WhatsApp Channel Join Now

8 Bade Gunah Quran Me | बड़े गुनाह जो दुनिया और आख़िरत तबाह कर देंगे

8 Bade Gunah Quran Me

8 Bade Gunah Quran Me |

बड़े गुनाह जो दुनिया और आख़िरत तबाह कर देंगे

8 Bade Gunah Quran Me : 8 बड़े गुनाह जो अपने आप में इतने बुरे हैं कि उनका ज़िक्र अल्लाह तआ’ला ने ख़ुद क़ुरआन में फ़रमाया है। लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि ये तमाम गुनाह आज हमारे मुआशरे में आम हो चुके हैं। और हमारी रोज़ाना की ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुके हैं | जबकि एक मुसलमान होने के नाते हमारी ज़िम्मेदारी तो ये थी कि हम क़ुरान पढ़ते और उसमें जिन चीज़ों से रोका गया है सब से पहले उन चीज़ों से रुक जाते, और जो करने के लिए कहा गया उन पर पाबन्द हो जाते लेकिन हम उन राहों पर चल पड़े जो सोसाइटी में चल रहा है और जो हमारे बाप दादा करते आए हैं |

मेरे अज़ीज़ों ! बहुत सोचने और फ़िक्र करने का मक़ाम है कि इन्सान की ज़िन्दगी में एक छोटा गुनाह भी बहुत बुरा असर असर डालता है, अल्लाह और बन्दे के बीच ताल्लुक़ को खराब करता है और ज़िन्दगी में बे बरकती लाता है, बे सुकून कर देता है तो अब सोचिये! वो बड़े बड़े गुनाह जो क़ुरान में ज़िक्र हैं उन का हमारी ज़िन्दगी में होना हमारी जिस्मानी और रोहानी ज़िन्दगी को कितना नुकसान पहुंचाएगा |

8 Bade Gunah Quran Me

तो इसीलिए आज आज मैं आपको क़ुरआन मजीद में बताये गए वो 8 बड़े गुनाह बताने जा रहा हूँ, ताकि हम उनको पढ़ें और जानें और अपनी ज़िन्दगी में इनसे दूर रहें |

शिर्क – अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना

“बेशक शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है”

 

सूरह लुक़मान (31:13)

अल्लाह ने ही दुनिया बनाई,  उसी ने इन्सान को पैदा किया, उसी ने सारी नेअमतें दुनिया में उतारीं और हुक्म दिया कि जब भी इबादत करो तो उसी की करो, जब सजदा करो तो उसी का करो, और जब दुआ मांगो तो उसी मांगो, क्यूंकि वही इस लायक़ है जिसकी इबादत की जाये, सज्दा किया जाये, और उसी से माँगा जाये |

8 Bade Gunah Quran Me

लेकिन जो काम सिर्फ उस अकेले अल्लाह के लिए करना था तो हम दूसरे के लिए करने लगे, दुआ, इबादत, सज्दा सब अल्लाह के अलावा दुसरे के लिए करने लगे और ये यक़ीन रखने लगे कि (अल्लाह के अलावा जो गैर है) उसकी इबादत, सज्दा या दुआ करने पर मेरी ज़रूरतें पूरी हो जाएँगी, मतलब हमने अल्लाह का पार्टनर बना लिया उसकी इबादत, सज्दा, दुआ, में उसका साझी बना लिया और मौत व ज़िन्दगी, सेहत व मर्ज़ रिज्क और आफ़ियत देने में जो यक़ीन सिर्फ अल्लाह पर होना था वो सब दुसरे लगा लिया |

यही होता है शिर्क, और शिर्क वो गुनाह है जिसके बारे में अल्लाह ने फ़रमाया कि “शिर्क माफ़ नहीं होगा इसके अलावा और कोई गुनाह हो तो माफ़ हो सकता है”,इसलिए ज़िन्दगी रहते तौबा ज़रूरी है अगर तौबा के बग़ैर इंसान दुनिया से चला गया, तो अल्लाह उसे कभी माफ़ नहीं करेगा। तो हर उस अमल से बचिए जिसमें शिर्क का शक भी हो।

