमलों में सबसे अहम चीज़ है नियत और अल्लाह पर भरोसा। अपने लिए दम करें या घर के किसी और के लिए, ये बातें दिल में बसा लीजिए:

❖ शिफ़ा देने वाला सिर्फ़ अल्लाह तआला है।
❖ सूरह फ़ातिहा शिफ़ा का ज़रिया है, असल शिफ़ा अल्लाह ही की तरफ़ से आती है।
❖ दुआ और तिलावत के साथ अल्लाह से आफ़ियत मांगते रहिए।
❖ मायूसी के बजाय अल्लाह की तरफ़ रुजू कीजिए।
❖ दवा और इलाज जारी रखते हुए सूरह फ़ातिहा से दम भी साथ-साथ किया जा सकता है।

दुआ

अल्लाह तआला तमाम बीमारों को कामिल शिफ़ा, आफ़ियत और सुकून अता फ़रमाए, और जो लोग लंबे अरसे से बीमारी में मुब्तला हैं, उनकी तकलीफ़ दूर फ़रमाए और उनकी बीमारी को उनके लिए शिफ़ा और रहमत का ज़रिया बना दे। आमीन।