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Surah Alaq (Iqra Bismi Rabbikal Lazi) Hindi Translation | सूरह अलक़

Surah Alaq hindi

Surah Alaq (Iqra Bismi Rabbikal Lazi) Hindi Translation

सूरह अलक़

ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

 

  1. इक़रअ बिस्मि रब्बिकल लज़ी खलक

अपने परवरदिगार के नाम से पढ़िए जिस ने (सब कुछ) पैदा किया है

  1. खलाक़ल इंसाना मिन अलक़

उस ने इंसान को जमे हुए खून से पैदा किया है

  1. इक़रअ व रब्बुकल अकरम

पढ़िए, और आपका रब बड़ा करम करने वाला है

  1. अल्लज़ी अल्लमा बिल क़लम

जिस ने क़लम के ज़रिये तालीम दी

  1. अल्लमल इंसान मालम यअ’लम

इन्सान को वो सिखाया जो वो नहीं जानता था

  1. कल्ला इन्नल इंसाना लयत्गा

ख़बरदार ! इन्सान ही है जो सरकशी कर रहा है

  1. अर रआहुस तग्ना

इसलिए कि उसने अपने आप को बेनियाज़ समझ लिया है

  1. इन्ना इला रब्बिकर रुज आ

यक़ीनन सब को आप के परवरदिगार की तरफ ही लौट कर जाना है

  1. अरा अय्तल लज़ी यन्हा

आप ने उस को देखा जो रोकता है

  1. अब्दन इज़ा सल्ला

एक बन्दे को जब वो नमाज़ पढता है

  1. अरा अयता इन काना अलल हुदा

भला बताइए अगर वो हिदायत पर होता

  1. अव अमरा बित तक्वा

या तक्वा की बात कहता

  1. अरा ऐता इन कज्ज़बा व तवल्ला

भला बताइए अगर उसने झुटलाया और मुंह मोड़ा

 

  1. अलम यअलम बिअन्नल लाहा यरा

क्या उस ने नहीं जाना कि अल्लाह उस को देख रहा है

  1. कल्ला लइल लम यन्तहि लनस फ़अम बिन नासियह

ख़बरदार अगर वो बाज़ न आये तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर घसीटेंगे

  1. नासियतिन काज़िबतिन खातिअह

वो पेशानी जो झूटी है गुनाहगार है

  1. फ़ल यद्उ नादियह

वो अपने हम नशीनों को भी बुला ले

  1. सनद उज़ ज़बानियह

हम दोज़ख़ के फरिश्तों को बुला लेंगे

  1. कल्ला ला तुतिअहु वस्जुद वकतरिब

उस की बातों में मत आइये और सजदे किये जाइए और करीब होते जाइए

Surah Alaq hindi

Iqra Bismi Rabbikal Lazi (Surah Alaq) Ki Tafseer

ये सूरह कब नाजिल हुई ?

हमारे नबी स.अ. तन्हाई को पसंद करते थे, इसीलिए ग़ारे हिरा में जाकर कई कई दिनों तक अल्लाह तआला के बारे में गौर व फ़िक्र किया करते थे, (ग़ारे हिरा काबे शरीफ़ से दो मील दूर एक गुफ़ा है) एक दिन उसी ग़ार में आप मौजूद थे कि हज़रत जिबरइल अलैहिस सलाम तशरीफ़ लाये और कहा पढ़िए, तो नबी स.अ. ने फ़रमाया : मैं पढ़ा हुआ नहीं हूं ( यानि मैं लिखा हुआ पढ़ नहीं पाता ) हज़रत जिबराइल अ.स. ने अपने सीने से लगाकर भींचा, फिर दोबारा आप से पढने को कहा, आपने फिर वही जवाब दिया, फिर तीसरी बार आप से पढने को कहा तो फिर आपने वही जवाब दिया, तो हज़रत जिबराइल अ.स. ने और इस सूरह की शुरूआती पांच आयतें पढ़ीं

  1. अपने परवरदिगार के नाम से पढ़िए जिस ने (सब कुछ) पैदा किया है
  2. उस ने इंसान को जमे हुए खून से पैदा किया है
  3. पढ़िए, और आपका रब बड़ा करम करने वाला है
  4. जिस ने क़लम के ज़रिये तालीम दी
  5. इन्सान को वो सिखाया जो वो नहीं जानता था

ये वो पांच आयतें हैं जो नबी स.अ. पर उतरीं और इन आयातों कई चीज़ें हैं जो हमें जाननी चाहियें

पहली ये कि अल्लाह तआला ने पहली उतारी गयी इन आयतों में पढने का हुक्म दिया, और उसके साथ तालीम और क़लम का ज़िक्र किया इस से तालीम की अहमियत मालूम होती है |

दुसरी ये कि अपने रब के नाम से पढ़िए इस में इस बात की तरफ इशारा है कि इंसान के लिए वही इल्म नफाबख्श होता है जिस का रिश्ता अल्लाह से जुड़ा होता है, और जिस इल्म का रिश्ता अल्लाह से जुड़ा न हो उससे दुनिया तो कमाई जा सकती है लेकिन इंसानियत का कोई भला नहीं हो सकता |

तीसरी बात ये मालूम हुई कि हर अच्छे काम को अल्लाह के नाम से शुरू करना चाहिए

चौथी ये कि क़लम की अहमियत मालूम हुई कि क़लम ही इल्म का सब से बड़ा जरिया है

अल्लाह ने नबी स.अ. को क्यूं लिखना नहीं सिखाया था ?

हमारे नबी स.अ. को अल्लाह ने लिखना नहीं सिखाया था ताकि लोगों को ये कहने का मौक़ा न मिले कि आप ने किसी किताब को पढ़कर खुद से कुराने मजीद लिख दिया, लेकिन हाँ लिखने की हौसलाअफजाई फरमाई है, कुराने मजीद जो भी अल्लाह की जानिब से नाज़िल होता था आप स.अ. सहाबा से लिखवाया करते थे | अल्लाह तआला ने अपने नबी को खुद अपनी तरफ से वो इल्म अता फ़रमाया जिस से दुनिया क़यामत तक फायदा उठाती रहेगी |

बाक़ी सूरतें यानि 6 से लेकर आख़िर तक अबू जहल के बारे में नाज़िल हुईं वो अबू जहल जो शुरू से ही इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन था हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास से मरवी है कि नबी स.अ. मक़ामे इब्राहीम के पास नमाज़ पढ़ रहे थे कि अबू जहल वहां से गुज़रा तो उस ने कहा : ए मुहम्मद ! क्या मैंने तुम को इस से मना नहीं किया था तो अल्लाह के रसूल ने भी जवाब दिया फिर अबू जहल ने कहा : तुम मुझे किस बात से धमकाते हो ? इस वादी में सब से बड़ी सेना मेरी है तभी ये इरशाद हुआ कि वो भी अपने मददगारों को बुला लें हम भी दोज़ख़ के फरिश्तों को बुला लेंगे |

आख़िर में आप स.अ. को तलकीन की गयी है लोगों की बातों में न आयें बल्कि सजदा करते रहें और सजदे से मतलब नमाज़ है |

कुरान के इस पैग़ाम को लोगों तक पहुँचाने में हमारी मदद करें |

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