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Dajjal Se Kaise Bachen? 5 तरीके जो हर मुसलमान को जानना चाहिए

Dajjal Se Kaise Bachen?

Dajjal Se Kaise Bachen?

5 तरीके जो हर मुसलमान को जानना चाहिए

Dajjal Se Kaise Bachen? : दज्जाल एक ऐसा फ़ितना, जिससे हर नबी ने अपनी उम्मत को डराया था, क्यूंकि वो ऐसा फ़ितना है जो आते ही सिर्फ़ खुदाई का दावा ही नहीं करेगा बल्कि ऐसे सबूत दिखायेगा कि न जाने कितने ईमान वाले उसकी बातों में आकर अपना ईमान खो देंगे, और उसके साथ कुफ्र की हालत में पहुँच जायेंगे |

इसीलिए हमारे नबी (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) ने तो ख़ास कर उसके आने से पहले की बहुत सी निशानियों भी बताई हैं ताकि कहीं हम अपना ईमान उसके हाथों पर न रख दें | इसलिए आज हम बताएँगे दज्जाल से बचने 5 तरीके जो हर मुसलमान को जानना चाहिए | लेकिन उससे पहले जान लें कि दज्जाल के आने से पहले दुनिया किस हालत में पहुँच चुकी होगी |

दज्जाल के आने से पहले दुनिया कैसी होगी?

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया था कि दज्जाल अचानक नहीं आएगा। उसके आने से पहले दुनिया का माहौल बदल जाएगा। आम लोगों में सच और झूठ की पहचान मिटने लगेगी और लोग सिर्फ दिखावे पर चलेंगे। आपने फ़रमाया कि दज्जाल के आने से पहले ऐसे साल आएंगे जिनमें झूठे लोगों को सच्चा समझा जाएगा और सच्चे लोगों को झूठा कहा जाएगा।

आज का दौर

अब आज का दौर को देख लीजिये यहाँ झूठ इतनी खूबसूरती से पेश किया जाता है कि इंसान उसे सच समझ बैठता है, और सच इतना कमज़ोर दिखाया जाता है कि लोग उस पर शक करने लगते हैं। यही वो माहौल है जिसकी खबर नबी ﷺ ने सदियों पहले दे दी थी।

अब आप ख़ुद बताइए… क्या हम उसी दौर में नहीं जी रहे हैं? जहाँ सोशल मीडिया पर कोई भी बात कुछ मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। जिसमें आधा सच और आधा झूठ मिलाकर ऐसी कहानी बनाई जाती है कि इंसान धोखा खा जाए। और सबसे ख़तरनाक बात यह है कि कई बार हम खुद भी जाने-अनजाने उस धोखे का हिस्सा बन जाते हैं।

आधा सच — पूरे झूठ से ज़्यादा ख़तरनाक

ये बात हक़ीक़त है कि आधा सच पूरे झूठ से ज़्यादा ख़तरनाक होता है क्यूंकि पूरा झूठ अक्सर पकड़ में आ जाता है, लेकिन आधा सच बहुत ख़तरनाक होता है। क्योंकि उसमें थोड़ी हक़ीक़त भी होती है जो इंसान को भरोसा दिलाती है, लेकिन फिर उसी भरोसे के सहारे एक बड़ा झूठ उसके दिल में उतार दिया जाता है।

अज़ीज़ों! यही दज्जाल की सबसे बड़ी ताकत यही होगी कि वो हक़ और बातिल को इस तरह मिलाएगा, कि इंसान पहचान ही नहीं पाएगा कि क्या हक़ है और क्या बातिल है, क्या सच है और क्या झूट, क्या सही है और क्या ग़लत, इसलिए हर मोमिन को ये 2 काम करने चाहिए |

  1. सच और झूट, सही ग़लत, हक़ और बातिल की समझ पैदा करे, और जो लोग बातिल और झूट को सही बना कर सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं ऐसे गुमराही फ़ैलाने वाले अमल में उनके साथ बिलकुल न दें |
  2. किसी मैसेज, किसी अफवाह को सच मानने से पहले तहक़ीक़ करें कहीं इसके पीछे दज्जाली मीडिया का काम तो नहीं है क्यूंकि झूट हम जैसे कई लोगो के सहारे सच का चोला पहन लेता है, और लोगों को गुमराह करता फिरता है, और दज्जाल के लिए मैदान तैयार करता है |

याद रखिए…दज्जाल सिर्फ वही करेगा जो शैतान पहले से करता आ रहा है। जैसे शैतान दुनिया को खूबसूरत बनाकर पेश करता है, गुनाह को आसान दिखाता है, और इंसान को अल्लाह से दूर करता है। दज्जाल उसी धोखे को और बड़े स्तर पर करेगा।

Dajjal Se Kaise Bachen?

