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Sajda-e-Sahw kya hai | नमाज़ में ग़लती पर सज्द-ए-सह्व कब और कैसे किया जाता है ?

sajdaye sahw

Sajda-e-Sahw kya hai

नमाज़ में ग़लती पर सज्द-ए-सह्व कब और कैसे किया जाता है ?

आप जब इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ते हैं तो आप ने देखा होगा कि जब इमाम को कोई भूल चूक होती है तो वो आख़िरी रकात में अत तहिय्यात पढ़ कर दो सजदे करता है ताकि उस ग़लती भरपाई हो जाये और नमाज़ दोहरानी न पड़े, तो जान लीजिये कि उन दो सजदों को सज्द-ए-सह्व कहते हैं |

लेकिन क्या वाक़ई आप को पता है कि कौन सी ग़लती होने पर दो सजदे ( यानि सज्द-ए-सह्व ) कर लेने से नमाज़ हो जाती है  तो एक बात जान लें कि नमाज़ के फ़र्ज़ ( यानि नमाज़ में जो चीज़ें फ़र्ज़ है ) वो अगर छूटेंगे तो नमाज़ दोहरानी पड़ेगी लेकिन अगर वाजिब छूट गया तो सिर्फ़ सज्द-ए-सह्व कर लें तो नमाज़ हो जाएगी |

नीचे 5 वजह दी गयी हैं जो आप को बताती हैं कि कब सज्द-ए-सह्व वाजिब हो जाता है उनको आप गौर से पढ़ लें और समझ लें

सह्व का क्या मतलब है ?

सह्व का मतलब है “भूल जाना” सजद-ए-सह्व का मतलब भूल जाने वाला सज्दा

सज्द-ए-सह्व कब और कैसे किया जाता है ?

इसका तरीक़ा ये है कि क़अद-ए-अखीरा में ( यानि दो रकात वाली नमाज़ में दूसरी रकात और चार रकात वाली नमाज़ में चौथी रकात में अत तहिय्यात पढ़ लेने के बाद दायीं तरफ़ एक सलाम फेर कर दो सजदे करें, और उस के बाद बैठ कर अत तहिय्यात पढ़ें फिर दुरूद शरीफ़ और दुआए मसूरा पढ़ कर सलाम फेरें

सज्द-ए-सह्व कब वाजिब होता है ?

1. किसी फ़र्ज़ या वाजिब अमल को अपनी अस्ल जगह से आगे कर देना

जैसे किरत से पहले रुकू कर लेना या सूरह फ़ातिहा पढ़ने से पहले ही कोई और सूरह मिला लेना

2. किसी फ़र्ज़ या वाजिब अमल को अपनी अस्ल जगह से पीछे कर देना

जैसे पहली रकात में एक सज्दा भूल गया और दूसरी रकात में याद आने पर पहला सज्दा मिलाकर तीन सज्दे कर लिए

इस पॉइंट्स के कुछ मसाइल

• सूरह फ़ातिहा के बजाये भूल से कोई और सूरह शुरू कर दी

अगर शुरू में सूरह फ़ातिहा पढ़ना भूल गया और कोई दूसरी सूरह शुरू कर दी फिर याद आया तो अब उसे चाहिए कि सूरह फ़ातिहा पढ़ कर फिर कोई और सूरह मिलाये और अखीर में सज्द-ए-सह्व करे

• क़अदह में अत तहिय्यात से पहले कुछ और पढ़ना

बैठते ही अत तहिय्यात पढ़ना वाजिब है अगर शुरू करने पहले कुछ और पढ़ लिया तो देर करने की वजह से सज्द-ए-सह्व वाजिब है

3. किसी फ़र्ज़ या वाजिब का तकरार करना

जैसे एक रकात में सज्दे तीन कर लिए या रुकू दो कर लिए

4. किसी वाजिब की सिफ़त को बदल देना

जैसे जहरी ( जिन नमाज़ों में ज़ोर से पढ़ा जाता है ) नमाज़ में इमाम ने आहिस्ता किरत कर दी या सिर्री नमाज़ में ( जिन नमाज़ों में धीरे से किरत की जाती है ) उस में ज़ोर से किरत कर दी

5. किसी वाजिब को छोड़ देना

जैसे सूरह फ़ातिहा छूट गयी या दुआए क़ुनूत पढ़ना भूल गया

• अत तहिय्यात का कुछ हिस्सा छूट गया तो.. ?
अगर अत तहिय्यात का कुछ हिस्सा पढने से रह गया यानि आधा अत तहिय्यात पढ़ा और आधा छोड़ दिया तो सज्द-ए-सह्व करना ज़रूरी है

• अगर किसी ने जान बूझ कर कोई वाजिब छोड़ा हो तो…?
अगर किसी शख्स ने जान बूझ कर नमाज़ में किसी वाजिब को छोड़ दिया तो वो नमाज़ लौटानी पड़ेगी सिर्फ सज्द-ए-सह्व काफ़ी नहीं होगा |
• क़अद-ए-ऊला में अत तहिय्यात के बाद भूल से दुरूद पढ़ लिया तो…?
अगर क़अद-ए-ऊला में अत तहिय्यात के बाद भूल से दुरूद शरीफ़ पढ़ना शुरू कर दिया और “वअला आलि मुहम्मद” तक पढ़ लिया तो सज्द-ए-सह्व वाजिब होगा |

 

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