Quraan se shifa | हम कुरान से शिफा कैसे हासिल करे | Hindi

कुरान से शिफा

अगर कोई शख्स अल्लाह की रजा (ख़ुशी) के लिए कुरा की किसी आयत या अल्लाह के किसी नाम का ज़िक्र तमाम शर्तों के साथ करता है तो उसपर अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते उतरते है और अल्लाह की खुशनूदी की खुशखबरी सुनाते है और फिर उसको रोहानी व क़ल्बी ताक़ते अत की जाती है

यही मुसलमानों की वो असल ताक़त रोहानियत और विरासत है जिसके ज़रिये मुसलमानों ने पूरी दुनिया में हुकूमत की

आज मुसलमान ज़लील क्यूँ है

आज मुस्लमान अपने इस बातिनी व अन्दुरूनी इल्म यानी कुरान से दूरी कि वजह से ज़लील है यहांतक कि फ़राइज़ से भी दूर हो गए है मुसलमानों पर वेस्टर्न कल्चर इस क़दर हावी हो चूका है कि हमारे नजदीक नमाज़, रोज़े, और दूसरी दीनी और रोहानी उलूम की क़दर कम हो चुकी है हमारे पास इतनी फुर्सत नहीं कि हम इस से भी शिफा हासिल करे

कुरान पाक हर मर्ज़ कि दवा और हर मुश्किल कि कुंजी है हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम ने हमें कुरान से फ़ायदा उठाने कि तल्कीन की

 

Benefits Of Quraan | कुरान पाक का रोहानी व जिस्मानी असर

 

एक कुरानी आयत का तर्जुमा ये है कि “और हम उतारते है कुरान में वो चीज़ जो ईमान वालो के लिए शिफा है “ हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम न सिर्फ खुद दम करते थे बल्कि सहबा को भी बीमारियों से शिफा और मुश्किलात के हल के लिए कुरान पाक कि अमलियात से फायदा उठाने की तलकीन फरमाते

कुरान पर एक बहुत बड़ा सितम

सितम तो ये है कि हमने कुराने पाक को सिर्फ सवाब हासिल करने वाली किताब समझ लिया है जबकि उसकी असल रोहानी ताक़त और हर किस्म कि मुश्किलात को दूर करने कि ताक़त से नहीं जानते है

जिस तरह मुल्क का एक पवार हॉउस होता है जिस के ज़रिये तमाम शहरों इलाकों को बिजली मिलती है और उस एनर्जी से हम अपने घर कि चीजों को अपने आलात को चलाते है उसी तरह कुरान उम्मते मुस्लिम का एक ऐसा पवार हॉउस है जिसकी बर्की ताक़त के ज़रिये हम दीनी व दुनयावी मकासिद को पूरा करते है

अगर कुरान पहाड़ पर उतरता 

अल्लाह ने कुरान में फ़रमाया है कि अगर ये कुरान हम किसी पहाड़ पर उतारते तो तुम उसे डरकर रेज़ा रेज़ा और टुकड़े टुकड़े होता हुआ देखते

तो जब पहाड़ कुरान कि रोहानी ताक़त से टुकड़े टुकड़े हो सकता है तो क्या वजह है कि इसके पढने से दुनयावी और रोहानी परेशानियाँ दूर न हो और जिस्मानी बीमारियाँ ख़त्म न हो

जब शिफा के हासिल करने और मुश्किलात के हल कि शर्तो का लिहाज़ करते हुए कुरान को किसी बीमारी पर पढ़ा जाता है तो कोई बीमारी और परेशानी कुरान कि ताक़त का मुकाबला नहीं कर सकती

 

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