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Aurton Ke Janaze Se Related Masail | औरतों के जनाज़े से रिलेटेड मसाइल

Aurton Ke Janaze Se Related Masail

मौत से पहले के आदाब

जब मौत का वक़्त क़रीब आ जाये यानी उसके आसार शुरू हो जाएँ तो तो उसके क़रीब बैठे हुए लोगों को चाहिए की उन्हें धीरे धीरे कलमा शहादत की तलक़ीन करें और सूरह यासीन की तिलावत करें हदीस में इन दोनों का ज़िक्र आया है

ऐसे मौके पर चाहिए की अच्छे लोग उन के क़रीब रहें और पाक साफ़ औरतें ही वहां मौजूद रहें नापाक औरतें उनके पास न रुकें बल्कि देख कर लौट जाएँ

औरत को ग़ुस्ल ( नहलाना ) कौन दे

  1. पहली बात औरत को औरत ही गुसल देगी

2. वही औरतें ग़ुस्ल दें जो मरने वाली के क़रीबी रिश्तेदार हों जैसे मा दादी लड़की नहीं तो उसके क़रीब के रिश्तेदार नहीं तो दूर के रिश्तेदार फिर जब इनमें कोई न हो तो अजनबी औरतें ही ग़ुस्ल दे देंगी

3. अगर नाबालिग बच्ची है तो उसको मर्द ग़ुस्ल दे सकता है

4. औरत का इन्तिक़ाल किसी ऐसी जगह हो जहाँ सिर्फ मर्द ही हों औरतें न हो तो

5. उन मर्दों में औरत का शौहर या कोई महरम रिश्तेदार हो तो जैसे बाप,दादा,भाई वगैरह तो वो औरत को ग़ुस्ल नहीं देंगे बल्कि तयम्मुम कराएँगे

और अगर महरम रिश्तेदार नहीं बल्कि गैर महरम हैं तो  ये लोग हाथ में कपडा लपेट कर औरत को तयम्मुम कराएँगे

6. इसी तरह मर्द का इन्तिक़ाल किसी ऐसी जगह हो जहाँ सिर्फ औरतें ही हों मर्द नहो तो औरतें मर्द को ग़ुस्ल नहीं देंगी बल्कि तयम्मुम कराएंगी अगर औरतें महरम हैं तो हाथ में कपडा लपेटे बगैर और अगर नामहरम हैं तो हाथ में कपडा लपेट कर

औरत किन लोगों को ग़ुस्ल दे सकती है

  1. बीवी अपने शौहर को ग़ुस्ल दे सकती है जबकि इन्तिक़ाल के वक़्त वो मर्द उसके निकाह में हो

2.  छोटे बच्चों को औरत ग़ुस्ल दे सकती है

मौत के बाद मय्यत को बनाना संवारना क्या जाएज़ है

नहीं रूह निकलने के बाद न तो मय्यत के बाल सँवारे जायेंगे न कंघी की जाएगी और न ही नाखून कटे जायेंगे

 

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