Rizq Me Barkat Ka Powerful Wazifa |

नबी का बताया हुआ आसान वज़ीफ़ा

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई आपसे कहे “मैंने 30–35 मुल्कों का सफ़र किया, न कभी किसी के सामने हाथ फैलाया, न जेब में ज़्यादा कुछ था… मगर अल्लाह ने हर जगह मेरे लिए रास्ते खोल दिए।”तो आप सबसे पहले क्या पूछेंगे? शायद यही: “आख़िर कैसे?” यही सवाल मेरे दिल में भी उठा था, जब मैंने ये बात एक बुज़ुर्ग की ज़बान से सुनी। न कोई जादुई तावीज़, और न ही कोई जादू, बस एक छोटा-सा वज़ीफ़ा… लेकिन ऐसा वज़ीफ़ा जो सीधे हमारे प्यारे नबी ﷺ से मिला हुआ था।

ये कोई कहानी नहीं, कोई वायरल दावा नहीं, और न ही “आज़माया हुआ नुस्ख़ा” कहकर बेचने वाली बात है। ये उस अमल की दावत है, जो यक़ीन, पाबंदी और अल्लाह पर भरोसे से जुड़ी हुई है। और इस वज़ीफे में पढ़े जाने वाले अल्फ़ाज़ कुछ लोगों के लिए सिर्फ़ अल्फ़ाज़ होंगे, लेकिन कुछ के लिए ज़िन्दगी बदलने का ज़रिया बन जायेंगे।

तो अगर आप भी रिज़्क़ की तंगी, दिल की बेचैनी, या हालात की उलझनों से जूझ रहे हैं…तो आज हम Rizq Me Barkat Ka Powerful Wazifa आप से शेयर करने जा रहे हैं तो मेरी गुज़ारिश है कि आप इस वज़ीफे को मिस न करें, क्यूंकि हो सकता है, ये वही आपकी मुश्किल का हल हो जिसका इंतज़ार आप बरसों से कर रहे हों। तो चलिए शुरू करते हैं|

Rizq Me Barkat Ka Powerful Wazifa

मैं एक बुज़ुर्ग के पास बैठा था, वो कह रहे थे: मैंने 30–35 मुल्कों का सफ़र किया, न कभी किसी के सामने हाथ फैलाया, न जेब में ज़्यादा कुछ था, मगर अल्लाह ने हर जगह मेरे लिए रास्ते खोल दिए।”बस सिर्फ मैं एक वज़ीफ़ा करता रहा!”

मैंने पूछा: हज़रत! क्या वज़ीफ़ा करते हैं?

तो फरमाया: मैंने”ये वज़ीफ़ा मदीना मुनव्वरा में अपने शेख से सीखा था। जब मेरी तालीम मुकम्मल हुई, तो शेख ने डायरी और कलम लेकर कहा: बेटा, लिख! ये वज़ीफ़ा कभी मत छोड़ना, अल्लाह तआला तुझे माली तौर पर कभी परेशान नहीं करेगा।”

हज़रत ने एक बात और कही: “बेटा, ये वज़ीफ़ा बे-तलब को मत बताना, सिर्फ उसी को बताना जो तलब रखता हो और क़दर करना जानता हो!” जब मैं मुल्क वापस आया, कुछ लोग हालात से परेशान थे, मैंने उनको ये वज़ीफ़ा बता दिया। अल्लाह ने उन्हें अजीबो-गरीब तरीके से नवाज़ा।

यहाँ पर ये ध्यान रहे ! कि ये वज़ीफ़ा किसी शेख या वली का बताया हुआ नहीं, बल्कि हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ का बताया हुआ वज़ीफ़ा है, एक सहाबी हाज़िर हुए और अर्ज़ किया: “या रसूलुल्लाह! दुनिया ने मुझे छोड़ दिया है…” तो आप ﷺ ने फरमाया: “तुम फ़रिश्तों वाली तस्बीह क्यों नहीं पढ़ते?”फिर ये तस्बीह बताई:

