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3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते | Quran की Guaranteed Success

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते |

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते |

Quran की Guaranteed Success

अज़ीज़ साथियों! जब भी आप बिज़नेस या कारोबार का लफ्ज़ सुनते हैं, तो आपके दिमाग में दो चीजें सबसे पहले आती हैं Profit (नफ़ा) और Loss (नुक़सान )। और ये भी हक़ीक़त है कि दुनिया का हर इंसान नफ़ा से खुश होता है और नुक़सान के डर से उसकी रातों की नीन्द उड़ जाती है।

अब ज़रा एक पल के लिए अपनी आँखें बंद करके सोचिये: दुनिया का सबसे अमीर शख्स  अगर आपके पास आकर कहता है, “देखो, बिज़नेस करने के लिए सारा कैपिटल (Paisa/Investment) मैं तुम्हें दूँगा। और तुमको अपनी जेब से एक रुपया भी नहीं लगाना। बस शर्त यह है कि बिज़नेस से जो भी प्रॉफिट होगा, वह 100% तुम्हारा होगा।”

तो क्या आप इस डील को मना करेंगे? यकीनन नहीं! क्यूंकि इसमें खोने के लिए कुछ नहीं है, और पाने के लिए सब कुछ है।” और कोई बेवकूफ ही होगा जो मना करेगा, लेकिन 1 मिनट! क्या आप ने कभी गौर किया कि अल्लाह तआला ने हमारे साथ इससे भी बेहतरीन मामला किया है?

वो ये कि हमारी साँसें, हमारी सेहत, हमारा माल, हमारी औलाद, यहाँ तक कि हमारे जिस्म का एक-एक सेल (cell)। जो कुछ हमारे पास है, यह सब अल्लाह का ‘कैपिटल’ है। और बदले में उसने हमसे क्या मांगा? दिन के 24 घंटों में से चंद मिनटों की नमाज़, साल में सिर्फ एक बार ज़कात, और ज़िंदगी में (अगर हैसियत हो तो) एक बार हज। और बदले में वह हमें क्या दे रहा है? जन्नत! ऐसी कामयाबी जिसका कोई अंत नहीं।

अल्लाह तआला ने क़ुरान मजीद में, सूरह फातिर (Surah Fatir, Ayat 29) में फ़रमाया है

إِنَّ الَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَابَ اللَّهِ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنْفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً يَرْجُونَ تِجَارَةً لَنْ تَبُورَ

बेशक जो लोग अल्लाह की किताब की तिलावत करते हैं, नमाज़ कायम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से छुपकर और खुलकर खर्च करते हैं, वे ऐसी तिजारत के उम्मीदार हैं जो कभी घाटे में नहीं जाएगी।

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते |

इस आयत में तीन ऐसे “अमल” बताए हैं, जिन्हें कुरआन ‘बिज़नेस’ (तिजारत) कहता है। और यह ऐसी तिजारत है जिसके लिए अल्लाह ने एक खास शब्द इस्तेमाल किया है “तिजारत लन तबूर” (Tijarat lan Tabur)। यानी, वह व्यापार जो कभी घाटे में नहीं जाएगा। तो आइए, आज उन 3 बिज़नेस सीक्रेट्स को गहराई से समझते हैं, जो आपकी दुनिया और आखिरत दोनों संवार देंगे।

Business #1: अल्लाह की किताब की तिलावत

पहला बिज़नेस है क़ुरान के साथ अपना रिश्ता जोड़ना इसके बारे में अल्लाह क़ुरान में फरमाया “बेशक जो लोग अल्लाह की किताब की तिलावत करते हैं…” लेकिन दोस्तों, यहाँ रुकिए। “तिलावत” का मतलब क्या सिर्फ तोते की तरह रटना है। आप ख़ुद सोचिये कि हमने अरबी के अल्फाज़ पढ़ लिए और हमारा हक अदा हो गया। बिलकुल नहीं, बेशक, पढ़ने का सवाब अपनी जगह है, लेकिन असली बिज़नेस तब शुरू होता है जब आप इसे समझते हैं और इस पर गौर-ओ-फिक्र करते हैं।

और पढ़ना तो शुरुआत है उसके बाद उसका तर्जुमा समझना और फिर आखिर में उसकी तशरीह और तफ़सीर समझना भी ज़रूरी है, क्यूंकि इसके बगैर कुरआन में मौजूद अल्लाह के पैग़ाम को हम समझ नहीं सकते जो कि समझना हर किसी की ज़िम्मेदारी है |

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते

यह इन्वेस्टमेंट क्यों ज़रूरी है?