2. वालिदैन की नाफ़रमानी

“उनसे ‘उफ़’ तक न कहो”

 

सूरह बनी इस्राईल / अल-इसरा (17:23)

हमको पैदा करने में, बचपन में गन्दगी साफ़ करने में, उँगलियाँ पकड़ कर चलना सिखाने में, हमारी तालीम और तरबियत का इंतज़ाम करने में, हर जगह हम माँ बाप के ही क़र्ज़दार हैं, लेकिन आज बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो अपने वालिदैन की बुढ़ापे में ख़िदमत भारी लगती है। और वो वालिदैन जिन्होंने अपना वक़्त, पैसा और अपनी उम्र लगा दी उनके सामने आँखें दिखाते हैं जो कि बड़ी महरूमी की बात है |

जबकि क़ुरान और हदीस में कहा गया है कि उनपर अपनी आवाज़ ऊंची करना तो दूर “उफ़ भी न कहो” लेकिन जिसने ये जुरत की तो उसने बहुत बड़ा गुनाह किया और हदीस में आता है कि

“वो शख्स हलाक हो गया जिसने अपने माता-पिता को बुढ़ापे में पाया और जन्नत हासिल न कर सका”

 

सहीह मुस्लिम (Hadith: 2551)

 3. औलाद का ना-हक़ क़त्ल

अपनी औलाद को फाक़े के डर से क़त्ल न करो”

 

सूरह अल-अनआम (6:151)

“क़त्ल” सिर्फ वही नहीं होता कि एक जिंदा इन्सान जो दुनिया में चल फिर रहा हो उसको मार देना, बल्कि क़त्ल तो वो भी है कि पेट में सांस ले रहे बच्चे को जो अभी दुनिया का सफ़र शुरू भी नहीं का पाया था कि उसे पेट में ही मार डालना |

आज देखा जाता है कि अबॉर्शन कराना, लड़की होने पर बच्चे को फेंक देना, या जन्म से पहले पेट में ही मार देना ये सब क़त्ल नहीं तो और क्या हैं! याद रखिये! औलाद अल्लाह की अमानत है और ये कितनी बड़ी नेअमत है ये उन लोगों से पूछो जो औलाद की नेअमत से महरूम हैं, तो अल्लाह के अज़ाब से डरो और ऐसा गुनाह न करो|

4. फ़हहाशी और बेहयाई के क़रीब भी मत जाओ

आज गुनाह आसान हो गया है, लेकिन निकाह मुश्किल बना दिया गया है। जबकि इस्लाम पाकीज़गी और पाकदामनी को promote करता है इसलिए क्यूंकि इस में ज़ाहिरी तौर पर मिनटों का मज़ा है लेकिन हक़ीक़त में ये सिर्फ एक शख्स तो क्या, पूरी सोसाइटी के लिए सज़ा है इसीलिए क़ुरान ने कहा

“बेहयाई के कामों के क़रीब भी न जाओ”

 

सूरह अल-अनआम (6:151)

ऐसा नहीं है कि इस्लाम इन्सान की ज़रूरतों को नहीं समझता है वो अच्छे से समझता है, इसीलिए कहा है निकाह करो और एक औरत के ज़िम्मेदार शौहर बन कर ख़ूबसूरत और पाकीज़ा ज़िन्दगी गुज़ारो, लेकिन नाजायज़ ताल्लुक़ात, पोर्न, डेटिंग ऐप्स ये सब अल्लाह को सख़्त नापसंद हैं। इस में जिस्मानी और रूहानी ज़िन्दगी बरबाद हो जाती है |

5. ना-हक़ क़त्ल करना 

“जिसने एक जान को क़त्ल किया, उसने पूरी इंसानियत को क़त्ल किया”

 

सूरह अल-माइदा (5:32)

