Roze Ki Halat Me Injection Ya Drip Lagwana?
रोज़े में इंजेक्शन, ड्रिप लगवाना कैसा है?
Roze Ki Halat Me Injection Ya Drip Lagwana? हम रमज़ान के रोज़े बड़े शौक़ और अक़ीदत के साथ रखते हैं, लेकिन कभी कभार रमज़ान के महीने में बीमारी या किसी मेडिकल एमरजेंसी की वजह से हमारे सामने कई सवाल खड़े हो जाते हैं। जैसे रोज़े की हालत में क्या हम इंजेक्शन लगवा सकते हैं? ब्लड टेस्ट का क्या हुक्म है? क्या सांस के मरीज़ इन्हेलर ले सकते हैं?
तो इसीलिए आज की इस खास पोस्ट में हम आपके इसी तरह के 10 ज़रूरी सवालों के जवाब लेकर आए हैं, ताकि आपके ज़हन में कोई शक न रहे, और आप पूरे इत्मीनान के साथ अपनी इबादत मुकम्मल कर सकें। तो चलिए एक-एक करके इन्हें समझते हैं:
1. रोज़े में खून देना (Blood Donation)
अक्सर लोगों को लगता है कि शरीर से खून निकलने पर रोज़ा टूट जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। रोज़े के दौरान अगर किसी मरीज़ को खून देने की ज़रूरत पड़ जाए तो खून देना बिल्कुल जायज़ है, इससे आपका रोज़ा नहीं टूटेगा | क्यूंकि अल्लाह की राह में या किसी की जान बचाने के लिए खून देना एक नेक काम है, और ये रोज़े को बातिल नहीं करता।
तो अगर कोई रोज़ेदार अपने बदन से खून किसी को देने के लिए या ब्लड टेस्ट करवाने के लिए निकलवाए, तो इससे रोज़ा नहीं टूटता । इस्लाम आसानी का दीन है। कुरआन में अल्लाह तआला फरमाते हैं कि अल्लाह तुम्हारे लिए आसानी चाहते हैं, तंगी नहीं।
ध्यान रहे: हाँ, इतना ज़्यादा खून देना कि जिससे रोज़ेदार को खुद बहुत कमज़ोरी हो जाए, ये मकरूह (नापसंदीदा) है । लेकिन रोज़ा फिर भी नहीं टूटेगा।
2. मरीज़ को खून चढ़वाना (Receiving Blood)
अगर आप बीमार हैं और आपको खून की सख्त ज़रूरत है, तो इस्लाम इसमें पूरी सहूलियत देता है। इसलिए अगर रोज़े के दौरान किसी मरीज़ को खून चढ़वाने की ज़रूरत पेश आए, तो वह चढ़वा सकता है इससे रोज़ा नहीं टूटेगा । क्योंकि इसमें खून नस के ज़रिए जिस्म में दाखिल हो रहा है, जो कि किसी चीज़ के मुँह से खाने या पीने के ज़ुम्रे में नहीं आता।
3. ब्लड टेस्ट के लिए सैंपल देना
आजकल बीमारियों का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट बहुत आम हैं। तो अगर कोई रोज़े से है और टेस्ट करवाना पद गया तो इसके के लिए खून का नमूना (सैंपल) देना चाहे तो दे सकते हैं । इससे भी रोज़ा नहीं टूटता, अगर डॉक्टर ने लैब टेस्ट का कहा है? तो बे-फ़िक्र होकर जाएँ तो रोज़ा सलामत रहेगा।
4. बीमारी के लिए इंजेक्शन (Injection) लगवाना
अब आता है वो सवाल जो अक्सर पूछा जाता है कि रोज़े की हालत में इंजेक्शन लगवा सकते हैं या नहीं? और इसको लेकर बहुत से लोग ग़लतफ़हमी के शिकार हैं तो आज हक़ीक़त जान लें कि रोज़े में किसी भी बीमारी के इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाना पूरी तरह जायज़ है । चाहे ये इंजेक्शन पट्टे (मांसपेशी/Muscle) में लगवाया जाए या रग (नस/Vein) के अंदर, दोनों ही सूरतों में रोज़ा नहीं टूटेगा । क्योंकि रोज़े की शर्त ये है कि कोई चीज़ मेदे तक न पहुँचे और इन्जेक्शन में ऐसा नहीं होता।
