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6 Rights Of Parents In Islam In Hindi | 6 हक़ माँ बाप के अपनी औलाद पर कौन से हैं?

walidain ka huqooq

6 Rights Of Parents In Islam In Hindi

6 हक़ माँ बाप के अपनी औलाद पर कौन से हैं?

अगर मैं आप से एक सवाल करूं कि इस दुनिया में सब से ज़्यादा आप से मुहब्बत कौन करता है, ऐसी बेपनाह मुहब्बत जिसका बदला वो नहीं मांगता, और ख़ासकर इस दुनिया में जिसमें कोई भी शख्स बगैर किसी मतलब के आपकी तरफ रुख भी नहीं करना चाहता उस दौर में भी वो बिल्कुल बेगर्ज़ होकर आपकी कामयाबी की दुआ और तमन्ना करता रहता है, और हक़ीक़त तो ये है कि दुनिया कितनी भी बदल जाये लेकिन उस की मुहब्बत का रिश्ता कभी कमज़ोर नहीं पड़ सकता |

तो यक़ीनन आप यही कहेंगे “मेरे माँ बाप” और ये कह कर आप एक तरह का लुत्फ़ महसूस करेंगे, लेकिन जिनके माँ बाप या उन दों में से एक अगर इस दुनिया में नहीं है तो उनके ग़म ताज़ा हो जायेंगे, क्यूंकि ये रिश्ता ऐसा है ही जिसका बदल इस दुनिया में कोई हो ही नहीं सकता |

तो अगर आप के वालिदैन ज़िन्दा हैं तो आपको मुबारक हो क्यूंकि कि बगैर कोई अहसान किये, और बगैर कहे आपके पीछे दुआ करने वाला आपके साथ है इसके लिए आप अल्लाह का शुक्र अदा करें, और क़ुरान ने 15 न. पारे में माँ बाप के कुछ हक़ बयान किये हैं जिन्हें हर औलाद को ज़रूर जानना चाहिए और उन पर अमल करना चाहिए |

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तरजुमा

आयत न. 23 : और आपके रब के परवरदिगार ने फ़ैसला फरमा दिया है, कि तुम लोग अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत न करो, माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करो, अगर तुम्हारे सामने इस दोनों में से एक या दोनों बुढ़ापे को पहुँच जाएँ, तो उनको उफ़ भी न कहो और न उनको झिड़को, उनके साथ खूब अदब से बात करो

आयत न. 24 : उनके सामने सरापा रहमत बन कर नरमी के साथ झुके रहना, और दुआ करते रहना कि “ए मेरे रब उन दोनों पर रहम फरमा जैसे उन्होंने बचपन में हमें पाला”

इस आयत में वालिदैन के 6 हुक़ूक़ ( Rights Of Parents ) बयान हुए हैं जो आप नीचे पढ़ सकते हैं

1.वालिदैन के साथ हुस्ने सुलूक करना

माँ बाप औलाद की परवरिश में, उनकी तालीम और तरबियत में, उनको एक अच्छी ज़िन्दगी दिलाने की दौड़ धुप में क्या कुछ नहीं झेलते इसीलिए अल्लाह तआला ने क़ुरान में कई जगह पर फ़रमाया कि मेरे सिवा किसी की इबादत न करना और उसके फ़ौरन बाद ये फ़रमाया कि माँ बाप के साथ हमेशा अच्छा बरताव करना |

2. वालिदैन को उफ़ भी न कहना

माँ बाप या उन दोनों में से कोई एक जब बूढा हो जाये तो उन को उफ़ भी न कहो मतलब ये है कि कोई ऐसा कालिमा ज़ुबान से न निकालो जिस से उन के दिल को तकलीफ़ पहुंचे या उनकी इज्ज़त में कोई फ़र्क आये

मां बाप की इज्जत करना उनकी फ़र्माबरदारी करना हमेशा वाजिब है वो बूढ़े हो या जवान हो लेकिन क़ुरआन में ख़ास कर बुढ़ापे का जिक्र इसलिए फरमाया है कि इस उम्र में आम तौर से मां बाप चिडचिडे हो जाते हैं और बीमार भी रहने लगते हैं औलाद को उनका उगलदान साफ करना पड़ता है मैंले और नापाक कपड़े धोने पड़ते हैं इससे तबीयत बोर होने लगती है

और इन्ही चीज़ों से उकता कर कई बार जुबान से उल्टे सीधे अल्फाज भी निकल जाते हैं लेकिन इस मौके पर सब्र और बर्दाश्त से काम लेना, और मां-बाप का दिल खुश रखना चाहिए, और तकलीफ़ देने वाले जुमले से परहेज़ करना चाहिए, हज़रत मुजाहिद ने फरमाया कि “तू जब वालिदैन के कपड़े वगैरा से गंदगी, पेशाब, पखाना साफ करता है तो इस मौके पर भी उफ़ तक ना कहना जैसा कि वह दोनों तेरे बचपन में तेरा पेशाब पखाना और गन्दगी धोते वक़्त उफ़ नहीं करते थे”

3. उनको मत झिड़कना

उनको झिड़कना उफ़ कहने से भी ज्यादा बुरा है जब उफ़ कहना मना है तो झिड़कना कड़वे कसीले जुमले कहना और उनसे तेज़ आवाज़ में बात करना कैसे दुरुस्त हो सकता है |

4. वालिदैन के साथ अदब से बात करना

यानी मां-बाप से खूब अदब से बात करना, लहजे में नरमी और अल्फ़ाज़ में इज्जत का ख्याल रखना, यह सब और कौलन करीमा में दाखिल है

5. मां-बाप के सामने अदब के साथ झुके रहना

इसकी तफ़सीर में हजरत उरवह ने फरमाया कि “तू उनके सामने इस तरह पेश आ कि उनकी दिली ख्वाहिश पूरी होने में तेरी वजह से फर्क ना आए और हजरत अता बिन रबाह ने इसकी तफ़सीर में फरमाया कि “मां-बाप से बात करते वक्त नीचे ऊपर हाथ मत उठाना जैसा बराबर वालों के साथ बात करते हुए उठाते हैं

और जिस तरह मुर्गी अपने बच्चों के लिए पर झुका देती है उनको अपने परों में छुपा लेती है, बच्चे अंदर से तंग भी कर रहे होते हैं तब भी उन्हें बाहर नहीं धुत्कारती बल्कि इस तकलीफ़ को बर्दाश्त करती है इसी तरह अगर तुम्हारे वालिदैन से तुमको कोई तकलीफ़ पहुँच जाये तो बर्दाश्त कर लेना |

6. वालिदैन के हक में दुआ करना

एक नसीहत यह भी फरमाई कि मां बाप के लिए दुआ करते रहो “ए मेरे रब उन दोनों पर रहम फरमा जैसा कि उन्होंने मुझे बचपन से पाला और परवरिश की”

अल्लाह हम सबके वालिदैन को सलामत रखे

और हमें उनके तमाम हुक़ूक़ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए

और जिनके वालिदैन इंतकाल कर चुके हैं ए अल्लाह उनको करवट करवट सुन्कूं नसीब फरमा दे

अमीन

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