Soorah Fatiha Hindi | सूरह फातिहा के अमल, उससे होने वाले फायदे
सूरह फातिहा ( Alhamdu Shareef ) का दूसरा नाम मुन्जियह है मतलब नजात देने वाली
हदीस में है कि ये सूरत हर उस मकसद के लिए फायदेमंद है जिस मकसद के लिए उसे पढ़ा जाये
इस सूरत की खुसूसियत ये है कि इस में अल्लाह के पांच बहुत ही अजीमुश शान और मर्तबे वाले नाम ज़िक्र है और इसी में इस्मे आज़म है और इस्मे आज़म
की फ़ज़ीलत ये है कि उसके साथ दुआ की जाये तो दुआ कुबूल होती है और सवाल किया जाये तो अता किया जाता है
रिज्क में बढ़ोतरी और दूसरों से बेनियाज़ी के लिए
जो शख्स रिजक में बढ़ोतरी और लोगों के सामने हाथ फ़ैलाने से बचना चाहता है उसके लिए ये वजीफा मुफीद है
रोजाना ईशा की नमाज़ के बाद 28 बार सूरह फातिहा पढ़े
नजला व ज़ुकाम का इलाज
अगर कोई नजला व ज़ुकाम से परेशान है तो इंशाअल्लाह ये वजीफा मुफीद है
तीन बार सूरह फातिहा पढ़े फिर मरीज़ पर दम कर (फूँक) दे
कुरान मजीद याद न होना
अगर किसी को कुरान मजीद याद न होता हो तो ये वजीफा ज़रूर करे इंशाअल्लाह इस की बरकत से कुरान जल्द हिफ्ज़ हो जायेगा
रोजाना 100 बार सूरह फातिहा ईशा की नमाज़ के बाद पढ़े
कैंसर का इलाज
एक अमल जिसका तजरिबा किया जा चूका है कैंसर से परेशान लोग ज़रूर इसको अमल में लाये
इंशाअल्लाह ज़रूर फर्क महसूस करेंगे
ये वजीफा फज्र की सुन्नतों और फ़र्ज़ से पहले यानी फज्र की सुन्नतों और फ़र्ज़ के दरमियान करे
41 बार बिस्मिल्लाहिर रह्मनिर्रहीम के आखिरी मीम को अलहम्दु के लाम से मिला कर पूरी सूरह फातिहा पढ़े जैसे बिस्मिल्लाहिर रह्मनिर्रहीमिल हम्दु
लिल्लाही रब्बिल आलमीन
फिर पानी पर दम करके मरीज़ को पिला दे
पूरे साल अमन और तंगदस्ती से हिफाज़त
जो शख्स सूरह फातिहा को रमजान की पहली रात में 41 बार पढ़े
वो पूरा साल अमन और हिफाज़त व तंगदस्ती से बचा रहेगा






