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Best Islamic Moral Kids Stories | ईद की ख़ुशी

 

ईद की ख़ुशी

अहमद आज बहुत उदास था क्योंकि उसके सब से प्यारे दोस्त वक्कास ने ईद के लिए नए कपडे नहीं बनवाए थे | अहमद वक्कास को ऐसे नहीं देखना चाहता था उसने सोचा घर जाकर वो अब्बू से इस बारे में बात करेगा |
 
घर जाकर वो अपने अब्बू के आने का इन्तिज़ार करने लगा | अल्लाह अल्लाह करके अब्बू भी आ गए अहमद भाग कर उनके पास गया और सलाम करके उनके फ्रेश होने का इन्तिज़ार करने लगा | अब्बू जी कब से मैं आपका इन्तिज़ार कर रहा था “अब्बू के बैठते ही अहमद बोला” |
 
अरे बेटा सब खैरियत तो है | जी अब्बू सब खैरियत है आप ने मुझे वो हदीस सुनाई थी ना जिस का मतलब ये था कि मोमिन एक जिस्म की तरह होते है अगर उसके सर में दर्द होता है तो पूरे जिस्म में दर्द होता है अगर उसकी आँख में दर्द होता है तो पूरे जिस्म में दर्द होता है अहमद जल्दी जल्दी बोला जी बेटा सुनाई थी पर अब क्या हुआ “अहमद के अब्बू ने पुछा” |
 
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अब्बू जी मेरा दोस्त है ना वक्कास आपको पता है ना वो बहुत गरीब है आज सब लोग नए कपड़ो की बाते कर रहे थे और वो कोने में उदास बैठा था और उसको उदास देख कर मैं भी उदास हो गया “अहमद ने रोनी सूरत बना कर कहा” |
 
अच्छा जी तो इस वजह से मेरा मोमिन बच्चा उदास है “अब्बू जी ने कहा” जी अब्बू ईद तो ख़ुशी का नाम है ना जब सब खुश होंगे तभी मज़ा आयेगा ना मैं नए कपडे पहन कर जाऊंगा और वक्कास उदास होगा तो कितना बुरा लगेगा |
 
अहमद कि मासूमाना बाते सुन कर अब्बू को अहमद पर बहुत प्यार आया उन्होंने कहा अच्छा जी तो अब हमें वक्कास को खुश करना है हम्म्म तो ठीक है हम रात को खाने के बाद वक्कास के लिए ईद के कपडे लेकर आएंगे अब खुश “अब्बू जी ने प्यार से कहा”  अहमद मारे ख़ुशी के उछल पड़ा |
 
रात को अहमद अपने अब्बू के साथ मार्किट से वक्कास के लिए कपडे खरीद कर ले आया सुबह होते ही अहमद ने अम्मी के साथ वक्कास के घर का रुख किया जैसे ही अहमद वक्कास के घर पहुंचा वक्कास अपनी मामा से कह रहा था कि मुझे कपडे नहीं मिलेंगे तो मैं घर से बाहर नहीं निकलूंगा | वक्कास की मामा कुछ देर खामोश रहने के बाद बोली “बेटा अल्लाह है न वो हमारी ज़रुरत पूरी करेगा” |
 
अहमद ने ये सब बाते दरवाज़े के पास ही सुन ली थी इसके बाद उसने दरवाज़ा खटखटाया तो वक्कास ने दरवाज़ा खोला जैसे ही वक्कास ने कपडे देखे ख़ुशी से अहमद को गले लगा लिया वक्कास कि अम्मी अपनी आँखों के आंसू छुपा ना पाईं अल्लाह ने उसकी दुआ कुबूल कर ली थी |
 
इधर अहमद को ये लगा जैसे उसकी ये ईद हकीकी ईद है अब्बू ने कहा था ईद का मतलब होता है ख़ुशी और आज अहमद बहुत खुश था

 

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