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Mufti Shamail Nadvi | मुफ़्ती शमाइल नदवी की फाउंडेशन और टॉप कोर्सेज

Mufti Shamail Nadvi

Mufti Shamail Nadvi |

मुफ़्ती शमाइल नदवी की फाउंडेशन और टॉप कोर्सेज

मुफ़्ती शमाइल नदवी: इस्लाम, तर्क और साइंस की नई आवाज़

आज के दौर में जब सोशल मीडिया पर मज़हबी बहसें अक्सर शोर-शराबे और जज़्बात में खो जाती हैं, तब एक युवा चेहरा स्टेज पे उभरता है, जो दलील (Logic), साइंस और सुकून के साथ बात करता है। यह नाम है मुफ़्ती शमाइल नदवी (Mufti Shamail Nadvi)। अगर आप इस्लाम, नास्तिकता (Atheism) और  विज्ञान के बीच के रिश्तों को समझना चाहते हैं, तो मुफ़्ती शमाइल नदवी का नाम आपके लिए अनजान नहीं होगा।

लेकिन, आखिर यह शख्सियत कौन है? उनकी तालीम कहाँ हुई और क्यों आज का नौजवान उन्हें इतनी संजीदगी से सुन रहा है? इस आर्टिकल में हम जानेंगे  मुफ़्ती शमाइल नदवी के सफर, उनकी सोच और उनके मिशन के बारे में।

कौन हैं मुफ़्ती शमाइल नदवी? (Who is Mufti Shamail Nadvi?)

मुफ़्ती शमाइल नदवी सिर्फ एक रस्मी मौलाना या मुफ़्ती नहीं हैं, बल्कि वह इस दौर के एक ऐसे इस्लामिक स्कॉलर (Islamic Scholar) हैं, जो सवालों से डरते नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह इस्लाम को सिर्फ रस्मों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे अक़्ल और तर्क की कसौटी पर समझाते हैं। नास्तिकता (Atheism) और साइंस के दौर में, जब सवाल मुश्किल होते जा रहे हैं, मुफ़्ती शमाइल अपनी ठहरी हुई आवाज़ और मज़बूत दलीलों से उन सवालों का जवाब देते हैं।

Mufti Shamail Nadvi

शुरुआती ज़िंदगी और पारिवारिक माहौल

मुफ़्ती शमाइल नदवी का असल नाम शमाइल अहमद अब्दुल्ला है। उनका जन्म 7 जून 1998 को कोलकाता में हुआ। कहा जाता है कि इंसान पर उसके माहौल का गहरा असर होता है। मुफ़्ती शमाइल का ताल्लुक एक इल्मी घराने से है। उनके वालिद, मौलाना अबू सईद, कोलकाता के एक मशहूर इस्लामिक स्कॉलर हैं। यही वजह रही कि बचपन से ही उन्हें घर में ऐसा माहौल मिला जहाँ:

• दीन को सिर्फ रटाया नहीं गया, बल्कि समझाया गया।
• सवाल पूछने की आज़ादी थी।
• क़ुरान और हिकमत (Wisdom) की तालीम उनकी घुट्टी में मिली।

नदवतुल उलमा से ‘नदवी’ बनने तक का सफर

कोलकाता से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद, 2014 में उन्होंने हिंदुस्तान के ऐतिहासिक इस्लामिक इदारे दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ में दाखिला लिया।

‘नदवी’ नाम का मतलब क्या है?

अक्सर लोग पूछते हैं कि उनके नाम के पीछे ‘नदवी’ क्यों लगा है? दरअसल, नदवतुल उलमा से फ़ारिग (Graduate) होने वाले छात्रों को ‘नदवी’ कहा जाता है। नदवा अपनी इस सोच के लिए जाना जाता है कि वह पुराने इल्म और नए ज़माने के तकाज़ों के बीच एक पुल (Bridge) का काम करता है। यहाँ रहकर उन्होंने 6 साल तक गहरा अध्ययन किया और इन विषयों में महारत हासिल की:

• तफ़सीर: क़ुरान की गहराई और व्याख्या।
• हदीस: पैगंबर (स.अ.व.) की हदीसों का अध्ययन।
• फ़िक़्ह: इस्लामिक कानून (Islamic Jurisprudence)।
• उसूल-ए-दीन: आस्था और अक़ीदे का विज्ञान।

