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Auzubillah | अऊज़ुबिललाह को इन 4 जगहों पर ज़रूर पढ़ें

Auzubillah

Auzubillah |

अऊज़ुबिललाह को इन 4 जगहों पर ज़रूर पढ़ें

अऊजुबिल लाह ( Auzubillah ) एक ऐसी दुआ है जो आम तौर से क़ुरान पाक की तिलावत से पहले पढ़ी जाती है, क्यूंकि ये दुआ जब आप पढ़ लेते हैं तो आप पर शैतान की पकड़ ढीली हो जाती है, और आप अल्लाह की पनाह में पहुँच जाते हैं लेकिन हमको जान लेना चाहिए कि सिर्फ़ तिलावत के वक़्त ही शैतान नहीं आता है बल्कि इन 4 जगहों पर शैतान का हमला ज़रूर होता है तो अगर उन जगहों पर हम शैतान से महफूज़ नहीं रहे, तो नुक़सान का खतरा मंडराता रहता है तो आज हम बताएँगे कि वो कौन सी 4 जगहें हैं जहाँ पर  Auzubillah ज़रूर पढ़ना चाहिए |

Auzubillah meaning in hindi

अऊजुबिल लाह का मतलब होता है: “मैं अल्लाह की पनाह लेता हूँ शैतान मरदूद से

1. कुरान की तिलावत से पहले:

कुरान की तिलावत शुरू करने से पहले “अऊज़ुबिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम”  पढ़ना वाजिब (ज़रूरी) है। अल्लाह तआला ने कुरान में फरमाया:

فَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

 

“जब तुम कुरआन पढ़ो, तो शैतान मरदूद से अल्लाह की पनाह मांगो।”

 

(सूरह अन-नहल 16:98)

क़ुरआन के शुरू में ये दुआ इसलिए पढ़ी जाती है ताकि आपका ध्यान ना भटके और दिल में शैतानी वसवसे ना आएं और अल्लाह का कलाम पूरी तवज्जोह से पढ़ा और समझा जा सके ।

2. गुस्सा आने पर

गुस्सा एक इंसानी जज़्बा है और ये तब आता है जब कोई बात मिज़ाज के खिलाफ़ आती है लेकिन अगर इस पर काबू ना रखा जाए तो ये बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। और फिर जब गुस्सा उतर जाता है तो उसे अहसास होता है कि ये नहीं होना चाहिए था, आमतौर से लोग गुस्से में लड़ाई झगड़ा कर लेते हैं बीवी को तलाक़ दे देते हैं लेकिन जब होश में आते हैं तो अहसास होता है कि ये मैं गलत कर दिया इसीलिए हदीस में आता है:

“जब तुम गुस्से में हो तो ‘अऊज़ुबिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम‘ पढ़ो, क्योंकि गुस्सा शैतान की तरफ से होता है।”
(सुनन अबू दाऊद)

इस दुआ के ज़रिए शैतान की भड़काई हुई आग को बुझ जाती है जो उस ने दिल में लगायी थी, और इससे दिल को सुकून और राहत मिलती है।

Auzubillah

3. बुरे सपनों के बाद

कभी कभार आप सोते हुए ऐसा सपना या ख्वाब देख लेते हैं कि जब आँख खुलती है तो डर सा महसूस होता है आम तौर से ये शैतान की तरफ़ से डराने के लिए होता है तो अगर आप के साथ ऐसा होता है तो जैसे आँख खुले  :

  • “‘अऊज़ुबिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम’ पढ़ें
  • बाईं तरफ हल्का सा थूके (सिर्फ इशारे के तौर पर)।
  • और करवट बदल कर सो जाएँ
  • बाद में उस सपने को किसी से ना बताए।

हदीस में है:
“अगर तुम में से किसी को बुरा ख्वाब आए तो अल्लाह से पनाह मांगे और वह सपना किसी को ना बताए, फिर वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा।”
(सहीह बुखारी व मुस्लिम)

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4. डर या अनजान खतरों के अहसास पर

अगर किसी अनजान डर या खतरे का अहसास हो और कोई अनजानी सी फिक्र, डर, या बेचैनी हो, तो उस वक्त यह दुआ पढ़ना बहुत फायदेमंद साबित होता है और इसको पढ़ लेने से दिल को इत्मीनान मिलता है और अल्लाह की हिफाज़त और पनाह हासिल होती है । क्यूंकि कुरान में बार-बार अल्लाह तआला ने फ़रमाया है कि:

إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ الشَّيْطَانُ يُخَوِّفُ أَوْلِيَاءَهُ ۖ فَلَا تَخَافُوهُمْ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

“शैतान डराता है अपने साथियों से, तुम उनसे मत डरो बल्कि मुझसे डरो अगर तुम ईमान वाले हो।”
(सूरह आले इमरान 3:175)

कुल मिला कर “अऊज़ुबिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम ” एक ऐसी दुआ है जो शैतान से बचाती है , दिल को सुकून देती है और अल्लाह से जुड़ने का बेहतरीन जरिया है। इसलिए इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ज़रूर पढ़ते रहें क्यूंकि शैतान की बचे रहना और दिल में सुकून और इत्मिनान का होना अल्लाह की बड़ी नेअमतों में से एक नेअमत है
अल्लाह तआला हम सबको अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए 

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