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5. ताक़त का इंजेक्शन लगवाना
इंजेक्शन किसी मर्ज़ (बीमारी) के लिए हो या ताक़त के लिए, दोनों ही सूरतों में रोज़ा नहीं टूटेगा । लेकिन यहाँ एक बात ज़रूर समझ लें कि जो बीमार हो और कमज़ोरी ज़्यादा हो और डॉक्टर ने कहा हो कि ताक़त का इंजेक्ज़शन देना पड़ेगा तो सही है, वरना कोई अगर इसलिए इंजेक्शन लगवा रहा हो कि कमज़ोरी महसूस न हो, रोज़े का एहसास न हो, या भूख महसूस न हो, तो यह मकरूह अमल (नापसंदीदा) है । लेकिन फिर भी रोज़ा नहीं टूटेगा ।लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है इससे इबादत की रूह यही है कि हम भूख-प्यास के एहसास को समझें।
6. कमज़ोरी में ड्रिप (IV Drip) लगवाना
अगर कोई मरीज़ कमज़ोर या बीमार है, तो वह रोज़े की हालत में ड्रिप लगवा सकता है । इस ड्रिप में मुख्तलिफ (अलग-अलग) किस्म के इंजेक्शन भी डाले जा सकते हैं ।
लेकिन बिना किसी सख्त मेडिकल ज़रूरत के, सिर्फ कमज़ोरी को दूर करने के लिए ड्रिप लगवाते रहना मकरूह और गैर-मुनासिब है और इबादत की रूह ख़त्म हो जाती है । लेकिन , इससे भी रोज़ा नहीं टूटेगा ।
7. दमे के मरीज़ों के लिए इन्हेलर (Inhaler) का इस्तेमाल
सांस और दमे (Asthma) के मरीज़ों को इस मसले पर खास ध्यान देना चाहिए। दमे के मरीज़ के लिए रोज़े के दौरान इन्हेलर के इस्तेमाल से रोज़ा टूट जाएगा । इसकी वजह यह है कि इसमें दवाई होती है, जो पंप करने की सूरत में हलक (गले) के अंदर जाती है । इसलिए रोज़ा टूट जायेगा और क़ज़ा करना पड़ेगा ।
इसलिए ऐसे अफ़राद जब तक मुमकिन हो, इन्हेलर के इस्तेमाल के बगैर रोज़ा रखें । लेकिन अगर ऐसा करना मुमकिन न हो और सांस उखड़ रही हो इन्हेलर के बगैर काम न चल पा रहा हो, तो रोज़ा छोड़ दें और बाद में इस रोज़े की क़ज़ा कर लें ।
8. कोरोना (COVID) टेस्ट और वैक्सीन
कोरोना का टेस्ट करवाने से रोज़ा नहीं टूटता । इसी तरह कोरोना वैक्सीन, जो इंजेक्शन के ज़रिए लगाई जाती है, अगर ये लगवानी पड़े तो इससे भी रोज़ा नहीं टूटता ।
9. एनिमा (Enema) करवाना
कभी-कभी किसी ज़रूरत की वजह से शर्मगाह की जगह से दवाई अंदर दाखिल की जाती है, जिसे एनिमा कहते हैं, तो अगर ऐसा रोज़े की हालत में किया तो इससे रोज़ा टूट जायेगा, और बाद में इसकी क़ज़ा करनी होगी ।
10. सांस लेने के लिए ऑक्सीजन (Oxygen) लगाना
रोज़े की हालत में अगर सिर्फ ऑक्सीजन लिया जाए और इसके साथ कोई और दवा शामिल न हो, तो रोज़ा नहीं टूटेगा । लेकिन अगर इस ऑक्सीजन के साथ दवा भी शामिल हो (जैसे नेबुलाइज़र में होता है), तो इससे रोज़ा टूट जाएगा, चाहे दवा के मामूली से अज्ज़ा (कण) ही उसमें क्यों न हों,
अल्लाह तआला हम सबके लिए आसानी फ़रमाए |