यहीं से उन्होंने ‘इफ़्ता’ किया और मुफ़्ती की डिग्री हासिल की।

मलेशिया से PhD और रिसर्च

मुफ़्ती शमाइल नदवी की सोच को जो चीज़ सबसे अलग बनाती है, वह है उनका एकेडमिक विज़न। नदवा से तालीम लेने के बाद वह रुके नहीं, बल्कि मलेशिया चले गए।
फिलहाल, वह मलेशिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से PhD कर रहे हैं। यह कदम साबित करता है कि वह दीनी तालीम के साथ-साथ मॉडर्न रिसर्च और एकेडमिक दुनिया में भी अपनी जगह बना रहे हैं।

वहयैन फाउंडेशन और समाज सेवा

सिर्फ तक़रीरें करना उनका मक़सद नहीं है, बल्कि वह ज़मीनी स्तर पर काम करने में यकीन रखते हैं। इसीलिए उन्होंने वहयैन फ़ाउंडेशन की बुनियाद रखी | जिसके तहत कई तरह के ऑनलाइन और ऑफलाइन कोर्सेस चलाए जाते हैं, जो हर उम्र के लोगों के लिए मददगार हैं।

Mufti Shamail Nadvi के Online Courses

1. लाइफ़ आफ़्टर रमज़ान वर्कशॉप (Life After Ramadan Workshop):

यह उनका एक मशहूर ऑनलाइन कोर्स है, जिसमें सिखाया जाता है कि रमज़ान के बाद भी अपनी रूहानियत (Spirituality) और इबादत के जज़्बे को कैसे कायम रखा जाए।

2. अरबी भाषा (Arabic Language):

क़ुरान को बिना तर्जुमे के समझने के लिए अरबी भाषा की बारीकियों पर आधारित कोर्सेस, ताकि लोग अल्लाह के कलाम से सीधा जुड़ाव महसूस कर सकें।

3. तफ़सीर और हदीस (Tafseer & Hadith):

क़ुरान की आयतों और पैगंबर (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) की हदीसों को समझने के लिए ख़ास क्लासेस।

4. फ़िक़्ह और इस्लामिक लॉ (Fiqh & Islamic Law):

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पेश आने वाले मसलों को इस्लामिक कानून के मुताबिक कैसे हल किया जाए, इसकी व्यावहारिक शिक्षा।

5. काउंसलिंग और मेंटरशिप (Counseling & Mentorship):

युवाओं के लिए ख़ास सत्र, जहाँ उनके ज़हनी और मज़हबी उलझनों (Doubts) को दूर किया जाता है।

नोट: ये कोर्सेस समय-समय पर ऑनलाइन वर्कशॉप्स और ऑफलाइन क्लासेस के रूप में आयोजित किए जाते हैं, जिनकी जानकारी उनके सोशल मीडिया हैंडल्स से मिलती रहती है।

क्यों युवाओं (Youth) की पसंद बने हैं मुफ़्ती शमाइल?

आज मुफ़्ती शमाइल नदवी YouTube और सोशल मीडिया पर लाखों दिलों की धड़कन बन चुके हैं। इसकी कुछ खास वजहें हैं:

1. लॉजिकल अप्रोच (Logical Approach): वह “ऐसा ही होता है” कहकर बात खत्म नहीं करते, बल्कि “ऐसा क्यों है” का जवाब देते हैं।
2. नास्तिकता पर पकड़: Atheism और एग्नोस्टिसिज्म (Agnosticism) जैसे विषयों पर उनकी पकड़ ज़बरदस्त है।
3. साइंटिफिक नज़रिए: वह साइंस और इस्लाम को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि साथी के तौर पर पेश करते हैं।
4. लहजे में नरमी: उनकी बातों में चीख-पुकार नहीं, बल्कि एक धीमापन और ठहराव है जो सुनने वाले को सोचने पर मजबूर करता है।

Conclusion

मुफ़्ती शमाइल नदवी आज के दौर की ज़रूरत हैं। वह एक ऐसा चेहरा हैं जो बता रहे हैं कि इस्लाम आधुनिकता (Modernity) से घबराता नहीं, बल्कि उसे सही डायरेक्शन देता है। उनकी “फिक्री बातचीत” का अंदाज़ यह साबित करता है, कि अगर दलील सच्ची हो, तो शोर मचाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। अगर आप भी इस्लाम को तर्क और मोहब्बत की नज़र से समझना चाहते हैं, तो आपको मुफ़्ती शमाइल नदवी को ज़रूर सुनना चाहिए।

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