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Eid-e-Miladun Nabi (12 Rabi-Ul-Awwal) Kya Hai ? ईदे मीलादुन नबी और रबीउल अव्वल क्या है ?

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Eide Miladun Nabi (12 Rabi-Ul-Awwal) Kya Hai ?

ईदे मीलादुन नबी और रबीउल अव्वल क्या है ?

Eide Miladun Nabi ( ईदे मीलादुन नबी  ) जगह जगह आप लिखा हुआ देख रहे होगे, और लोगों को कहता हुआ सुन रहे होगे, लेकिन क्या इसका मतलब आप जानते हैं, अगर नहीं जानते तो आज जान लीजिये कि इस में तीन लफ्ज़ हैं एक ईद दुसरे मीलाद तीसरे नबी, हम तीनों के बारे में इंशाअल्लाह तफ़सील से बताएँगे ताकि इसके बाद आपको किसी और से पूछना और समझना ना पड़े

सब से पहले लफ्ज़ है ईद जिसका मतलब होता हैं (लौट कर आने वाली ख़ुशी)

दूसरा लफ्ज़ है मीलाद जिसका मतलब है पैदाइश

तीसरा लफ्ज़ है नबी जिसका मतलब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम हैं

अगर इन तीनों लफ़्ज़ों का एक साथ मतलब बयान करें तो इसका मतलब होता हैं नबी की पैदाइश की ख़ुशी, क्यूंकि हमारे नबी स.अ. इसी दिन पैदा हुए थे, इस लिए कुछ मुसलमानों ने इसको ईदे मीलादुन नबी (Eide Miladun Nabi ) का नाम दिया है

Eide Miladun Nabi Kab Manaya Jata Hai ?ईदे मीलादुन नबी कब मनाया जाता है

रबीउल अव्वल ( Rabi-Ul-Awwal) इस्लामी साल का तीसरा महीना है, और इस की 12 तारीख को ईदे मीलादुन नबी मनाया जाता है, वैसे तो ये तय नहीं है कि इसी दिन अल्लाह के नबी स.अ. की पैदाइश हुई थी, क्यूंकि कुछ लोगों की रिसर्च के हिसाब से 9 तारीख है, कुछ के हिसाब से 11 है, लेकिन ज़्यादातर रिसर्च करने वालों ने 12 तारीख हीबताया है इसीलिए लोग इसी तारीख को पैदाइश मानते हैं

12 Wafat Ka Kya Matlab Hai ? 12 वफ़ात का क्या मतलब है ?

इसका मतलब है कि 12 रबीउल अव्वल ( 12 Rabi-Ul-Awwal) को ही हमारे नबी वफ़ात पा गए, और इस दुनिया से पर्दा फरमा गए, यानि इस फ़ानी दुनिया से उस दुनिया की तरफ़ तशरीफ़ ले गए जो हमेशा रहने वाली है, और जहाँ अल्लाह तआला ने अपने दीदार का वादा फरमाया है, इसी लिए लोग इसदिन को 12 वफ़ात ( 12 Wafat ) भी कहते हैं

Eide Miladun Nabi Manana Jayez Hai Ya Najayez ? ईदे मीलादुन नबीजाएज़ या नाजायेज़ 

कुछ लोग कहते हैं कि ईदे मीलादुन नबी मनाना चाहिए कुछ लोग कहते हैं कि नहीं, मेरा ख्याल है कि मनाना हर किसी को चाहिए, हाँ वो मनाने का तरीक़ा क्या हो, नीचे हम दो तरह के लोगों के मनाने का तरीक़ा बता रहे हैं आप ख़ुद फ़ैसला कीजिये कि कैसे इस मुबारक दिन को मनाया जाये और कौन से लोग इन में ज़्यादा बेहतर हैं

मीलादुन नबी मनाने वालों की पहली क़िस्म

  • अपने घर पर झन्डा लगा लेना
  • जुलूस में चले जाना
  • अपने घरों को रौशन करना
  • नबी की याद में मेला लगाना
  • और मेलों में औरतों और मर्दों का बेपर्दा घूमना

