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Surah Kausar Ke Benefits | Surah Kausar Ke Fayde | सूरह कौसर के 5 फ़ायदे

surah kausar ke benefits in hindi

Surah Kausar Ke Benefits | Surah Kausar Ke Fayde |

सूरह कौसर के 5 फ़ायदे

आप ने नमाज़ में सूरह कौसर यानि (इन्ना आतैना कल कौसर) बार बार पढ़ी होगी और सुनी होगी क्यूंकि ये क़ुरान की सब से छोटी सूरह है और इस में सिर्फ़ तीन ही आयतें हैं इसलिए हर कोई इसे आसानी से याद कर लेता है, तो अब हम यहाँ पर सूरह कौसर के 5 फ़ायदे ( Surah Kausar Ke Benefits ) बयान करेंगे जिसमें आप अपनी ज़िन्दगी का हल तलाश सकते हैं अगर आप बताये गए तरीके से पढ़ें

surah kausar

1. तंगदस्ती और रिज्क़ और रोज़ी की परेशानी दूर करने के लिए

दो रकात सलातुल हाजत की नियत से नफ्ल नमाज़ पढ़े, और हर रकात में सूरह फ़ातिहा ( अलहम्दु शरीफ़ ) के बाद 7 बार सूरह कौसर पढ़े और फिर सलाम फेरने के बाद ये दुआ 11 बार पढ़े “ अल्लाहुम्मक फ़िनी बि हलालिका अन हरामिका व अग्निनी बि फ़द्लिका अम्मन सिवाक “ इसके बाद फिर अल्लाह से अपनी तंगी दूर करने और खैर व बरकत का सवाल करे और दुआ करे और ऐसा 41 दिन तक पाबंदी से करता रहे

इंशाअल्लाह ऐसा खैर कसीर हासिल होगा कि घर में ख़ुशहाली का दस्तरख्वान बिछ जायेगा

2. सर दर्द ठीक करने के लिए

तमाम दवाओं और टोटकों के बाद भी सर में दर्द न जाता हो तो सूरह कौसर 7 बार खुद पढ़ कर दम कर ले या कोई दूसरा आदमी मरीज़ पर दम कर दे, ऐसा दो तीन बार कर देने से हर तरह का सर दर्द ख़त्म हो जायेगा, इंशाअल्लाह

3. पेट दर्द ठीक करने के लिए ( ख़ास कर अल्सर के मरीज़ )

अगर किसी के पेट में दर्द हो या पेट की एक ख़ास बीमारी अल्सर हो जाती है, जिससे पेट में जलन बनी रहती है, तो उस से नजात पाने लिए एक चुटकी नमक ले और 7 बार सूरह कौसर पढ़ कर उस पर दम कर दे, और फिर उसे चाट ले या अगर किसी मरीज़ को दम करके देदे और वो उसे चाट ले, ( जैसे एक बार सुबह और एक बार शाम को चाट ले ) तो इंशाअल्लाह दो तीन दिन में ही पेट की तकलीफ़ दूर हो जाएगी

4. दुश्मन के ज़ुल्म से बचने के लिए

कोई दुश्मन हो या दुश्मनों का गिरोह हो और वो नुकसान पहुँचाने की प्लानिंग कर रहे हों या सताते रहते हों तो ऐसे लोगों से बचने के लिए 41 बार सूरह कौसर पढ़ें और 21 दिन तक रोज़ाना करते रहें इंशाअल्लाह दुश्मन खुद मुश्किल का शिकार हो जायेंगे और सताने से बाज़ रहेंगे

5. हर तरह के फ़ायदे और नफ़े के लिए

कोई शख्स अगर सूरह कौसर को 313 बार रोज़ाना पढता है, तो किसी किस्म की बीमारी हो, किसी किस्म की ज़रुरत हो, या कैसा भी कोई अंदरूनी या बाहरी दुश्मन हो हर हर बीमारी और तकलीफ़ से अल्लाह महफूज़ रखेंगे, और तमाम जाएज़ ज़रूरतें पूरी करेंगे

और इस में अपनी भी नियत कर सकते हैं अपने बीवी बच्चों की भी नियत कर सकते हैं अपनी नस्लों की भी नियत कर सकते है और सब को इस वजीफे का फ़ायदा पहुंचा सकते हैं

पढने का तरीक़ा

दुरूद शरीफ़

सूरह कौसर 313 बार

दुरूद शरीफ़

फिर अल्लाह से दुआ

बहुत ही मुफीद वजीफा है

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