सब कुछ होते हुए आज हमारी ज़िंदगी में बेचैनी क्यों है? हमारे पास पैसा है, गैजेट्स हैं, सुविधाएं हैं, लेकिन जो चीज़ नहीं है वो है ‘सुकून’। और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हमारा कनेक्शन उस ‘पावर हाउस’ से कट गया है, जो सुकून का ज़रिया है, यानी क़ुरान। तो अगर आप अल्लाह को जानना चाहते हैं, समझना चाहते हैं, तो उसका बेहतरीन ज़रिया क़ुरआन है। अल्लाह ने खुद अपना तआरुफ़ (Introduction) इस किताब में दिया है।

आपका प्रॉफिट क्या है?

दुनिया के किसी भी बाज़ार में आपको इतना रिटर्न नहीं मिलेगा:

1. एक एक हर हर्फ पर 10 नेकियाँ: और नेकियाँ वो करेंसी है जो शायद आज आपको कागज़ के नोटों जैसी न दिखे, लेकिन जिस दिन आप कब्र के अंधेरे में अकेले होंगे, उस दिन यही करेंसी काम आएगी।

2. कब्र का साथी: जब दुनिया वाले आपको मिट्टी देकर वापस चले जाएंगे, तब यह क़ुरान एक खूबसूरत नौजवान की शक्ल में आपके पास आएगा और कहेगा, “घबराओ मत, मैं तेरा साथी हूँ।” यह आपकी कब्र को रोशन कर देगा।

3. ज़िंदगी में बरकत: जितना आप क़ुरान के करीब होंगे, आपके वक्त और माल में उतनी ही बरकत होगी।

Action Tip: आज ही से एक नियम बनाएं। चाहे एक पेज ही सही, चन्द आयतें ही सही, लेकिन रोज़ाना क़ुरान को समझकर पढ़ें।

Business #2: नमाज़ को कायम करना

दूसरा बिज़नेस है कि जिसकी गारंटी अल्लाह ने ली है, वह है नमाज़। लेकिन ज़रा गौर करें, कि आयत में अल्लाह ने यह नहीं कहा कि “वह नमाज़ पढ़ते हैं”, बल्कि कहा “व-अकामुस्सलाह” (और उन्होंने नमाज़ को कायम किया)।

“नमाज़ पढ़ने” और “नमाज़ कायम करने” में ज़मीन-आसमान का फर्क है।

हम नमाज़ तो पढ़ते हैं, लेकिन क्या मस्जिद से बाहर निकलते ही हमारा अखलाक (Character) वैसा ही रहता है? बल्कि हमें गुस्सा वैसे ही आता है, हम झूठ भी वैसे ही बोलते हैं? याद रखिये,अगर नमाज़ के बाद आपके दिल में नरमी और सुकून महसूस नहीं हो रहा, तो शायद आप नमाज़ कायम नहीं कर रहे, सिर्फ एक रस्म पूरी कर रहे हैं।

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते

 

अपनी नमाज़ में जान कैसे डालें? (Focus बढ़ाने के 2 टिप्स)

अगर आप चाहते हैं कि आपकी नमाज़ हकीकत में अल्लाह से बातचीत बन जाए, तो इन 2 बातों पर अमल करें:

1. अल्लाह आपको देख रहा है (The Camera is on)

जब आप नमाज़ के लिए खड़े हों, तो इमेजिन करें कि आप किसी सीसीटीवी कैमरे के सामने नहीं, बल्कि खालिक-ए-कायनात (The Creator of the Universe) के सामने खड़े हैं, जैसे आप अपने बॉस या किसी वीआईपी (VIP) के सामने अदब से खड़े होते हैं, उससे कहीं ज़्यादा अदब उस ज़ात का होना चाहिए जिसने आपको बनाया है। दिल में यह एहसास जगाएं”मेरा रब मुझे देख रहा है।”

2. आखिरी नमाज़ (The Farewell Prayer)