मीलादुन नबी मनाने वालों की दूसरी क़िस्म

  • कोई सुन्नत जिंदा करना, यानि जिस सुन्नत पर अभी तक अमल नहीं किया था उसपर अमल करने का इरादा करना
  • जितना हो सके नबी के काम को आगे बढ़ाने का इरादा करना
  • नबी की ज़िन्दगी पर कोई बयान या कोई किताब पढ़ना
  • दीन की राह में नबी पर आई तमाम मुश्किलों को याद करना
  • नबी के तमाम हुक्मों पर अमल करने का तहय्या करना
  • इस दिन आस पास के ग़रीबों की मदद करना
  • पूरा दिन दुरूद शरीफ़ पढ़ने और इबादत में गुजारना

इसके अलावा और भी बहुत सारी चीज़ें हो सकती हैं आप ख़ुद बताएं कि आप किसी पर अमल करने को तैयार हैं

नीचे 3 तरह के लोग हैं जिनमें आप अपने आप को तलाशें

1.  एक वो शख्स है जिस ने पूरे साल सिवाए जुमा नमाज़ के कोई नमाज़ नहीं पढ़ी और न ही अपनी ज़िन्दगी में नबी की किसी सुन्नत का ख्याल रखा, लेकिन वो जुलूस में गया और ईदे मीलादुन नबी को बड़े जोर शोर से मनाया फ़िर उस के बाद नबी को भूल गया

2.  दुसरा वो शख्स जो नमाज़ तो पढता है, ईदे मीलादुन नबी भी मनाता है लेकिन जो नबी का मिशन है उस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कुछ सोचता भी नहीं जैसे नबी के बाद लोगों तक सही बात पहुचाने के लिए सहाबा ने अपनी जानें तक दे दीथीं, लेकिन इस शख्स ने सिर्फ़ ख़ुद से मतलब रखा, और अपने आपको नबी का सच्चा पैरूकार बताता रहा

3.  तीसरा वो शख्स है जो नबी की ज़िन्दगी को सिर्फ़ एक दिन के लिए नहीं बल्कि साल के हर दिन, हर वक़्त, नबी की सुन्नतों पर चलने की कोशिश करता है, और नबी के मिशन को आगे बढ़ाने की हर मुमकिन कोशिश करता है और 12 रबीउल अव्वल को इबादत में गुज़ारता है जैसे कि

अल्लाह के रसूल (सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम) दोशम्बा ( Monday ) को रोज़ा रखते थे तो सहाबा ने पुछा कि आप इस दिन रोज़ा क्यूँ रखते हैं तो आप न्र फ़रमाया कि : इस दिन मेरी पैदाइश हुई थी’

यानि नबी अपनी पैदाइश के दिन रोज़ा रखते थे और इबादत करते थे, इसलिए ये शख्स उस दिन को इबादत का दिन का करार देता है, और इस दिन तय करता है कि जिन सुन्नतों पर अब तक अमल नहीं किया था, उन सुन्नतों पर अमल करूंगा और अपनी ज़िन्दगी को इस्लाम के मुताबिक़ और ज़्यादा बेहतर बनाने की कोशिश करूंगा

अल्लाह तआला हम सबको हमारे नबी की सुन्नतों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए

और इस्लाम को बलंदी अता फरमाए 

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5 Comments on “Eid-e-Miladun Nabi (12 Rabi-Ul-Awwal) Kya Hai ? ईदे मीलादुन नबी और रबीउल अव्वल क्या है ?”

    1. Thnx for this
      Allah hum sab ko kehne sunne se Zyda Amal karne ki tofeeq Ada farmay
      Ameen
      Summa ameen

  1. 12 Rabi ul Awal miladun Nabi Ki article padha kar bahut hi Achcha Laga Hai. Allah Sabko Khush Rakhe.

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