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Benefits Of Quraan In Hindi | कुरान पाक का रोहानी व जिस्मानी असर

Benefits Of Quraan In Hindi | कुरान पाक का रोहानी व जिस्मानी असर

लोगो ! हमारे पास कुरान पाक हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम के जिंदा मुआजिज़े की सूरत में एक ऐसी किताब है कि जिसके हर नुक्ते, आयत, हर्फ़ व सूरह में ऐसी रूहानियत ऐसी बातिनी ताक़त मौजूद है कि जिसके एक ज़र्रे को हासिल करने वाले की दुनिया व आखिरत दोनों संवर जाएँ |
जिन लोगो ने कुरान की असल कुव्वत और ताक़त को पहचाना और जाना और इस रोहानियत को हासिल करने के लिए जिस्म को मुजाहिदा और मेहनत के ज़रिये इस काबिल बनाया कि उनका जिस्म कुरान की रोशनी को अपने अन्दर जज़्ब कर सके तो अल्लाह ने दुनिया में ही उनको बहुत बलंद और ऊँचे दर्जात से नवाज़ा अल्लाह ने उनको ऐसा बनाया कि उनकी वफात के बाद भी उनका फैज़ इस दुनिया में जारी है |
 
कुछ तो कुरान के इस मफहूम के मुताबिक कि “हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम पर खूब दुरूद पढ़ा करो” पर अमल करके मकबूल हुए और कुछ कुरान की तिलावत व ज़िक्र से अपने दिल का जंग दूर करके मुत्तकी और परहेजगार कहलाये और रोहानी ताक़ते हासिल की |

 

आमिल मुअक्किल को कब्जे में कैसे करता है

 
जब अल्लाह के किसी नाम या आयत को ख़ास तरीकों और शर्तों के साथ पढ़ा जाता है तो इन नामो और आयातों के ज़िक्र की वजह से ज़िक्र करने वाले की जुबां से नूर पैदा होता है और यही नूर इंसानी दिल ,पाक रूहों, फरिश्तों, मुआक्किलों और मुस्लमान जिन्नात की गिज़ा यानी उनका खाना होता है
जिस तरह परवाने शमा के जलने पर उसके चारों ओर चक्कर लगते है और उस पर दीवाना वार गिरते है उसी तरह ये मुआक्किल, जिन्नात, फरिश्ते अपनी अन्दुरूनी रोहानी गिज़ा हासिल करने के लिए ज़िक्र करने वाले के पास जमा हो जाते है और उससे लुत्फ़ लेते रहते है
फिर एक वक़्त ऐसा आता है कि ये सब अल्लाह के हुक्म से ज़िक्र करने वाले के काबू में आ जाते जाते है और उसके  फर्मांबरदार हो जाते है ज़िक्र करने वाला फिर इन से दीनी और दुनियावी कामों में मदद हसिल करता है

 

कुरान से शिफा

अगर कोई शख्स अल्लाह की रजा (ख़ुशी) के लिए कुरान की किसी आयत या अल्लाह के किसी नाम का ज़िक्र तमाम शर्तों के साथ करता है तो उसपर अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते उतारते है और अल्लाह की खुशनूदी की खुशखबरी सुनाते है और फिर उसको रोहानी व क़ल्बी ताक़ते अत की जाती है
 
यही मुसलमानों की वो असल ताक़त रोहानियत और विरासत है जिसके ज़रिये मुसलमानों ने पूरी दुनिया में हुकूमत की

 

आज मुसलमान ज़लील क्यूँ है

आज मुस्लमान अपने इस बातिनी व अन्दुरूनी इल्म यानी कुरान से दूरी कि वजह से ज़लील है यहांतक कि फ़राइज़ से भी दूर हो गए है मुसलमानों पर वेस्टर्न कल्चर इस क़दर हावी हो चूका है कि हमारे नजदीक नमाज़, रोज़े, और दूसरी दीनी और रोहानी उलूम की क़दर कम हो चुकी है हमारे पास इतनी फुर्सत नहीं कि हम इस से भी शिफा हासिल करे
 
कुरान पाक हर मर्ज़ कि दवा और हर मुश्किल कि कुंजी है हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम ने हमें कुरान से फ़ायदा उठाने कि तल्कीन की
 
एक कुरानी आयत का तर्जुमा ये है कि “और हम उतारते है कुरान में वो चीज़ जो ईमान वालो के लिए शिफा है “ हुज़ूर सल्लल लहू अलैहि वसल्लम न सिर्फ खुद दम करते थे बल्कि सहबा को भी बीमारियों से शिफा और मुश्किलात के हल के लिए कुरान पाक कि अमलियात से फायदा उठाने की तलकीन फरमाते

 

कुरान पर एक बहुत बड़ा सितम

सितम तो ये है कि हमने कुराने पाक को सिर्फ सवाब हासिल करने वाली किताब समझ लिया है जबकि उसकी असल रोहानी ताक़त और हर किस्म कि मुश्किलात को दूर करने कि ताक़त से नहीं जानते है
 
जिस तरह मुल्क का एक पवार हॉउस होता है जिस के ज़रिये तमाम शहरों इलाकों को बिजली मिलती है और उस एनर्जी से हम अपने घर कि चीजों को अपने आलात को चलाते है उसी तरह कुरान उम्मते मुस्लिम का एक ऐसा पवार हॉउस है जिसकी बर्की ताक़त के ज़रिये हम दीनी व दुनयावी मकासिद को पूरा करते है
 
अल्लाह ने कुरान में फ़रमाया है कि अगर ये कुरान हम किसी पहाड़ पर उतारते तो तुम उसे डरकर रेज़ा रेज़ा और टुकड़े टुकड़े होता हुआ देखते
 
तो जब पहाड़ कुरान कि रोहानी ताक़त से टुकड़े टुकड़े हो सकता है तो क्या वजह है कि इसके पढने से दुनयावी और रोहानी परेशानियाँ दूर न हो और जिस्मानी बीमारियाँ ख़त्म न हो


जब शिफा के हासिल करने और मुश्किलात के हल कि शर्तो का लिहाज़ करते हुए कुरान को किसी बीमारी पर पढ़ा जाता है तो कोई बीमारी और परेशानी कुरान कि ताक़त का मुकाबला नहीं कर सकती |

 

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