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Hazrat Abdul Qaadir Jilani R.A. Ka Waqia | एक डाकू कैसे अल्लाह वाला बना

Hazrat Abdul Qaadir Jilani R.A. Ka Waqia

Hazrat Abdul Qaadir Jilani R.A. Ka Waqia

एक डाकू कैसे अल्लाह वाला बना

सौदागरों का एक काफिला बगदाद की तरफ जा रहा था, उनके साथ एक नौउमर लड़का भी था, जिसकी मां ने इस काफिले के साथ इसलिए कर दिया था, ताकि हिफाजत के साथ ये अपनी मंजिल पर पहुंच जाएं और दीन का इल्म हासिल करे

काफिला इत्मीनान से चला जा रहा था कि एक जगह कुछ डाकुओं ने उस पर हमला कर दिया, काफिले वालों ने अपना माल बचाने के लिए बड़ी चालें चली कि किसी तरह से कुछ माल बचा लें, लेकिन डाकूओं के सामने उनकी एक चाल भी काम न आई, क़ाफ़िले वाले उनसे रहम की अपीलें करते रहे लेकिन डाकुओं के दिल नहीं पसीजे

जब एक एक आदमी से उन्होंने सब कुछ छीन लिया तो उस नौ उमर लड़के से पूछा : तुम्हारे पास और भी कुछ है

लड़का : जी हां मेरे पास 40 दीनार हैं

डाकू : तुम्हारे पास 40 दीनार है (डाकू को यक़ीन नहीं आया कि इस ग़रीब से दिखते लड़के के पास इतने दीनार कैसे आ गए और अगर आ भी गए तो ये हमें क्यूँ बता रहा है, यही सोचते सोचते वो इस लड़के को अपने सरदार के पास ले गया

डाकू : सरदार ! ये लड़का कहता है कि मेरे पास 40 दीनार हैं

सरदार : क्या तुम्हारे पास वाक़ई 40 दीनार हैं

लड़का : हाँ हैं

सरदार : अच्छा तो कहाँ रखे हैं

लड़का : जी मेरी कमर से एक थैली बंधी हुई है, उस में रखे हैं

सरदार ने लड़के की कमर से थैली खोली, तो उसमें वाक़ई 40 दीनार थे, सरदार हैरत से कुछ देर उस लड़के को देखता रहा फिर पुछा : तुम कहां जा रहे हो ?

लड़का : दीन का इल्म हासिल करने बग़दाद जा रहा हूं,

सरदार : क्या तुम्हारा वहां जानने वाला कोई है ?

लड़का : जी नहीं ! मेरी अम्मी ने मुझे यह 40 दीनार दिए थे, ताकि मैं इत्मीनान के साथ दीन का इल्म हासिल करूँ, क्यूंकि एक अजनबी शहर में मेरी ज़रूरतें कौन पूरी करेगा और क्यूँ मैं किसी का अहसान उठाऊँ, सरदार बड़ी दिलचस्पी और हैरत के साथ उस लड़के की बातें सुन रहा था और वह सोच रहा था कि इस लड़के ने ये दीनार छुपाये क्यूँ नहीं और बता क्यूँ दिए अगर ये छुपा लेता तो हम लोग तलाश करने पर भी नहीं पा सकते थे

और ये एक अजनबी शहर में तालीम हासिल करने जा रहा है ,और उसके खर्चे का दारोमदार इसी रक़म पर है, लेकिन फिर भी न छुपा कर सब कुछ बता दिया, बच्चे की सादगी और सच्चाई ने उस डाकू सरदार को अन्दर से झिंझोड़ ना शुरू किया, और आख़िरकार उस ने पुछ ही लिया बेटा तुम ने ये रक़म छुपाई क्यूँ नहीं, अगर तुम न बताते तो हमें शक भी न होता कि तुम्हारे पास भी इतने पैसे भी हैं

लड़का : जब मैं घर से निकल रहा था तो मेरी माँ ने मुझ से कहा था कि कुछ भी हो तुम झूठ नहीं बोलना, तो भला मैं अपनी माँ के हुक्म को कैसे टाल सकता था

सरदार के अंदर का इंसान जाग गया, वो सोचने लगा कि ये छोटा लड़का अपनी माँ का ऐसा फरमाबरदार है कि वो पैसे न होने की वजह से अपनी होने वाली मुश्किलों को जानता है और अपना मुस्तक़बिल ( Future ) तबाह होते देख रहा है लेकिन मां का हुक्म टालने को तैयार नहीं है, और मैं कितने अरसे से बराबर अपने रब और परवरदिगार के हुक्म को रौंद रहा हूँ

उसने लड़के को गले से लगा लिया, उसके साथ साथ पूरे क़ाफ़िले का सामान वापस कर दिया, और खुदा के आगे सज्दे में गिर कर गिड़गिड़ाने लगा और उसने सच्चे दिल से तौबा की तो खुदा की रहमत ने उसे उसे अपनी आगोश में ले लिया

वह डाकू क्या बना ?

फिर यह डाकू फिर अपने वक्त का एक जबरदस्त वली और अल्लाह वाला बना और ख़ुदा के बन्दों को लूटने वाला खुदा के बंदों को दीन की दौलत तक़सीम करने वाला ( बांटने ) बन गया, एक अज़ीम माँ की तरबियत ने सिर्फ अपने बच्चे को ही ऊंचा नहीं उठाया बल्कि डाकुओं की भी तकदीर बदल दी,

वो लड़का क्या बना ?

ये वही होनहार लड़का है जिसको सारी इस्लामी दुनिया अब्दुल क़ादिर जीलानी (रहमतुल लाहि अलैहि) के नाम से जानती है और जिनका नाम आते ही दिल अक़ीदत और एहतेराम से झुक जाते हैं

अल्लाह हम सबको अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए

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