हर बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहने से पहले अपने दिल से कहें: “शायद यह मेरी ज़िंदगी का आखिरी सजदा हो। शायद इसके बाद मुझे तौबा का मौका न मिले।”
तो जब मौत का एहसास नमाज़ में शामिल होता है, तो इंसान का ध्यान इधर-उधर नहीं भटकता। उसे अपनी हर गलती याद आती है और वह गिड़गिड़ा कर माफी मांगता है।

Business #3: अल्लाह की राह में खर्च करना

तीसरा बिज़नेस है “इन्फाक” (Infaq) यानी खर्च करना।

مَّثَلُ الَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِي كُلِّ سُنبُلَةٍ مِّائَةُ حَبَّةٍ

जो लोग अल्लाह की राह में अपना माल खर्च करते हैं, उनकी मिसाल उस दाने की तरह है जिससे सात बालियां उगती हैं, हर बाली में सौ दाने होते हैं।

यह दुनिया का सबसे अजीब गणित (Math) है।
दुनियावी गणित कहता है: 100 – 10 = 90 (पैसा घट गया)।
अल्लाह का गणित कहता है: 100 – 10 = 700+ (पैसा बढ़ गया)।
यह ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ (Multiplier Effect) है

3 ऐसे Business जो कभी घाटे में नहीं जाते

अल्लाह ने वादा किया है कि सदक़ा (Charity) करने से माल कभी कम नहीं होता। बल्कि जब आप किसी गरीब की मदद करते हैं, या किसी अच्छे काम में पैसा लगाते हैं, तो अल्लाह उस माल में ऐसी बरकत डालता है कि वह कई गुना होकर वापस आता है। हाँ, लेकिन ज़रूरी नहीं कि यह वापसी कैश (Cash) के रूप में ही हो, कभी कभी किसी बड़ी बीमारी या मुसीबत के टल जाने के रूप में भी होती है।

क्या आप डील पक्की करेंगे?

दोस्तों, यह ज़िंदगी एक बाज़ार है और हम सब यहाँ व्यापारी हैं। हम हर रोज़ अपनी साँसें, अपना वक्त और अपनी एनर्जी बेच रहे हैं। बस सवाल सिर्फ यह है कि हम इसे किस कीमत पर बेच रहे हैं? क्या हम इसे दुनिया की छोटी-मोटी चीज़ों के बदले बेच रहे हैं जो यहीं रह जाएंगी? या हम इसे उस रब के हाथों बेच रहे हैं जो हमें “तिजारत लन तबूर” (कभी न खत्म होने वाला मुनाफा) देने का वादा कर रहा है?

आपका आज का एक्शन प्लान (Action Plan):

इस ब्लॉग को सिर्फ पढ़कर बंद न करें, बल्कि आज ही इन तीन में से किसी एक पर अमल शुरू करें:

1. क़ुरान: आज से सिर्फ 10 मिनट क़ुरान समझने के लिए निकालें।
2. नमाज़: अगली नमाज़ में यह सोचकर जाएं कि “यह मेरी आखिरी नमाज़ है”।
3. सदक़ा: अपनी इनकम का एक छोटा सा हिस्सा (चाहे 10 रुपये ही क्यों न हो) आज ही किसी ज़रूरतमंद को दें।

अल्लाह हम सबको इस बेहतरीन तिजारत में शामिल होने की तौफीक दे। (आमीन)

Q1: अगर मेरे पास पैसे नहीं हैं, तो मैं तीसरा बिज़नेस (सदक़ा) कैसे करूँ?

Ans: इस्लाम में सदक़ा सिर्फ पैसे देना नहीं है। किसी से मुस्कुरा कर मिलना, किसी की मदद कर देना, या किसी को अच्छी बात बताना भी सदक़ा है। आप अपनी सलाहियतों (Skills) का भी सदक़ा कर सकते हैं।

Q2: नमाज़ में ध्यान (Khushu) कैसे लाएं?

Ans: जैसे कि बताया गया, यह महसूस करें कि अल्लाह आपको देख रहा है और मौत को याद रखें। इसके अलावा, नमाज़ में जो पढ़ रहे हैं, उसका मतलब समझने की कोशिश करें, इससे ध्यान भटकना कम हो जाएगा।

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करके ‘सदक़ा-ए-जारिया’ का हिस्सा बनें।

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