 

“Subhanallahi wa bihamdihi, Subhanallahil Azeemi wa bihamdihi, Astaghfirullah”

 

सुब्हानल लाहि व बिहम्दिही, सुब्हानल लाहिल अज़ीमि व बिहम्दिही अस्तग़ फ़िरुल लाह

 

प्यारे नबी ﷺ से वज़ीफ़ा लेकर वो सहाबी चले गए। फिर कई दिन तक वो नज़र नहीं आए। जब वापस आए, तो बोले: “अल्लाह ने मुझे इतना नवाज़ा है कि मैं बयान नहीं कर सकता!”

अब एक हकीकत सुनिए: एक जगह एक सैयद भाई ने मुझसे कहा: “मौलाना, कुछ महीने पहले आप हमारे घर आए थे, आपने एक वज़ीफ़ा बताया था। मेरी बीवी पर्दे के पीछे से सुन रही थी, उसने पाबंदी से पढ़ना शुरू किया और अभी उसके फंसी हुई प्रॉपर्टी के ₹3 लाख रुपये आ रहे हैं!”

मैंने कहा: “आपने दो दिन पहले ही शुरू किया था?”

बोले: “हाँ, लेकिन बीवी पहले से कर रही थी, और अब ज़मीन का मामला जो बरसों से अटका था, हल हो गया!” एक और मालदार शख्स को ये वज़ीफ़ा बताया, बोले: “ना ना, मैं तो अपने शेख का ही किया करता हूँ…”

मैंने कहा: “भाई, ये वली का नहीं, नबी का बताया हुआ है!”

फिर उन्होंने कुछ दिन पढ़ा, फिर खुद आकर बोले: “अब ये वज़ीफ़ा कभी नहीं छोड़ूंगा! हाथ में पैसा नहीं था, बेटा आया और बोला “अब्बा आपके ₹70,000 जो मेरे पास थे, वो ले लीजिए!”

शेख ने एक बात और कही थी: “जिसने यक़ीन से पढ़ा, आज मालदार है। और जिसने बग़ैर यक़ीन के पढ़ा, आज भी वहीं है जहाँ था!

मैंने एक दिन पूछा: “हज़रत, ये वज़ीफ़ा पढ़ने से सिर्फ रिज़्क़ मिलेगा या सवाब भी?” बहुत नाराज़ हुए। मिसाल देकर समझाया: “50 की बाल्टी फ्री मिल रही है लेकिन 1 किलो की चाय खरीदनी है, तो तुझे चाय भी मिलेगी और बाल्टी भी!” यानि सवाब  भी मिलेगा और रिज़्क़ भी बढ़ेगा।

पढ़ने का वक़्त:

फज्र की सुन्नत और फ़र्ज़ के दरमियान है लेकिन अगर बीच में नहीं पढ़ सके तो जब तक फज्र का वक़्त बाकी है, तब तक पढ़ सकते हैं। यानि फ़ज्र की नमाज़ के लिए जब उठें तो सुन्नत पढ़ लें फिर फ़र्ज़ पढ़ने से पहले ये वज़ीफ़ा पढ़ लें, लेकिन अगर वक़्त कम हो तो फ़र्ज़ पढ़कर भी पढ़ सकते हैं लेकिन फ़ज्र का वक़्त ख़त्म होने से पहले |

कितनी बार पढ़ना है ?

100 मर्तबा रोज़ाना

खुलासा:

ये वज़ीफ़ा तजुर्बा नहीं, अमल करने का है, ये किसी वली का नहीं, प्यारे नबी ﷺ का है, यक़ीन और पाबंदी से पढ़ो,  रिज़्क़ में बरकत देखोगे

तो कहिए: इंशा अल्लाह! हम इस वज़ीफ़े की पाबंदी करेंगे! इंशा अल्लाह! अल्लाह तआला हमारे रिज़्क़ में बरकत अता फ़रमाएंगे!