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Method Of Tayammum | तयम्मुम कैसे करें

Easy Method Of Tayammum 

तयम्मुम का मतलब

इबादत की नियत से पाक जिनसे ज़मीन पर हाथ फेर कर अपने चेहरे और हाथों का कुहनियों समेत मसह करना

तयम्मुम का हुक्म कब नाजिल हुआ

एक जंग के दौरान नबी और सहाबा सफर में थे तभी हज़रात आयशा का हार गुम हो गया जिसकी तलाश में काफी वक़्त लगा और उसके लिए ऐसी जगह ठहेरना पड़ा जहाँ पानी मौजूद नहीं था नमाज़ का वक़्त भी हो गया था (परेशानी के आलम में कुछ सहाबा ने नमाज़ बगैर वुजू के जैसे तैसे पढ़ ली फिर नबी के पास इस को बयान किया तब तयम्मुम का हुक्म नाजिल हुआ

तयम्मुम की क्या हय्सियत है

अगर पानी मौजूद न हो तो तयम्मुम की भी वही हय्सियत है जो वुजू और गुसल की है यानी नमाज़ का वक़्त शुरू होने पर जैसे वुजू किया जाता है वैसे ही पानी न होने पर तयम्मुम भी किया जा सकता है

किन हालातों में तयम्मुम की इजाज़त है

1. पानी का न होना

वुजू या गुसल के लिए जितने पानी की ज़रुरत पड़ती है उतना पानी अगर एक मील के अन्दर अन्दर न मिल सकता हो

या पानी लेने के लिए खतरे से भरा रास्ता पार करना पड़ता हो और ज़रुरत से ज्यादा कीमत दे कर पानी हासिल करना पड रहा हो तो ये चीज़ें पानी के न होने के बराबर हैं

2.  पानी है लेकिन बीमारी की वजह से इस्तेमाल नहीं कर सकता

अगर पानी के इस्तेमाल की वजह से बीमार होने का या देर से ठीक होने का अंदेशा हो तो या जान लेवा सर्दी हो तो इन सूरतों में तयम्मुम जाएज़ है

3.  नमाज़े जनाज़ा के छूट जाने का अंदेशा होना

अगर ये अंदेश है कि वुजू करेगा तो नमाज़े जनाज़ा छूट जाएगी तो तयम्मुम करके नमाज़ में शरीक हो जाना दुरुस्त है

तयम्मुम किन चीज़ों पर किया जा सकता है

हर वो चीज़ जो ज़मीन की जिन्स से हो जैसे मिटटी रेत पत्थर चूना

तयम्मुम के फ़राइज़

तयम्मुम के फ़राइज़ तीन हैं

1. नियत करना

2. चेहरे का मसह करना

3. हाथों का कुहनियों समेत मसह करना

तयम्मुम किन चीज़ों से टूट जाता है

वो तमाम चीजें जिनसे वुजू टूट जाता है उनसे ही तयम्मुम भी टूट जाता है

तयम्मुम का तरीका

तयम्मुम का तरीका ये है की नियत करके दोनों हथेलियाँ मिटटी पर मारी जाएँ उसके बाद उन्हें पूरे चेहरे पर फेर लिया जाये

उस के बाद दोबारा हथेलियाँ मिटटी या गुबार पर मार कर कुहनियों तक दोनों हाथों पर फेरा जाये

अगर उँगलियों में अंगूठी पहेन रखी हो तो तो उसको उतार दें या तो आगे पीछे कर दें

बीमारी में किसकी राय को ठीक समझा जायेगा

मरीज़ खुद अपने दिल से पूछे और उसे मर्ज़ के बढ़ जाने का खतरा हो या किसी मुसलमान माहिर डोक्टर उसे बताये तो तयम्मुम जाएज़ है

अगर पानी और मिटटी कुछ न मिले तो

अगर किसी ऐसी जगह में हो कि पानी और मिटटी कुछ न मिले तो उस वक्त नमाजियों जैसे आमाल करेगा लेकिन इस दौरान किरात यानी क़ुरआन नहीं पढ़ेगा
और जब पानी मिल जाये तो उन नमाज़ों को दोहराना होगा

पानी मिल जाये तो क्या तयम्मुम टूट जायेगा

अगर पानी न मिल पाने की वजह से तयम्मुम किया था तो जब भी मिल जाये तयम्मुम टूट जायेगा

 

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