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Shabe Barat Me Kin Logon Ki Magfirat Nahin Hoti | शबे बरात में दुआ कैसे करें ?

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Shabe Barat Me Kin Logon Ki Magfirat Nahin Hoti

शबे बरात में दुआ कैसे करें ?

शाबान का महीना और हमारे नबी सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम का अमल

शाबान इस्लामी साल का आठवां महीना है, और ये वो महीना है जिसमें बन्दों के आमाल अल्लाह तआला की बारगाह में उठाये जाते हैं और ये महीना रमजान के करीब है इसीलिए जब भी ये महीना आता तो हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) ये दुआ फरमाते थे कि “ए अल्लाह हमारे लिए रजब और शाबान के महीने में बरकत अता फ़रमाइए और हमें रमजान के महीने तक सलामती के साथ पहुंचा दीजिये |

और आप (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) ज़्यादातर नफ्ली रोज़े शाबान के महीने में ही रखते थे और इसकी वजह आप फरमाते थे कि इस महीने में मलाकुल मौत ( मौत का फ़रिश्ता ) को उन लोगों के नाम लिख कर दिए जाते हैं जिन की रूह कब्ज़ की जाएगी ( जो इस साल मर जायेंगे ) तो मैं चाहता हूँ कि मेरा फैसला रोज़े की हालत में किया जाये |

शबे बरात की फ़ज़ीलत

शाबान के महीने में एक बाबरकत और फ़ज़ीलत वाली रात आती है जिसको शबे बरात ( Shabe Barat ) कहते हैं जो कि शाबान की 15 वीं रात होती है और इस रात में नफ्ली इबादत की बहुत फ़ज़ीलत है |

शबे बरात में हमारे नबी का अमल

हज़रत आयेशा रज़ियल लाहु अन्हा फ़रमाती हैं कि नबी (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम)15 शाबान को घर तशरीफ़ लाये और अभी पूरे कपड़े उतारे भी नहीं थे कि फिर पहन लिए और घर से निकल पड़े मैं भी पीछे पीछे चली गयी ये देखने के लिए आप कहाँ जा रहे हैं, तलाश करते करते मैंने आपको देखा कि आप मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में हैं और और मोमिनों के लिए दुआ ये मगफिरत कर रहे हैं |

शबे बरात में दुआ कैसे करें | Shabe Barat Me Dua Kaise Kare

अगर कोई अरबी दुआ याद न हो तो इस तरह दुआ मांगे

ए मेरे अल्लाह!  तू ही सब पर अहसान करने वाला है, कोई तुझ पर अहसान नहीं कर सकता, ए उम्मत पर महरबानी करने वाले, ए बन्दों को अता करने, वाले तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू गिरतों को थामने वाला है, बे पनाहों को पनाह देने वाला है, परेशान हालों का और मुसीबत के मारों का तू ही सहारा है

ए अल्लाह ! तेरे सिवा किस से मांगें, तू ही दाता है, मेरी बदबख्ती को दूर कर दे, और अपने हलाल रिज्क से मुझे महरूम न कर, बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है ए अल्लाह ! मेरी परेशानियों को दूर फरमा चाहे उन को जानता हूँ या नहीं यक़ीनन तू ही सब से ज़्यादा अहसान करने वाला है

ए अल्लाह नेक औलाद अता फ़रमा और हमारी मगफिरत फ़रमा, ए अल्लाह ! तमाम गुनाहों को माफ़ फरमा वो छोटे हों या बड़े जान बूझ कर किये हों या अनजाने, में उजाले में किये हों या अँधेरे में, और ए अल्लाह ! आइन्दा हमें गुनाहों से बचने वाला बना दे और इन गुनाहों की नहूसत को मिटा दे

ए अल्लाह ! ईमान पर ख़ात्मा फरमा दे, हमारे माँ बाप उस्ताद और तमाम मुसलामानों की मगफिरत अता फरमा दे, और उनकी नेक दुआओं को क़ुबूल फरमा दे

ए अल्लाह ! हमें माँगना नहीं आता हमें वो सब अता फरमा दे जो नबी (सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम) ने तुझ से माँगा, और जिन चीज़ों से हमारे नबी ने पनाह मांगी ए अल्लाह ! उन तमाम चीज़ों से हमें पनाह दे दे

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इस रात में किन लोगों की मगफिरत नहीं होती ?

1. मुशरिक

अल्लाह के अलावा किसी और से फ़ायदे और नुक़सान की उम्मीद रखना और अल्लाह के अलावा किसी और को पूजना और इबादत करना ऐसा शख्स इस रात में बख्शा नहीं जाता जब तक वो तौबा न कर ले |

2. दिल में कीना रखने वाला

कीना किसे कहते हैं ?

जब आदमी किसी आदमी को किसी पर गुस्सा आता है और सामने वाला इतना ताक़तवर है कि उस पर गुस्सा निकालने और बदला लेने की क़ुदरत न हो तो उसके ज़ब्त करने से उस के दिल में एक क़िस्म का बोझ हो जाता है इसी को कीना कहते हैं, उसका इलाज ये है कि उसको माफ़ करके उसके साथ मेल जोल व ताललुकात शुरू कर दिए जाएँ

3. रिश्तों को तोड़ने वाला

रिश्तेदारों के जो हुक़ूक़ हम पर वाजिब हैं उन को अदा न करना, उन के साथ बदसुलूकी करना, ताल्लुक़ात ख़त्म कर देना ये रिश्तों को तोड़ने में आता है ऐसा शख्स इस रात में बख्शा नहीं जायेगा |

4. शलवार टखनों से नीचे लटकाने वाला

पजामा, शलवार या लुंगी टखनों से नीचे पहनने के बारे में हदीस का फरमान है कि अल्लाह तआला उस शख्स की तरफ नज़रे रहमत नहीं फरमाता जो अपना पजामा या लुंगी टखनों से नीचे लटकाए | इस अमल की वजह से बंदा अपनी बख्शिश नहीं करवा पाता |

5. वालिदैन का नाफ़रमान

इस रात में अल्लाह की रहमत से महरूम रहने वाला शख्स वो भी है जो अपने माँ बाप का नाफरमान है

6. शराबी

शराब और नशे का आदी शख्स माफ़ नहीं किया जायेगा |

7. नाहक़ क़त्ल करने वाला

बगैर किसी वजह के किसी का क़त्ल करने वाला

8. जिना करने वाला

नामहरम को देखना, छूना, बिला ज़रुरत बात करना, और ना जाएज़ ताल्लुक़ात रखना जीना है |

अल्लाह तआला इन तमाम गुनाहों से हमें बचाए , आमीन |

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