“क़त्ल” लफ्ज़ सुनने ही से बड़ा लगता है क्यूंकि ये कोई छोटी मोटी बात नहीं है कि किसी इन्सान की ज़िन्दगी को ख़त्म कर देना जो किसी घर का फर्द था, किसी का लाडला था, किसी का बेटा था, किसी कि आँखों का तारा था और सब से बढ़कर अल्लाह ने उसको इस दुनिया में ज़िन्दगी गुज़ारने का वक़्त दिया था, उसको किसी बात पर मार देना या उसकी ज़िन्दगी ख़त्म कर देना, सिर्फ दुनियावी जुर्म नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा गुनाह है और जन्नत से महरूमी का सबब है।

7. नाप तोल में कमी करना

“पूरा तोलो, इंसाफ़ से तोलो”

 

(तफ्सील: सूरह अल-मुतफ़्फिफ़ीन 83:1-3)

आप देखते होंगे कि दुकानों पर, मार्केट में, राशन डीलरों के यहां डंडी मारी जाती है, मतलब कम तोला जाता है और गरीबों का हक़ खा लिया जाता है, और किसी का जो हक़ था उसको देने में कमी करना ये भी गुनाहे कबीरा है।

किसी का हक़ खा कर आप महल भी बना लें तो वो महल आपको खुशियाँ या सुकून नहीं दे सकता, बल्कि वो हड़प किया गया माल दुनिया में बे बरकती का सबब बनेगा और आख़िरत में जहन्नम में जाने की वजह बनेगा |

8. झूठ बोलना, गवाही में हेराफेरी करना

“सच कहो, चाहे अपने रिश्तेदार के खिलाफ ही क्यों न हो”

सूरह अल-अनआम (6:152)

लोग कारोबार में, और मामलात में, हेरा फेरी में, बातों को घुमाना और झूट बोल कर सामान बेच देने को हुनर समझते हैं, और सच्चाई से कारोबार और मामलात करने वाले को बेवकूफ समझते हैं और कहते हैं कि इतना देखोगे तो कुछ नहीं कर पाओगे |

जबकि हक़ीक़त ये है कि झूट, धोका और फ़रेब का बाज़ार बहुत जल्द डाउन होता है और उसका ज़वाल बहुत जल्द आता है शुरू में चाहे जितना वो आसमान छूता हुआ दिखे लेकिन उसका bankrupt होना एक न एक दिन तय होता है, इसलिए गवाही में, ज़बान में सिर्फ़ सच बोलो। रिश्तेदारी या दोस्ती की वजह से बात को न बदलो।

8 Bade Gunah Quran Me

9. अल्लाह के अहद को तोड़ना

अल्लाह के अहद को पूरा करो”

 

सूरह अल-अनआम (6:152)

अल्लाह ने बन्दों को पैदा किया है तो साथ सब से अहद और वादा लिया है कि उसकी नाफ़रमानी नहीं करोगे और उसके बताये गए रास्तों पर चलोगे, लेकिन अगर कोई इन वादों को भूल कर अपनी दुनिया में मस्त हो जाता है और शैतानी रास्तों पर चलता है, तो यक़ीनन ये अपने आप में एक बहुत बड़ा गुनाह है, इसलिए हलाल को हलाल मानो, हराम से बचो, नमाज़, रोज़ा, ज़कात जो भी अल्लाह के हुकूक़ हैं उन को पूरा करो।

अल्लाह तआला इन सब गुनाहों से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए

और हमें नेक बन्दों में शामिल फ़रमाए |

Connect With Us

Join Our Islamic Community

Daily Quran, Hadith & Islamic Guidance

WhatsApp Channel

Daily Islamic reminders & Quran verses

Join Now
Instagram

Beautiful Islamic quotes & teachings

Follow
YouTube Channel

Islamic lectures & Quran recitation

Subscribe
Facebook Page

Follow for daily Islamic posts & updates

Like Page
Facebook Group

Discuss & learn Islamic knowledge together

Join Group

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *