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Zakat Kin Rishtedaron Ko Dena Chahiye | ज़कात किन रिश्तेदारों को दे सकते हैं ?

Zakat Kin Rishtedaron Ko Dena Chahiye

Zakat Kin Rishtedaron Ko Dena Chahiye

ज़कात किन रिश्तेदारों को दे सकते हैं ?

जब आप पर ज़कात फ़र्ज़ हो जाती है तो आप ज़कात की ही नियत से अपने माल का ढाई परसेंट हिस्सा निकालते हैं और आप ढूँढने लगते हैं कि ये रक़म किस को दी जाये, क्यूंकि ज़कात को उसके सही जगह पहुँचाना भी आपकी ज़िम्मेदारी है, तो जान लीजिये कि सब से पहले जो लोग इस बात का हक़ रखते हैं कि उन्हें ज़कात दी जाये वो लोग ये हैं

  1. रिश्तेदार
  2. आप के महल्ले वाले
  3. मिलने जुलने वाले
  4. दोस्त व अहबाब

इन तमाम लोगों में से आप जिसको भी ज़कात का हक़दार पायें आप उसको दे सकते हैं, लेकिन इन सारे लोगों में सब से बेहतर ये है कि आप अपने परेशान हाल रिश्तेदारों को ज़कात दें क्यूंकि इससे आपके दो फ़ायदे होंगे, एक तो आपकी ज़कात अदा हो जाएगी, दुसरे सिला रहमी यानि रिश्तों को जोड़ने का भी सवाब भी मिलेगा

इसलिए ज़कात की अदायगी से पहले देख लें कि आप के रिश्तेदारों और आस पड़ोस में कोई ज़रुरत मंद तो नहीं है क्यूंकि उसीका पहला हक़ है कि ज़कात उसे दी जाये |

कौन से रिश्तेदारों को ज़कात नहीं दे सकते ?

अब रह गयी बात कि रिश्तेदारों में से ज़कात किन रिश्तेदारों को दी जाये और किन को न दी जाये, क्यूंकि तमाम रिश्तेदारों को तो नहीं दी जा सकती, तो जान लीजिये कि दो रिश्ते ऐसे हैं जिनको ज़कात नहीं दी जा सकती

निकाह के रिश्ता  ; शौहर बीवी को ज़कात नहीं दे सकता और बीवी शौहर को ज़कात नहीं दे सकती

पैदाइश का रिश्ता : जिन से हम पैदा हैं और जो हम से पैदा हैं उनको ज़कात नहीं दे सकते

जिन से हम पैदा हैं का मतलब ये है कि जैसे माँ, बाप, दादा दादी, नानी, इसीतरह और ऊपर चढ़ते चले जाओ परदादा परदादी परनाना परनानी इनको ज़कात नहीं दे सकते, और जो हम से पैदा हैं का मतलब है बेटा बेटी, पोता पोती, नवासा नवासी इनको ज़कात नहीं दे सकते |

कौन से रिश्तेदारों को ज़कात दे सकते हैं ?

इसके अलावा जितने भी रिश्तेदार हैं सबको आप ज़कात दे सकते हैं जैसे बहन, भाई, भांजा भान्जी, भतीजा भतीजी, खाला खालू, मामी मामू फूफा और फूफी वगैरह जितने रिश्तेदार हैं इन सबको आप ज़कात दे सकते हैं

पैदाइश और निकाह के रिश्ते को ज़कात क्यूँ नहीं दे सकते ?

क्यूंकि इसका फ़ायदा ख़ुद आपको पहुँचता है, मानं लीजिये बीवी ने शौहर को ज़कात दी या शौहर ने बीवी को ज़कात दी तो उस रक़म का फ़ायदा ख़ुद आपको पहुँच रहा है, और जो पैदाइश के रिश्ते हैं जैसे मान लीजिये माँ बाप या बेटा बेटी, इन के पास रक़म पहुँचने से इसका फ़ायदा आपको भी जायेगा |

जबकि इन दोनों रिश्तों की ज़रूरतें पूरी करने की ज़िम्मेदारी तो ख़ुद आप पर है, आप इनकी ज़िम्मेदारी पूरी कीजिये और ज़कात उन लोगों को दीजिये जिनकी ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है और उनके पास ज़कात की रक़म जाये जिनके पास जाने से उस रक़म का फ़ायदा आपको न हो

अल्लाह अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए |

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