दज्जाल से बचने के 5 तरीके

अब यहाँ सबसे अहम सवाल यही है। कि दज्जाल तो अपना काम करेगा लेकिन हम कैसे उससे बचें कैसे, इसलिए नबी ﷺ ने हमें सिर्फ खबर नहीं दी, बल्कि बचने का तरीका भी सिखाया।

1. इल्म हासिल करो

दज्जाल के फितने से बचने का पहला बड़ा हथियार “इल्म” है। यानि जो इंसान कुरआन और सुन्नत को जानता है, तो उसको धोका देना आसान नहीं होता है। उसके अंदर एक “फ़ुरक़ान” पैदा हो जाता है,  यानि सच और झूठ में फर्क करने की सलाहियत।

आज बेशुमार लोग किसी भी वायरल बात पर यकीन कर लेते हैं क्योंकि उनके पास दीन का मजबूत इल्म नहीं होता। लेकिन जो इंसान कुरआन से जुड़ा हो, उसे अजीब बातें सुनकर दिल के अंदर महसूस होने लगता है: “कुछ तो गलत है…” यही नूर-ए-इल्म है।

2. हर नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ो

रसूलुल्लाह ﷺ ने खास तौर पर यह दुआ सिखाई:

اللهم إني أعوذ بك من عذاب جهنم،
ومن عذاب القبر،
ومن فتنة المحيا والممات،
ومن شر فتنة المسيح الدجال

 

अल्लाहुम्मा इन्नी अ ऊ ज़ु बिका मिन अज़ाबि जहन्नम,

वमिन अज़ाबिल क़ब्र , वमिन फितनतिल महया वल ममात

वमिन शर्रिल फितनतिल मसीहिद दज्जाल

“ऐ अल्लाह! मैं जहन्नम के अज़ाब से, क़ब्र के अज़ाब से, जिंदगी और मौत के फ़ितनों से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने से तेरी पनाह मांगता हूँ।”

यह दुआ सिर्फ पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि हर दिन अपने दिल को अल्लाह की तरफ जोड़ने का जरिया है।

3. सूरह अल-कहफ़ — सबसे बड़ी ढाल

Surah Al-Kahf  ये वो सूरह है जिसको ख़ास कर हदीस में बताया गया है कि हर जुमे को इसका पढने वाला दज्कीजाल की पहुँच से दूर रहेगा और  अगर पूरी न पढ़ सके तो कम से कम पहली या आखिरी 10 आयतें दज्जाल से हिफाज़त का जरिया हैं। क्यों? क्योंकि यह सूरह इंसान को सिखाती है:

• दुनिया की चमक धोखा है
• असली कामयाबी ईमान है
• हक़ पर टिके रहने के लिए कभी-कभी “गुफा” में भी जाना पड़ता है

असहाबे कहफ़ जवान थे, उनके पास दुनिया थी, आराम था, भविष्य था। लेकिन जब ईमान और दुनिया में चुनने का वक्त आया, तो उन्होंने ईमान चुना। और यही असली कामयाबी है।

4. फ़ितनों से दूर भागो

आज लोग सोचते हैं: “हम मजबूत हैं, हमें कुछ नहीं होगा।” लेकिन नबी ﷺ ने सहाबा जैसे मजबूत ईमान वालों को भी चेतावनी दी थी कि जब दज्जाल आए तो उसके पास मत जाना।क्यों? क्योंकि इंसान अपने ईमान के बारे में जितना भरोसा करता है, उतना मजबूत हमेशा नहीं होता। इसलिए हर उस चीज़ से दूर रहना जरूरी है:

• जो दिल में शक पैदा करे
• जो गुनाह को आसान बनाए
• जो दीन से दूर करे
• जो हक़ को मजाक बना दे

माहौल अच्छा हो या बुरा इन्सान पर असर डालता है।

5. अपने ईमान की हिफाज़त करो

ईमान सबसे बड़ी दौलत है, ये हक़ीक़त है लेकिन एक वक्त ऐसा भी आएगा जब लोग दुनिया के फायदे के लिए अपना ईमान बेच देंगे। इसलिए हर मोमिन को अपने दिल में यह फैसला पक्का करना चाहिए: “मैं किसी भी कीमत पर अपना ईमान नहीं बेचूँगा।” जब इंसान बार-बार अपने दिल में यह इरादा मजबूत करता है, तो अल्लाह उसका ईमान मजबूत कर देते हैं।

आख़िरी बात

दज्जाल का फ़ितना क़यामत के वक़्त का ही सिर्फ एक वाक़िआ नहीं है, बल्कि वो फ़ितना हर दौर में मौजूद है जो मोमिन को धोखे में डालता है। इसलिए आज हर मोमिन को खुद से पूछना चाहिए:

• क्या मेरा दिल कुरआन से जुड़ा है?
• क्या मैं हर वायरल बात पर यकीन कर लेता हूँ?
• क्या मैं अपने ईमान की हिफाज़त कर रहा हूँ?
• क्या मैं सच पहचानने की कोशिश करता हूँ?

क्योंकि आने वाला दौर सिर्फ ताकत का नहीं होगा… बल्कि बसीरत का होगा। और जिस इंसान का रिश्ता अल्लाह, कुरआन और सुन्नत से मजबूत होगा, वही हर फितने से महफूज़ रहेगा।

अल्लाह तआला हमें हर छोटे-बड़े फ़ित्ने से, खास तौर पर दज्जाल की फ़ित्ना से महफूज़ फरमाए। आमीन।

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