3 Types Of Namaz In Hindi
नमाज़ के तीन दरजे
आप जानते हैं कि नमाज़ तमाम मुसलमानों को उसी तरह पढ़नी चाहिए जैसे हमारे नबी और सहाबा ने पढ़ी लेकिन मैं आप को आज तीन ऐसे लोगों के बारे में बताऊँगा जो नमाज़ पढ़ते हैं लेकिन किसकी नमाज़ सब से ज़्यादा बेहतर और अल्लाह को राज़ी करने वाली है इन को आप देखें फिर ख़ुद फैसला करें
तीसरा नमाज़ी
3. नमाज़ी आया, जल्दी से नियत बाँधी और जल्दी जल्दी रुकू सजदे किये और जितनी तेज़ी से आया था उतनी ही तेज़ी से चला गया, लगता था उसके सर पर कोई बोझ रखा था उसने उतारा और चल दिया
दूसरा नमाज़ी
2. नमाज़ी आया, उसने नमाज़ पढ़ी उसने नमाज़ में जल्दी नहीं की लेकिन अल्लाह के सामने होते हुए भी उसका दिल बाहर लगा रहा, कहीं दुकान पर लगा रहा, कहीं बाज़ार में और कहीं घर पर लगा रहा और इसी तरह वो नमाज़ से बाहर आ गया |
पहला नमाज़ी
1. नमाज़ी आया, उसने बहुत ही सुकून और इत्मीनान के साथ नमाज़ पढ़ी जिसतरह वो अपने बहुत से ख़ास कामों को बिगड़ने के डर से बहुत संभाल कर और आराम से करता है इस से कहीं ज़्यादा उसने नमाज़ की एक एक रकात के एक एक रूक्न को अदा किया और एक एक फ़र्ज़ वाजिब और सुन्नत का ख़याल रखा
पूरी नमाज़ में उसका दिल अल्लाह की तरफ लगा रहा क्यूंकि वो ये हदीस जानता था कि “बंदा जितनी देर अल्लाह की तरफ़ मुतवज्जह रहता है अल्लाह उतनी ही देर बन्दे की तरफ़ मुतवज्जह रहता है” तो उसने इस हदीस पर खूब अमल किया और अपनी तवज्जो अल्लाह की तरफ़ लगाये रखी
नमाज़ के 2 तरीक़े
और वो ये भी जानता था कि नमाज़ पढ़ने के दो तरीक़े हैं 1. तुम अल्लाह को देख रहे हो (ये न हो सके तो कम से कम इतना कर लो कि) 2. अल्लाह तुम्हें देख रहा है, तो उसने इस दुसरे तरीक़े पर ख़ूब अमल किया और पूरी नमाज़ में इस तरह अल्लाह की तरफ मुतवज्जे रहा जैसे अल्लाह उसे देख रहा है और ऐसे ही उसने अपनी नमाज़ मुकम्मल की अल्लाह तआला से दुआ की
अब आप बताइए इन में से किस की नमाज़ अल्लाह को ज़्यादा राज़ी करेगी और अल्लाह तआला अपने यहाँ उसका नाम नमाजियों में लिख देंगे, और यहाँ पर आप अपने आप को भी जाँचिये कि आप की नमाज़ इन में से किस नम्बर पर है क्या वाक़ई आप नमाज़ के सारे उसूलों और क़ायदे कानून पर अमल करते हैं और नमाज़ बहुत ही सुकून और इत्मीनान के साथ पढ़ते हैं
अगर आप एक नंबर वाले नमाज़ी हैं तो….
अगर ऐसा है तो मुबारक हो आपको कि आप अल्लाह के सामने झुकना सीख गए, उस से माँगना सीख गए, और जब ये सब कुछ सीख गए तो इंशाअल्लाह आपकी आखिरत की सारी मंजिलें आसान हो जाएँगी क्यूंकि सब से पहली मंज़िल आख़िरत की नमाज़ ही है क़ब्र में सब से पहले नमाज़ के बारे में ही पुछा जायेगा, अगर नमाज़ बेहतर है तो हो सकता है अल्लाह हमारे उन गुनाहों को माफ़ फरमा दे जो हमने दिन के उजाले में किये रात के अँधेरे में किये, खुले आम किये और लोगों से छिपा कर किये, जान बूझ कर किये या अनजाने में किये
और अगर ऐसा नहीं है……
अगर ऐसा नहीं है और आप ज़िन्दगी भर बस एक सरसरी सी नमाज़ रस्मी तौर पर पढ़ते रहे और उन एक नंबर वाले नमाजियों में नहीं आने की कोशिश भी नहीं की तो ये बहुत ही फ़िक्र की बात है कहीं ऐसा न हो कि हदीस के मुताबिक़ ये नमाज़ कपड़े की तरह लपेट कर मुंह पर मार दी जाये,
हमको और आप को बल्कि हर किसी को ये सीखना चाहिए कि अल्लाह के रसूल (सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम) नमाज़ कैसे पढ़ते थे और आपने इस के लिए क्या क़ायदे कानून बनाये हैं, कब नमाज़ टूटती है, कब बाक़ी रहती है, कब सज्द-ए-सह्व करना होता है, और नमाज़ पढ़ते वक़्त हमारे दिल की क्या हालत हो वगैरह वगैरह
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ए ! अल्लाह हमें नमाज़ का पाबन्द बना दीजिये, हम को नबी और सहाबा की तरह नमाज़ पढने वाला बना दीजिये आमीन







मुझे उम्मिद है के आप सजदे साहू का भी मसाला तहरीर फरमाएंगे
ji maine is se pahle sajdae sahw ka masla baht tafseel se likha hai, aap is link par jakar padh sakte hai
https://www.deenibaatein.com/sajda-e-sahw-kya-hai-namaz-me-galati-par-kiya-jane-wala-sajda/