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5 duas for fighting from stress | 5 दुआएं दुःख, मुश्किल, स्ट्रेस और डिप्रेशन से लड़ने के लिए

5 duas for fighting from stress

5 दुआएं दुःख, मुश्किल, स्ट्रेस और डिप्रेशन से लड़ने के लिए

चूंकि हर इंसान खुदा ही का बंदा है और बन्दे खुदा ही के ज़रिये आराम पते हैं इसलिए इंसान का फ़र्ज़ है किवो हर रहत और सुकून को अल्लाह ही की तरफ समझे और हर मौके पर अल्लाह ही को याद करे चाहे वो मुश्किल का दौर हो या आसानी का दौर हो

इस दुनिया को सच्चा रास्ता दिखने वाले हादी मुहम्मद सल्लाल लाहू अलैहि वसल्लम दुनिया व आखिरत की कोई भलाई नहीं छोड़ी जो अल्लाह से न मांग ली हो

इंसान जब सारी दुनिया की तरफ से धुत्कार दिया जाता है और सामने उसे कोई ऐसा हाथ नज़र नहीं आता जो उसको सहारा दे सके कोई डॉक्टर नज़र नहीं आता जो उसका इलाज कर सके तो आखिर में उसे एक दुआ का सहारा ही नज़र आता है जिससे इलाज और मुश्किल का हल करना तो दूर तकदीरें तक बदल जाया करती हैं

और आज तो दुःख, मुश्किल, परेशानी, ज़हनी दबाव, स्ट्रेस ,और डिप्रेशन की बीमारी तो आम है लेकिन मायूस होने की ज़रुरत नहीं अल्लाह फरमाता है तुम मुझ से मांगो मैं कुबूल करूँगा और

इन तमाम चीजों के हल के लिए कभी नबी ने और किसी बड़े बुज़ुर्ग ने दुआये की हैं उन्ही में से

पांच दुआएं आप के सामने पेश की जाती हैं

1.      ला इलाहा इल्ला अंता सुबहा नका इन्नी कुन्तु मिनज़ ज़लिमीन

 

ऐ अल्लाह तेरे सिवा कोई माबूद नहीं तु पाक है बेशक मैं गुनाह करके अपनी जान पर ज़ुल्म करने वालों में से हूँ

बहुत ही ताकतवर दुआ आपके मां बाप के लिए

 

2.     अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिन जह्दिल बलाई व दरकिश शकाई व सूइल क़जाई व शमाततिल आदाई

 

ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह मांगता हूँ  आज़माइश की मशक्क़त से ,बदबख्ती के पाने से ,बुरी तकदीर से ,और दुश्मनों के खुश होने से

 

3.     या हय्यु या क़य्यूमु बिरहम तिक अस्तगीसू

 

ऐ जिंदा और कायम रखने वाले मैं तेरी रहमत के वास्ते से फ़रियाद करा हूँ

4.      अल्लाहुम्मा ला सहला इल्ला माँ जअल तहू सहला व अंता तज अलुल हजना इजा शिअता सहला

 

ऐ अल्लाह कोई काम आसान नहीं मगर वो काम जिसको तु आसान बना दे  और तु जब चाहे तो संग्लाख ज़मीनों को भी हमवार कर दे

5 .    अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिनल हम्मि वल हुज्नी वल अज्ज़ी वल कसली वल बुखनी वल जुब्नी व
ज़लइद देनी व गल्बतिर रिजाल

 

ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह चाहता हूँ परेशानी और गम से ,आजिज़ी और काहिली से ,बुजदिली और बुख्ल से ,और पनाह चाहता हूँ क़र्ज़ के बोझ और लोगों के गलबे से

 

 

आपका कोई भी करीबी इन परेशानियों से दो चार हो तो उसके साथ ये पोस्ट ज़रूर शेयर करें 

 

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