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2 Gunah Jinki Saza Duniya Me | दो गुनाह जिनकी सज़ा दुनिया में मिलती है

2 Gunah Jinki Saza Duniya Me

2 Gunah Jinki Saza Duniya Me |

दो गुनाह जिनकी सज़ा दुनिया में मिलती है

आप को पता ही होगा कि आप अपनी ज़िन्दगी में जो भी काम करते हैं उन कामों को उर्दू में कहते हैं आमाल, और ये भी जानते होंगे कि आमाल अच्छे भी होते हैं और बुरे भी होते हैं, अच्छे आमाल का नतीजा यह होता है कि इंसान को दुनिया में भी भलाई मिलती है और आख़िरत में भी अज्र और सवाब हासिल होता है। दूसरी तरफ़, बुरे आमाल करने वाले को दुनिया और आख़िरत दोनों में सज़ा मिलती है।

वो अलग बात है कि अल्लाह तबारक व तआला अगर एहसान करे तो हमारे सारे गुनाहों को माफ कर दे क्यूंकि अल्लाह तआला रहमान है रहीम है करीम है तो अगर वो माफ करने पर आए सारे गुनाह माफ कर दे लेकिन अगर इंसाफ करे तो आखिरत में हम अपने गुनाहों की सजा से बच नहीं पाएंगे, यह अल्लाह तआला का एक क़ानून है। अच्छे आमाल फायदे का सौदा हैं, जबकि बुरे आमाल नुकसान का। लेकिन दो गुनाह ऐसे हैं जिनकी सजा दुनिया में (2 Gunah Jinki Saza Duniya Me) मिलती है उन के बारे में हदीस-ए-पाक की रौशनी में आज मैं इन गुनाहों का तज़्किरा कर रहा हूं।

2 Gunah Jinki Saza Duniya Me

1. **पहला गुनाह: ज़ुल्म**

ज़ुल्म का मतलब है किसी के हुकूक अदा न करना या उस पर ज्यादती करना। इसमें बीवी, बच्चों, पड़ोसियों, वालिदैन, और रिश्तेदारों पर ज़ुल्म करना शामिल है। कोई अपने भाइयों के हक़ मार रहा हो, बहनों के हिस्से छीन रहा हो, मां-बाप को परेशान कर रहा हो या पड़ोसियों को तकलीफ दे रहा हो—यह सब ज़ुल्म में आता है। हदीस में आया है कि ज़ुल्म ऐसा गुनाह है जिसकी सज़ा अल्लाह आख़िरत में तो देगा ही, लेकिन दुनिया में भी इस गुनाह का बदला मिल जाता है।

रसूलुल लाह (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम):

“الظلم ظلمات يوم القيامة”
(صحیح بخاری: 2447، صحیح مسلم: 2579)
तरजुमा : “ज़ुल्म क़यामत के दिन अंधेरों का सबब बनेगा।”

अल्लाह त आला का फ़रमान ;
وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَ ۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍ تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ
(सूरत इब्राहीम: 42)
तरजुमा : “जो लोग ज़ुल्म कर रहे हैं, अल्लाह तआला उनसे ग़ाफिल नहीं है। अल्लाह उन्हें उस दिन के लिए मोहलत दे रहा है जब उनकी आंखें खौफ से फटी रह जाएंगी।”

2. दूसरा गुनाह: वालिदैन की नाफरमानी

वालिदैन की नाफरमानी करना, उन्हें तकलीफ देना, और उनके जायज़ हुक्म को न मानना बहुत बड़ा गुनाह है। हदीस-ए-पाक में इसे ख़ास तौर पर बयान किया गया है। कोई शख्स अगर वालिदैन का दिल दुखाए या उनकी नाराज़गी का सबब बने, तो उसकी सज़ा अल्लाह तआला दुनिया में ही दे देता है।

अल्लाह तआला का फ़रमान :

وَقَضَىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا
(सूरत अल-इसरा: 23)
तरजुमा : “तुम्हारे रब ने फैसला कर दिया है कि तुम सिर्फ उसी की इबादत करो और वालिदैन के साथ हुस्न-ए-सुलूक करो।”

रसूलुल लाह (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम):

إِنَّ أَعْظَمَ الْكَبَائِرِ: الْإِشْرَاكُ بِاللَّهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ
(सहीह बुखारी: 2654, सहीह मुस्लिम: 87)

तरजुमा : “सबसे बड़े गुनाहों में से एक है अल्लाह के साथ शरीक करना (शिर्क) और माता-पिता की नाफरमानी करना।”

3. तीसरा गुनाह: रिश्तों को तोड़ना

रिश्तेदारों के साथ ताल्लुक तोड़ देना, भाई-बहन से बातचीत बंद कर देना, या अज़ीज़ों के हुकूक अदा न करना रिश्तों को तोड़ने (क़त-ए-रहम) में शामिल है। हदीस में आया है कि जो शख्स चाहता है कि उसकी उम्र और रिज़्क़ में बरकत हो, उसे सिला-ए-रहमी करनी (रिश्तों को जोड़ना) चाहिए। तो ऐसे अगर किसी ने कता रहमी की (रिश्तों को तोड़ा) तो उसका उल्टा होगा यानि मां-बाप को या दुसरे रिश्तेदारों को सताया उनके माल खाक बैठे और उनका हक़ अदा नहीं किया तो उसकी सजा भी अल्लाह दुनिया में देता है

अल्लाह तआला का फ़रमान :
فَهَلْ عَسَيْتُمْ إِن تَوَلَّيْتُمْ أَن تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ وَتُقَطِّعُوا أَرْحَامَكُمْ
(सूरत मुहम्मद: 22)
तरजुमा : “क्या तुम्हें यह डर नहीं कि अगर तुमने जमीन में फसाद किया और रिश्तों को तोड़ा, तो तुम्हारे लिए अज़ाब होगा।”

नबी पाक (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) का फ़रमान :

“لا يدخل الجنة قاطع رحم”
(صحیح بخاری: 5984، صحیح مسلم: 2556)
तरजुमा : “रिश्ते तोड़ने वाला जन्नत में दाख़िल नहीं होगा।”

ख़ास ताकीद

इन तीन गुनाहों—ज़ुल्म, वालिदैन की नाफरमानी, और क़त-ए-रहम—से बचने की कोशिश करनी चाहिए। ये गुनाह इंसान की दुनिया और आख़िरत दोनों को खराब कर सकते हैं।

अब आख़िर में, हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह हमें इन गुनाहों से बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाए और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमाह को इनसे महफूज़ रखे। आमीन

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