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Namaze Istikhara Kaise Padhen | नमाज़े इस्तिखारा कैसे पढ़ें ?

namaze istikhara kaise padhen

Namaze Istikhara Kaise Padhen

नमाज़े इस्तिखारा कैसे पढ़ें ?

अगर आप इन्सान हैं तो इस में कोई शक नहीं है कि आप अक्सर कई कामों में उलझ जाते होंगे और कन्फ्युज़ हो जाते होंगे क्या करूँ और क्या न करू, जैसे आप अपनी शादी करने जा रहे हों या अपने बच्चों की, तो आप की समझ में नहीं आता कि इस जगह से करूं या न करू

अगर आप कहीं जॉब करना चाहते हैं, किसी काम को इख्तियार करना चाहते हैं, या ज़िन्दगी का कोई अहम् फैसला करना चाहते हैं लेकिन आप ऐसे दोराहे पर आकर खड़े हैं कि समझ नहीं आ रहा इस तरफ़ जाऊं या इस तरफ जाऊं, तो ऐसी उलझन में आप किसी न किसी से मशवरा करते हैं और उसका हल तलाश करते हैं

इन सारी उलझनों से निकलने के लिए क्यूँ न आपको मैं एक ऐसा हल बताऊँ जिसको आपने अगर सही तरीक़े से किया तो आपके मसअले का हल भी निकल आएगा, और आपका ये अमल इबादत में शामिल हो जायेगा, और जो काम आप करने जा रहे हैं उस में बुराई के बजाये भलाई का दबदबा रहेगा |

नमाज़े इस्तिखारा | Namaze Istikhara

वो हल है नमाज़े इस्तिखारा ( Namaze Istikhara ) यानि इस्तिखारे की नमाज़ पढ़ना, और नमाज़ पढ़ कर अल्लाह तआला से सही रहनुमाई चाहना अब चूंकि हम खैर और भलाई चाह रहे हैं और भलाई अल्लाह के हाथ में है तो क्यूँ न अल्लाह से ही दुआ की जाये कि जिस में खैर हो वो हमें अता फरमा दे, और जब हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने सहाबा को ख़ुद इस नमाज़ की अहमियत बताई है तो क्यों न हम इसका फ़ायदा उठायें |

इस्तिखारा का मतलब क्या होता है ?

इस्तिखारा का मतलब होता है अल्लाह तआला से खैर और भलाई को तलब करना

नमाज़े इस्तिखारा का तरीक़ा क्या है ?

दो रकात नमाज़ नफ्ल की नियत से पढ़ना और नमाज़ के बाद नीचे बताई गयी दुआ पढ़ना

Namaze Istikhara Kaise Padhen

Namaze Istikhara Ki Dua | इस्तिखारा करने की दुआ

अलाहुम्मा इन्नी अस तखीरुका बिइल्मिका, व अस्तक़ दिरुका बिकुद रतिका, वअस अलुका मिन फ़द्लिकल अज़ीम, फ़इन्नका तक़दिरू वला अक़दिरू, वतअ’लमु वला अअ’लमु, व अन्ता अल्लामुल गुयूब, अल्लाहुम्मा इन कुन्ता तअ’लमु अन्ना हाज़ल अमरा खैरुल ली फ़ी दीनी व म आशी व आकिबति अमरी, अव क़ाला आजिलि अमरी व आजिलिही, फ़क़दुरहु ली वयस सिरहु ली, सुम्मा बारिक ली फ़ीहि, वइन कुन्ता तअ’लमु अन्ना हाज़ल अमरा  शररुल ली फ़ी दीनी व म आशी व आकिबति अमरी अव क़ाला आजिलि अमरी व आजिलिही, फ़स रिफ्हू अन्नी वस रिफनी अन्हु, वक़दिर लियल खैरा हैसु काना सुम्मा रद्दिनी बिही

नोट : ऊपर रेड निशान अन्ना हाज़ल अमरा पर जब आयें तो अपनी जिस ज़रुरत के लिए नमाज़ पढ़ रहे हैं वो अपने ज़हन में ले ए या जुबान से कह लें

तर्जुमा : ए अल्लाह मैं आप के इल्म के ज़रिये खैर का तालिब हूँ, और आप की क़ुदरत से ताक़त हासिल करना चाहता हूँ, और आप के फजले अज़ीम का सवाल करता हूँ, बेशक आप क़ादिर हैं और मैं क़ुदरत नहीं रखता, और आप को इल्म है कि मैं ला इल्म हूँ, और आप छिपी हुई बातों से अच्छी तरह जानते हैं ए अल्लाह अगर आप के इल्म के मुताबिक़ ये काम मेरे हक़ में दीनी या दुनयवी एतबार से बेहतर है तो उसे मेरे लिए मुक़द्दर फरमा दीजिये,फिर मुझे उस अमल से राज़ी कर दीजिये

नमाज़े इस्तिखारा में कौन सी सूरतें पढ़ें ?

कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं हाँ, बेहतर है कि पहली रकात सूरह काफ़िरून और दूसरी में सूरह इख्लास पढ़ें

इस्तिखारे की नमाज़ किस वक़्त पढ़ें ?

नमाज़े इस्तिखारा के लिए कोई वक़्त मुक़र्रर नहीं है, मकरूह वक़त को छोड़ कर दिन और रात में किसी भी वक़्त पढ़ सकते हैं

इस्तिखारा कितनी बार किया जाये ?

बेहतर है कि इस्तिखारा सात दिन तक किया जाये और अगर सात दिन में किसी एक फ़ैसले की  तरफ झुकाव न हो तो मुसलसल करता रहे

इस्तिखारा के बाद सही फैसले का पता कैसे चलेगा ?

हो सकता है आपको ख्व़ाब में सही रास्ता की तरफ इशारा किया जाये लेकिन ये कोई ज़रूरी नहीं है बल्कि देखा ये जायेगा कि जिस चीज़ के लिए मैं इस्तिखारा कर रहा हूँ दिल का झुकाव उधर हैं या नहीं अगर है तो उस पर अमल किया जाये अगर नहीं तो छोड़ दिया जाये, या अगर दो चीज़ें हैं जिसमें एक का फैसला करना है तो इस्तिखारे के बाद दिल का झुकाव जिस तरफ ज़्यादा हो बस उसी पर अमल कर लिया जाये |

अगर दो रकात पढ़ने का वक़्त नहीं है तो….

कभी कभार इन्सान मुश्किल में फंस जाता है और उसे तुरन्त फ़ैसला करना होता है यहांतक कि उस के पास इतना वक़्त भी नहीं होता कि दो रकात नफ्ल अदा करे तो ऐसे में हुज़ूर सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम ने ये दुआएं फरमाई हैं

पहली दुआ

अल्लाहुम्मा खिर ली वख़ तिरली

ए अल्लाह मेरे आप पसंद फरमा दीजिये, मुझे कौन सा रास्ता इख्तियार करना चाहिए

दूसरी दुआ

अल्लाहुम्मह दिनी वसद दिदनी

ए अल्लाह मुझे सही हिदायत फ़रमाइए, और मुझे सीधे रास्ते पर रखिये

अल्लाह तआला हम सबको इस नमाज़ के ज़रिये सही रहनुमाई की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए

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